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बिल्वाष्टकम्

🕉️ hindu·📿 1× जप·🕐 शिवपूजा के समय; विशेषकर सोमवार, प्रदोष, श्रावण और महाशिवरात्रि पर·🎵 ऑडियो सहित·📜 Traditional Shaiva stotra

अन्य नाम / खोज: tridalam trigunakaram · bilvashtakam lyrics · bilva ashtakam

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अर्थ

बिल्वाष्टकम् शिवजी को बिल्वपत्र अर्पित करते समय पढ़ा जाने वाला आठ श्लोकों का स्तोत्र है, जिसका प्रत्येक श्लोक 'एकबिल्वं शिवार्पणम्' से समाप्त होता है। यह बताता है कि भक्ति से अर्पित एक बिल्वपत्र तीन जन्मों के पापों को धो देता है और महान यज्ञों के समान पुण्य देता है। श्रावण, सोमवार, प्रदोष और महाशिवरात्रि पर इसका विशेष महत्त्व है।

उत्पत्ति और कथा

Traditional Shaiva stotra · Traditional (attributed in the Shaiva canon) · Ancient / medieval

बिल्वाष्टक बिल्वपत्र अर्पित करते समय पढ़ा जाने वाला पारंपरिक स्तोत्र है — बिल्वपत्र शिवपूजा में सर्वश्रेष्ठ पत्र माना जाता है। यह पुराणों में फैली उस मान्यता को व्यक्त करता है कि भोलेनाथ शिव सबसे सहज प्रसन्न होने वाले देव हैं और प्रेम से अर्पित एक बिल्वपत्र से भी प्रसन्न हो जाते हैं। बदले में वे सबसे महँगे यज्ञ से भी कहीं अधिक आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

शास्त्रों में वर्णित

शिवपुराण ऐसे भक्तों की कथाओं से भरा है — अनजाने में पूजा करने वाले शिकारियों तक — जिन्होंने रातभर शिवलिंग पर बिल्वपत्र गिरने देकर मुक्ति पाई। बिल्वाष्टक इसी वचन को धारण करता है: भक्ति से अर्पित एक विनम्र पत्र हजार यज्ञों से भारी है और आत्मा को शिवलोक तक ले जाता है।

सुनें और साथ में जपें

सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित

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श्लोक 1

त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं त्रियायुधम् त्रिजन्मपापसंहारं एकबिल्वं शिवार्पणम् १॥

Tridalam trigunakaram trinetram cha triyayudham Trijanmapapasamharam ekabilvam shivarpanam

अर्थ:तीन दल वाला, त्रिगुणस्वरूप, शिव के तीन नेत्रों और तीन आयुधों के समान, तीन जन्मों के पाप का नाश करने वाला — यह एक बिल्वपत्र शिव को अर्पित है।

श्लोक 2

त्रिशाखैः बिल्वपत्रैश्च ह्यच्छिद्रैः कोमलैः शुभैः शिवपूजां करिष्यामि ह्येकबिल्वं शिवार्पणम् २॥

Trishakhaih bilvapatraishcha hyachchhidraih komalaih shubhaih Shivapujam karishyami hyekabilvam shivarpanam

अर्थ:तीन शाखाओं वाले, छिद्ररहित, कोमल और शुभ बिल्वपत्रों से मैं शिव की पूजा करूँगा — यह एक बिल्वपत्र शिव को अर्पित है।

श्लोक 3

अखण्ड बिल्व पत्रेण पूजिते नन्दिकेश्वरे शुद्ध्यन्ति सर्वपापेभ्यो ह्येकबिल्वं शिवार्पणम् ३॥

Akhanda bilva patrena pujite nandikeshvare Shuddhyanti sarvapapebhyo hyekabilvam shivarpanam

अर्थ:अखण्ड बिल्वपत्र से नन्दिकेश्वर (शिव) की पूजा करने पर मनुष्य समस्त पापों से शुद्ध हो जाता है — यह एक बिल्वपत्र शिव को अर्पित है।

श्लोक 4

शालिग्राम शिलामेकां विप्राणां जातु चार्पयेत् सोमयज्ञ महापुण्यं एकबिल्वं शिवार्पणम् ४॥

Shaligrama shilamekam vipranam jatu charpayet Somayajna mahapunyam ekabilvam shivarpanam

अर्थ:(एक बिल्वपत्र अर्पित करना) ब्राह्मणों को शालिग्राम शिला दान करने और सोमयज्ञ के महान पुण्य के समान है — यह एक बिल्वपत्र शिव को अर्पित है।

श्लोक 5

दन्तिकोटि सहस्राणि वाजपेय शतानि कोटिकन्या महादानं एकबिल्वं शिवार्पणम् ५॥

Dantikoti sahasrani vajapeya shatani cha Kotikanya mahadanam ekabilvam shivarpanam

अर्थ:(यह) हजार करोड़ हाथियों के दान, सौ वाजपेय यज्ञों और करोड़ कन्यादान के समान है — यह एक बिल्वपत्र शिव को अर्पित है।

श्लोक 6

लक्ष्म्यास्तनुत उत्पन्नं महादेवस्य प्रियम् बिल्ववृक्षं प्रयच्छामि ह्येकबिल्वं शिवार्पणम् ६॥

Lakshmyastanuta utpannam mahadevasya cha priyam Bilvavriksham prayachchhami hyekabilvam shivarpanam

अर्थ:लक्ष्मी के शरीर से उत्पन्न और महादेव को अति प्रिय — ऐसे बिल्ववृक्ष को मैं अर्पित करता हूँ — यह एक बिल्वपत्र शिव को अर्पित है।

श्लोक 7

दर्शनं बिल्ववृक्षस्य स्पर्शनं पापनाशनम् अघोरपापसंहारं एकबिल्वं शिवार्पणम् ७॥

Darshanam bilvavrikshasya sparshanam papanashanam Aghorapapasamharam ekabilvam shivarpanam

अर्थ:बिल्ववृक्ष का दर्शन और स्पर्श पाप का नाश करता है; घोर (अघोर) पापों का भी संहार करता है — यह एक बिल्वपत्र शिव को अर्पित है।

श्लोक 8

काशीक्षेत्रनिवासं कालभैरवदर्शनम् प्रयागमाधवं दृष्ट्वा ह्येकबिल्वं शिवार्पणम्

Kashikshetranivasam cha kalabhairavadarshanam Prayagamadhavam drishtva hyekabilvam shivarpanam

अर्थ:(यह) काशीवास, कालभैरव के दर्शन और प्रयाग में माधव के दर्शन का फल देता है — यह एक बिल्वपत्र शिव को अर्पित है।

श्लोक 9

मूलतो ब्रह्मरूपाय मध्यतो विष्णुरूपिणे अग्रतः शिवरूपाय ह्येकबिल्वं शिवार्पणम् ८॥

Mulato brahmarupaya madhyato vishnurupine Agratah shivarupaya hyekabilvam shivarpanam

अर्थ:जिसके मूल में ब्रह्मा, मध्य में विष्णु और अग्रभाग में शिव का रूप है — यह एक बिल्वपत्र शिव को अर्पित है।

श्लोक 10

बिल्वाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेत् शिवसन्निधौ सर्वपाप विनिर्मुक्तः शिवलोकमवाप्नुयात्

Bilvashtakamidam punyam yah pathet shivasannidhau Sarvapapa vinirmuktah shivalokamavapnuyat

अर्थ:जो इस पवित्र बिल्वाष्टक का शिव के समीप पाठ करता है, वह समस्त पापों से मुक्त होकर शिवलोक को प्राप्त करता है।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

एकबिल्वं शिवार्पणम्🔊Ekabilvam Shivarpanamयह एक बिल्व (बेल) पत्र मैं शिव को अर्पित करता हूँ
त्रिदलं🔊Tridalamत्रिदल (बिल्व) पत्र
त्रिगुणाकारं🔊Trigunakaramतीन गुणों (सत्त्व, रजस्, तमस्) का प्रतीक
त्रिनेत्रं🔊Trinetramशिव के तीन नेत्र
त्रिजन्मपापसंहारं🔊Trijanma-papa-samharamतीन जन्मों के पापों का नाश करने वाला
नन्दिकेश्वरे🔊Nandikeshvareनन्दिकेश्वर (भगवान शिव) में/को
पापनाशनम्🔊Papanashanamपाप का नाश करने वाला
शिवलोकम्🔊Shivalokamशिव का धाम (शिवलोक)

बिल्वाष्टकम् पाठ के लाभ

शिवलिंग को बिल्वपत्र अर्पित करते समय पढ़ा जाता है — कहा जाता है कि प्रत्येक पत्र तीन जन्मों के पापों को धो देता है।

बिल्वाष्टक कहता है कि शिव को अर्पित एक बिल्वपत्र महान यज्ञों और विशाल दान के समान पुण्य देता है।

बिल्ववृक्ष का दर्शन और स्पर्श भी पापों का, यहाँ तक कि घोर (अघोर) पापों का भी नाश करता है।

काशीवास, कालभैरव के दर्शन और अंततः शिवलोक की प्राप्ति का वचन देता है।

श्रावण मास, सोमवार, प्रदोष और महाशिवरात्रि पर विशेष रूप से फलदायक है।

छोटा और सरल होने से दैनिक शिवपूजा और अभिषेक में सहजता से पढ़ा जा सकता है।

बिल्वाष्टकम् जप विधि

जप संख्या1बार
उत्तम समयशिवपूजा के समय; विशेषकर सोमवार, प्रदोष, श्रावण और महाशिवरात्रि पर
दिशाEast or North

ताजे, अखण्ड, त्रिदल बिल्वपत्रों को शिवलिंग पर अर्पित करते हुए बिल्वाष्टक पढ़ें, यदि संभव हो तो प्रत्येक श्लोक के साथ एक पत्र। ऐसे पत्र चुनें जो पूर्ण, कोमल और छिद्ररहित हों, और उनका चिकना भाग लिंग को स्पर्श करे। जल के साथ शान्त एवं भक्तिपूर्ण मन से अर्पित करें और अंत में 'ॐ नमः शिवाय' कहें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिल्वाष्टकम् आठ श्लोकों का स्तोत्र है जो भगवान शिव को बिल्वपत्र अर्पित करते समय पढ़ा जाता है। प्रत्येक श्लोक 'एकबिल्वं शिवार्पणम्' — 'यह एक बिल्वपत्र शिव को अर्पित है' — से समाप्त होता है और इस अर्पण के अपार पुण्य का वर्णन करता है।
त्रिदल बिल्वपत्र शिव के तीन नेत्रों, उनके त्रिशूल और तीन गुणों का प्रतीक है। बिल्वाष्टक कहता है कि इसके मूल में ब्रह्मा, मध्य में विष्णु और अग्रभाग में शिव हैं, इसीलिए यह महादेव को अति प्रिय है।
इसे शिवपूजा के समय पढ़ा जाता है, और सोमवार, प्रदोष, पवित्र श्रावण मास तथा महाशिवरात्रि पर यह विशेष रूप से शुभ है।
यह स्तोत्र कहता है कि शिव को एक अखण्ड बिल्वपत्र अर्पित करना तीन जन्मों के पापों को धो देता है और महान यज्ञों एवं विशाल दान के समान पुण्य देता है, जो अंततः शिवलोक तक ले जाता है।

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