शिव पञ्चाक्षर स्तोत्र
अन्य नाम / खोज: nagendra haraya trilochanaya · shiva panchakshara stotram · panchakshara stotra
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✦ अर्थ
शिव पञ्चाक्षर स्तोत्र पाँच श्लोकों का स्तोत्र है जो पंचाक्षर मन्त्र 'न-म-शि-व-य' की महिमा गाता है — प्रत्येक पवित्र अक्षर के लिए एक श्लोक। प्रत्येक श्लोक शिव के एक रूप की स्तुति करता है और 'नमः शिवाय' से समाप्त होता है। पारम्परिक रूप से इसे आदि शंकराचार्य द्वारा रचित माना जाता है।
उत्पत्ति और कथा
Attributed to Adi Shankaracharya · Adi Shankaracharya (traditional) · c. 8th century CE
पंचाक्षर — 'नमः शिवाय' — शैव सम्प्रदाय का हृदय-मन्त्र है, जो यजुर्वेद के श्रीरुद्रम् से लिया गया है। यह स्तोत्र, जो पारम्परिक रूप से आदि शंकराचार्य को आरोपित है, पाँचों पवित्र अक्षरों को माला रूप में गूँथता है, प्रत्येक को एक श्लोक समर्पित करता है, ताकि मन्त्र के अक्षर ही महादेव के रूप और महिमा का पूर्ण ध्यान बन जाएँ।
✦ शास्त्रों में वर्णित
शिव पुराण पंचाक्षर को समस्त मन्त्रों का सार बताता है, जो बड़े से बड़े पापी को भी मुक्त कर सकता है। पाँच अक्षरों को पाँच श्लोकों में पिरोकर यह स्तोत्र भक्त को प्रत्येक आवृत्ति में शिव की आपादमस्तक पूजा करने देता है — और इसके अपने शब्द उन सबको शिवलोक का वचन देते हैं जो इसे श्रद्धा से पढ़ते हैं।
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नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय । नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नमः शिवाय ॥ १॥
Nagendraharaya trilochanaya Bhasmangaragaya maheshvaraya Nityaya shuddhaya digambaraya Tasmai nakaraya namah shivaya
अर्थ:जो नागराज को हार रूप में धारण करते हैं, त्रिनेत्रधारी, भस्म का अंगराग किए हुए महेश्वर — नित्य, शुद्ध और दिगम्बर — उस 'न' कार स्वरूप शिव को नमस्कार।
मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय । मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय तस्मै मकाराय नमः शिवाय ॥ २॥
Mandakinisalilachandanacharchitaya Nandishvarapramathanathamaheshvaraya Mandarapushpabahupushpasupujitaya Tasmai makaraya namah shivaya
अर्थ:गंगाजल और चन्दन से चर्चित, नन्दी एवं प्रमथगणों के नाथ महेश्वर, मन्दार आदि अनेक पुष्पों से सुपूजित — उस 'म' कार स्वरूप शिव को नमस्कार।
शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द- सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय । श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय तस्मै शिकाराय नमः शिवाय ॥ ३॥
Shivaya gaurivadanabjavrinda- Suryaya dakshadhvaranashakaya Shrinilakanthaya vrishadhvajaya Tasmai shikaraya namah shivaya
अर्थ:कल्याणस्वरूप, गौरी के मुखकमल के लिए सूर्य के समान, दक्ष के यज्ञ का नाश करने वाले, श्रीनीलकण्ठ, वृषभध्वज — उस 'शि' कार स्वरूप शिव को नमस्कार।
वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्य- मुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय । चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय तस्मै वकाराय नमः शिवाय ॥ ४॥
Vasishthakumbhodbhavagautamarya- Munindradevarchitashekharaya Chandrarkavaishvanaralochanaya Tasmai vakaraya namah shivaya
अर्थ:वसिष्ठ, अगस्त्य (कुम्भोद्भव) और गौतम आदि मुनीन्द्रों तथा देवों द्वारा पूजित मस्तक वाले, चन्द्र-सूर्य-अग्निरूप तीन नेत्रों वाले — उस 'व' कार स्वरूप शिव को नमस्कार।
यक्षस्वरूपाय जटाधराय पिनाकहस्ताय सनातनाय । दिव्याय देवाय दिगम्बराय तस्मै यकाराय नमः शिवाय ॥ ५॥
Yakshasvarupaya jatadharaya Pinakahastaya sanatanaya Divyaya devaya digambaraya Tasmai yakaraya namah shivaya
अर्थ:यक्षस्वरूप, जटाधारी, हाथ में पिनाक धारण किए, सनातन, दिव्य, दिगम्बर देव — उस 'य' कार स्वरूप शिव को नमस्कार।
पञ्चाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेच्छिवसन्निधौ । शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते ॥
Panchaksharamidam punyam yah pathechchhivasannidhau Shivalokamavapnoti shivena saha modate
अर्थ:जो इस पवित्र पंचाक्षर स्तोत्र का शिव के समीप पाठ करता है, वह शिवलोक को प्राप्त करता है और शिव के साथ आनन्द भोगता है।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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शिव पञ्चाक्षर स्तोत्र पाठ के लाभ
परम पंचाक्षर मन्त्र 'न-म-शि-व-य' की महिमा गाता है — प्रत्येक पवित्र अक्षर के लिए एक श्लोक।
इसका पाठ शिव की पूर्ण पूजा है, जो उनके रूप, आभूषण और दिव्य लीलाओं का आह्वान करता है।
स्तोत्र स्वयं वचन देता है कि जो इसे शिव के समक्ष पढ़ता है वह शिवलोक और उनके साथ शाश्वत आनन्द प्राप्त करता है।
भय, पाप और बाधाओं को दूर करता है, तथा महादेव की भक्ति में मन को स्थिर करता है।
विशेषकर सोमवार, प्रदोष, महाशिवरात्रि और सम्पूर्ण श्रावण में अत्यन्त प्रभावशाली।
संक्षिप्त, लयबद्ध और सरलता से कण्ठस्थ — शिवलिंग के समक्ष नित्य पाठ के लिए उत्तम।
शिव पञ्चाक्षर स्तोत्र जप विधि
शिवलिंग या प्रतिमा के समक्ष बैठें, भस्म (विभूति) धारण करें, और पाँचों श्लोकों का पाठ करें — प्रत्येक 'नमः शिवाय' के एक अक्षर के लिए। जप करते समय प्रत्येक अक्षर के अर्थ पर ध्यान दें। फलश्रुति श्लोक से समाप्त करें और समय हो तो 'ॐ नमः शिवाय' की 108 आवृत्तियाँ करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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