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अनायासेन मरणम् — Word-by-Word Meaning

अनायासेन मरणम्

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

अनायासेन
anāyāsena
बिना प्रयास, संघर्ष या कष्ट के; अनायास, शान्तिपूर्वक
मरणम्
maraṇam
मृत्यु; (शान्तिमय) देहान्त
विना
vinā
बिना
दैन्येन
dainyena
दीनता, असहायता, दूसरों पर निर्भरता
जीवनम्
jīvanam
जीवन, जीने का ढंग
देहि
dehi
प्रदान करें, दें
मे
me
मुझे, मेरे लिए
कृपया
kṛpayā
अपनी कृपा एवं करुणा से
शम्भो
śambho
हे शम्भु (शिव, मंगल एवं आनन्द के स्रोत)
त्वयि
tvayi
आप में, आपकी ओर
भक्तिम्
bhaktim
भक्ति, प्रेममयी श्रद्धा
अचञ्चलाम्
acañcalām
अचंचल, स्थिर, अटल

Complete Translation

हे शम्भो (भगवान शिव), अपनी कृपा से मुझे क्लेशरहित (अनायास) मृत्यु प्रदान करें, दैन्य (दीनता) से रहित जीवन दें, और आप में अचंचल (अटल) भक्ति प्रदान करें।

Origin & History

Source: Traditional Shaiva devotional prayer (a beloved subhashita / stotra verse to Shambhu)

Author: Traditional (anonymous devotional verse)

Period: Classical / medieval devotional tradition

यह एक ही श्लोक हिन्दू आध्यात्मिक जीवन के हृदय में स्थित एक गम्भीर अभिलाषा को संक्षेप में व्यक्त करता है: केवल मृत्यु से बचना नहीं, अपितु उसका शान्ति से सामना करना, बिना दीनता के जीना, और इन सबके बीच ईश्वर को दृढ़ता से थामे रहना। शम्भु — शिव के परम कृपालु स्वरूप जो मंगल प्रदान करते हैं — को सम्बोधित यह श्लोक शैव भक्ति परम्परा में नित्य प्रार्थना एवं मृत्यु पर एक ध्यान के रूप में पीढ़ी-दर-पीढ़ी चला आया है। कष्टरहित अन्त, गरिमामय जीवन तथा अटल भक्ति माँगने वाली इसकी शान्त विवेकपूर्णता ने इसे गृहस्थों एवं संन्यासियों — दोनों के बीच — सर्वाधिक प्रिय एवं बारम्बार पढ़ी जाने वाली प्रार्थनाओं में से एक बना दिया है।

Frequently Asked Questions

अनायासेन मरणम् प्रार्थना में क्या माँगा जाता है?
इसमें भगवान शिव (शम्भु) से तीन वस्तुएँ माँगी जाती हैं: 'अनायासेन मरणम्' — कष्टरहित, अनायास मृत्यु; 'विना दैन्येन जीवनम्' — दैन्य या असहाय निर्भरता से रहित जीवन; और 'त्वयि भक्तिम् अचञ्चलाम्' — उनमें अचंचल भक्ति।
यह प्रार्थना इतनी महत्त्वपूर्ण क्यों मानी जाती है?
हिन्दू चिन्तन में मनुष्य की मृत्यु का ढंग तथा जीवन की गरिमा का बड़ा महत्त्व है। यह श्लोक 'अच्छी मृत्यु' तथा आत्मसम्मानयुक्त जीवन की प्रार्थना को सुन्दर ढंग से व्यक्त करता है, दोनों स्थिर भक्ति पर आधारित — इसीलिए यह जीवन और मृत्यु के विषय में सर्वाधिक उद्धृत प्रार्थनाओं में से एक है।
मन्त्र में सम्बोधित शम्भु कौन हैं?
शम्भु भगवान शिव का एक नाम है, जिसका अर्थ है 'मंगल एवं आनन्द के स्रोत' (शम् = कल्याण, भु = प्रदान करने वाले)। भक्त शिव के इस कृपालु, हितकारी स्वरूप से करुणा की याचना करता है।
क्या मैं यह प्रार्थना किसी वृद्ध या रुग्ण परिजन के लिए कर सकता हूँ?
हाँ। अनेक भक्त इसे अपने वृद्ध या रुग्ण प्रियजनों के लिए पढ़ते हैं, यह प्रार्थना करते हुए कि वे गरिमा के साथ जिएँ और भगवान शिव की कृपा में शान्तिपूर्वक देह त्यागें। यह प्रार्थना करने वाले एवं जिनके लिए की जाती है — दोनों के लिए एक कोमल सान्त्वना है।

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