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एकश्लोकी — Word-by-Word Meaning

एकश्लोकी

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

Complete Translation

आदि शंकराचार्य का एक-श्लोकीय संवाद, जो आत्मा को उस प्रकाश रूप में इंगित करता है जिससे सब जाना जाता है — "तेरा प्रकाश क्या है? दिन में सूर्य, रात में दीप… और दीप किस प्रकाश से दिखता है? — वही मैं हूँ।"

Origin & History

Source: Ascribed to Adi Shankaracharya

Author: Adi Shankaracharya

Period: Classical

एकश्लोकी परंपरागत रूप से आदि शंकराचार्य को आरोपित है। यह आदि शंकराचार्य का एक-श्लोकीय संवाद है, जो आत्मा को उस प्रकाश रूप में इंगित करता है जिससे सब जाना जाता है — "तेरा प्रकाश क्या है? दिन में सूर्य, रात में दीप… और दीप किस प्रकाश से दिखता है? — वही मैं हूँ।"

Frequently Asked Questions

एकश्लोकी क्या है?
आदि शंकराचार्य का एक-श्लोकीय संवाद, जो आत्मा को उस प्रकाश रूप में इंगित करता है जिससे सब जाना जाता है — "तेरा प्रकाश क्या है? दिन में सूर्य, रात में दीप… और दीप किस प्रकाश से दिखता है? — वही मैं हूँ।"
इसकी रचना किसने की और इसका पाठ कब किया जाता है?
यह आदि शंकराचार्य को आरोपित है। इसका पाठ प्रातः या सायंकाल भक्ति सहित किया जाता है, विशेषकर सोमवार को तथा महाशिवरात्रि और श्रावण में।

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