अनायासेन मरणम्
अन्य नाम / खोज: anayasena maranam · anayasena maranam vina dainyena jivanam · dehi me kripaya shambho · peaceful death prayer · good death mantra · shambho mantra for moksha
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✦ अर्थ
अनायासेन मरणम् भगवान शिव (शम्भु) से की जाने वाली एक अत्यन्त प्रिय एक-श्लोकी प्रार्थना है, जिसमें तीन वरदान माँगे जाते हैं: क्लेशरहित-शान्त मृत्यु; दैन्य एवं परावलम्बन से रहित जीवन; और प्रभु में अटल भक्ति। यह 'सुमरण' (अच्छी मृत्यु) तथा भक्ति से सुशोभित गरिमामय जीवन के हिन्दू आदर्श को व्यक्त करती है। सरल किन्तु गम्भीर यह प्रार्थना विशेषतः वृद्धजनों एवं अपने अन्तिम वर्षों में कृपा की कामना करने वाले भक्तों को प्रिय है।
उत्पत्ति और कथा
Traditional Shaiva devotional prayer (a beloved subhashita / stotra verse to Shambhu) · Traditional (anonymous devotional verse) · Classical / medieval devotional tradition
यह एक ही श्लोक हिन्दू आध्यात्मिक जीवन के हृदय में स्थित एक गम्भीर अभिलाषा को संक्षेप में व्यक्त करता है: केवल मृत्यु से बचना नहीं, अपितु उसका शान्ति से सामना करना, बिना दीनता के जीना, और इन सबके बीच ईश्वर को दृढ़ता से थामे रहना। शम्भु — शिव के परम कृपालु स्वरूप जो मंगल प्रदान करते हैं — को सम्बोधित यह श्लोक शैव भक्ति परम्परा में नित्य प्रार्थना एवं मृत्यु पर एक ध्यान के रूप में पीढ़ी-दर-पीढ़ी चला आया है। कष्टरहित अन्त, गरिमामय जीवन तथा अटल भक्ति माँगने वाली इसकी शान्त विवेकपूर्णता ने इसे गृहस्थों एवं संन्यासियों — दोनों के बीच — सर्वाधिक प्रिय एवं बारम्बार पढ़ी जाने वाली प्रार्थनाओं में से एक बना दिया है।
✦ शास्त्रों में वर्णित
कहा जाता है कि जो इस प्रार्थना को सच्चे भाव से धारण करते हैं वे मृत्यु का भय खो देते हैं और मन शम्भु में लीन रखते हुए शान्ति से अपना अन्त पाते हैं — क्योंकि भगवान, ऐसी अटल भक्ति से प्रसन्न होकर, ठीक वही शान्तिमय देहान्त प्रदान करते हैं जिसकी भक्त ने उनसे याचना की थी।
मंत्र
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अनायासेन मरणं विना दैन्येन जीवनम्। देहि मे कृपया शम्भो त्वयि भक्तिमचञ्चलाम्॥
Anāyāsena maraṇaṁ vinā dainyena jīvanam। Dehi me kṛpayā śambho tvayi bhaktim acañcalām॥
अर्थ:हे शम्भो (भगवान शिव), अपनी कृपा से मुझे क्लेशरहित (अनायास) मृत्यु प्रदान करें, दैन्य (दीनता) से रहित जीवन दें, और आप में अचंचल (अटल) भक्ति प्रदान करें।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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अनायासेन मरणम् पाठ के लाभ
क्लेशरहित, शान्त एवं गरिमामय मृत्यु ('अच्छी मृत्यु' का आदर्श) की प्रार्थना करती है
दैन्य, असहायता एवं दूसरों पर निर्भरता से रहित जीवन माँगती है
भगवान शिव में स्थिर, अटल भक्ति को विकसित करती एवं माँगती है
मन को शान्ति देती है और मृत्यु के भय से मुक्त करती है
वृद्धजनों के लिए तथा मरणासन्न की सेवा करने वालों के लिए विशेष रूप से सान्त्वनादायक है
हृदय को समर्पण (शरणागति) तथा शम्भु की कृपा की ओर मोड़ती है
अनायासेन मरणम् जप विधि
इस श्लोक का पाठ शान्त, समर्पित हृदय से अपनी नित्य प्रार्थना के अंग रूप में करें, अथवा जब भी मन मृत्यु के विचारों एवं कृपा की कामना की ओर मुड़े। भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग के समक्ष शान्ति से बैठें, उन्हें 'शम्भो' कहकर सम्बोधित करें, और श्लोक में वर्णित तीनों वरदानों की सच्चे मन से याचना करें। इसका पूर्ण भाव से ग्यारह या अधिक बार पाठ करना परम्परागत है; अनेक लोग इसे विशेषतः सोमवार एवं प्रदोष को पढ़ते हैं। यह वृद्धजनों के लिए तथा जीवन के अन्त के निकट पहुँचे लोगों की शान्ति के लिए अर्पित करने योग्य प्रार्थना भी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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