शिव अपराध क्षमापन स्तोत्रम्
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✦ अर्थ
शिव अपराध क्षमापन स्तोत्रम् भगवान शिव से अपनी पूजा और जीवन की त्रुटियों व अपराधों की क्षमा माँगती हुई एक हृदयस्पर्शी प्रार्थना है — 'हे शंकर, पार्वतीपते, कृपा कर मेरी रक्षा करो।' आदि शंकराचार्य को आरोपित यह स्तोत्र शरणागत भाव से प्रभु से समस्त अपराध क्षमा कर कृपा देने की याचना करता है। इसे सोमवार और महाशिवरात्रि पर विशेष रूप से जपा जाता है।
उत्पत्ति और कथा
Traditional (ascribed to Adi Shankaracharya) · Adi Shankaracharya · Classical
शिव अपराध क्षमापन स्तोत्रम् परंपरागत रूप से आदि शंकराचार्य को आरोपित है। यह भगवान शिव से अपनी पूजा और जीवन की त्रुटियों व अपराधों की क्षमा माँगती हुई एक हृदयस्पर्शी प्रार्थना है — 'हे शंकर, पार्वतीपते, कृपा कर मेरी रक्षा करो।' शरणागत भाव से यह प्रभु से समस्त अपराध (अपराध) क्षमा कर अपनी कृपा देने की याचना करता है।
✦ शास्त्रों में वर्णित
कहा जाता है कि शिव अपराध क्षमापन स्तोत्रम् को सच्चे और भक्तिपूर्ण हृदय से जपना प्रभु की कृपा के निकट जाना है, जो उन्हें कभी नहीं त्यागते जो प्रेमपूर्वक उन्हें पुकारते हैं।
मंत्र
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जय शङ्कर पार्वतीपते कृपया पाहि परेश सत्पते । निजमन्युमिषुं तथेषुधिं परिहायैहि हरन्भवाम्बुधिम् ॥ १॥ पशुपाय नमः पिनाकिने वृषवाहाय सुगुप्तनाकिने । प्रमथाधिभुवे स्वयम्भुवे परविद्याविभवेऽस्तु शम्भवे ॥ २॥ प्रवरोऽस्म्यहमीश पापिनां प्रवरस्त्वं करुणोऽसि तापिनाम् । दयनीय इतःपरः क्व ते वद शम्भो जगतीह सद्गते ॥ ३॥ सचराचरविश्वहेतवे प्रभवे ते श्रुतिधर्मसेतवे । भिषजेऽस्तु नमोऽष्टमूर्तये निजभक्तेप्सितकामपूर्तये ॥ ४॥ इति श्रीवासुदेवानन्दसरस्वतीविरचितं श्रीशङ्करापराधक्षमापनस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।
jaya śaṅkara pārvatīpate kṛpayā pāhi pareśa satpate | nijamanyumiṣuṃ tatheṣudhiṃ parihāyaihi haranbhavāmbudhim || 1|| paśupāya namaḥ pinākine vṛṣavāhāya suguptanākine | pramathādhibhuve svayambhuve paravidyāvibhave'stu śambhave || 2|| pravaro'smyahamīśa pāpināṃ pravarastvaṃ karuṇo'si tāpinām | dayanīya itaḥparaḥ kva te vada śambho jagatīha sadgate || 3|| sacarācaraviśvahetave prabhave te śrutidharmasetave | bhiṣaje'stu namo'ṣṭamūrtaye nijabhaktepsitakāmapūrtaye || 4|| iti śrīvāsudevānandasarasvatīviracitaṃ śrīśaṅkarāparādhakṣamāpanastotraṃ sampūrṇam |
अर्थ:भगवान शिव से अपनी पूजा व जीवन की त्रुटियों व अपराधों की क्षमा माँगती हुई हृदयस्पर्शी प्रार्थना — "हे शंकर, पार्वतीपते, कृपा कर मेरी रक्षा करो।" शरणागत भाव से यह स्तोत्र प्रभु से समस्त अपराध क्षमा कर कृपा देने की याचना करता है।
शिव अपराध क्षमापन स्तोत्रम् पाठ के लाभ
शिव अपराध क्षमापन स्तोत्रम् का पाठ प्रभु की कृपा, आशीर्वाद और संरक्षण लाने वाला माना जाता है।
भक्ति विकसित करता है, मन को शांत करता है और प्रभु के स्मरण में हृदय को स्थिर करता है।
सोमवार को, तथा महाशिवरात्रि, प्रदोष और श्रावण मास के समय सर्वाधिक शुभ।
एक संक्षिप्त, मधुर स्तोत्र जिसे कोई भी सीखकर श्रद्धा के साथ नित्य जप सकता है।
शिव अपराध क्षमापन स्तोत्रम् जप विधि
स्नान करके देवता की प्रतिमा के सामने पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। दीप जलाएँ और शिव अपराध क्षमापन स्तोत्रम् को धीरे-धीरे और भक्ति के साथ जपें। इसे नित्य जपा जा सकता है, अथवा विशेषकर महाशिवरात्रि, प्रदोष और श्रावण मास के समय। कृपा और संरक्षण की प्रार्थना के साथ समाप्त करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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