नमः शिवाष्टकम्
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✦ अर्थ
नमः शिवाष्टकम् भगवान शिव की आठ श्लोकों की स्तुति है, जिनमें प्रत्येक महामंत्र "नमः शिवाय" से समाप्त होता है। यह संसार-दावानल को शांत करने वाले, शांत व परम प्रभु को नमन की लयबद्ध अर्पणा है। इसका भक्ति-भाव से पाठ करने से मन शांत और हृदय स्थिर होता है।
उत्पत्ति और कथा
Traditional · Traditional · Classical
नमः शिवाष्टकम् एक प्रिय परम्परागत स्तुति है। यह शिव की आठ श्लोकों की स्तुति है, जिनमें प्रत्येक महामंत्र "नमः शिवाय" से समाप्त होता है — संसार-दावानल को शांत करने वाले, शांत व परम प्रभु को नमन की लयबद्ध अर्पणा।
✦ शास्त्रों में वर्णित
कहा जाता है कि नमः शिवाष्टकम् का सच्चे और भक्तिपूर्ण हृदय से पाठ करना भगवान की कृपा के निकट जाना है, जो प्रेमपूर्वक उन्हें पुकारने वालों को कभी नहीं त्यागते।
मंत्र
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संसारदावानलशामकाय मृत्युञ्जयायामितविक्रमाय । सुरासुरौघार्चितपादुकाय शिवासमेताय नमः शिवाय ॥ १॥ कुन्देन्दुशङ्खस्फटिकोपमाय महेश्वरायाश्रितवत्सलाय । श्रीनीलकण्ठाय यमान्तकाय शिवासमेताय नमः शिवाय ॥ २॥ भुजङ्गचक्राधिपभूषणाय नानामणिभ्राजितकुण्डलाय । कर्पूरगौराय सुरेश्वराय शिवासमेताय नमः शिवाय ॥ ३॥ घोराधिकाघौघनिवारणाय स्वर्गापवर्गादिफलप्रदाय । निरामयायान्धकसूदनाय शिवासमेताय नमः शिवाय ॥ ४॥ त्रिकाग्निकालाय मनोन्मनाय । त्रियम्बकाय त्रिपुरान्तकाय । कालाग्निरुद्राय जगन्मयाय शिवासमेताय नमः शिवाय ॥ ५॥ दयासमुद्राय निधीश्वराय धनेशमित्राय सुधामयाय । कारुण्यरूपाय मनस्कराय शिवासमेताय नमः शिवाय ॥ ६॥ ब्रह्मेन्द्रविष्ण्वादिसुरार्चिताय देवादिदेवाय दिगम्बराय । अनन्तकल्याणगुणार्णवाय शिवासमेताय नमः शिवाय ॥ ७॥ वेदान्तवेद्याय जगन्मयाय कैलासवासाय शिवाधराय । शिवस्वरूपाय सदाशिवाय शिवासमेताय नमः शिवाय ॥ ८॥ इति स्तुत्वा महादेवं सर्वव्यापिनमीश्वरम् । पुनः पुनः प्रणम्याथ स्कन्दस्तस्थौ कृताञ्जलिः ॥ ९॥ ॥ इति श्रीनमश्शिवाष्टकं सम्पूर्णम् ॥
saṃsāradāvānalaśāmakāya mṛtyuñjayāyāmitavikramāya | surāsuraughārcitapādukāya śivāsametāya namaḥ śivāya || 1|| kundenduśaṅkhasphaṭikopamāya maheśvarāyāśritavatsalāya | śrīnīlakaṇṭhāya yamāntakāya śivāsametāya namaḥ śivāya || 2|| bhujaṅgacakrādhipabhūṣaṇāya nānāmaṇibhrājitakuṇḍalāya | karpūragaurāya sureśvarāya śivāsametāya namaḥ śivāya || 3|| ghorādhikāghaughanivāraṇāya svargāpavargādiphalapradāya | nirāmayāyāndhakasūdanāya śivāsametāya namaḥ śivāya || 4|| trikāgnikālāya manonmanāya | triyambakāya tripurāntakāya | kālāgnirudrāya jaganmayāya śivāsametāya namaḥ śivāya || 5|| dayāsamudrāya nidhīśvarāya dhaneśamitrāya sudhāmayāya | kāruṇyarūpāya manaskarāya śivāsametāya namaḥ śivāya || 6|| brahmendraviṣṇvādisurārcitāya devādidevāya digambarāya | anantakalyāṇaguṇārṇavāya śivāsametāya namaḥ śivāya || 7|| vedāntavedyāya jaganmayāya kailāsavāsāya śivādharāya | śivasvarūpāya sadāśivāya śivāsametāya namaḥ śivāya || 8|| iti stutvā mahādevaṃ sarvavyāpinamīśvaram | punaḥ punaḥ praṇamyātha skandastasthau kṛtāñjaliḥ || 9|| || iti śrīnamaśśivāṣṭakaṃ sampūrṇam ||
अर्थ:शिव की आठ श्लोकों की स्तुति, जिनमें प्रत्येक महामंत्र "नमः शिवाय" से समाप्त होता है — संसार-दावानल को शांत करने वाले, शांत व परम प्रभु को नमन की लयबद्ध अर्पणा।
नमः शिवाष्टकम् पाठ के लाभ
नमः शिवाष्टकम् का पाठ भगवान की कृपा, आशीर्वाद और रक्षा प्रदान करने वाला माना जाता है।
यह भक्ति को बढ़ाता है, मन को शांत करता है और भगवान के स्मरण में हृदय को स्थिर करता है।
सोमवार को, तथा महाशिवरात्रि, प्रदोष और श्रावण मास में इसका पाठ सर्वाधिक शुभ होता है।
एक छोटी, मधुर स्तुति जिसे कोई भी सीख सकता है और श्रद्धा से प्रतिदिन पाठ कर सकता है।
नमः शिवाष्टकम् जप विधि
स्नान करके देवता की प्रतिमा के सामने पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। दीप जलाएँ और नमः शिवाष्टकम् का धीरे-धीरे भक्ति-भाव से पाठ करें। इसे प्रतिदिन, अथवा विशेषकर महाशिवरात्रि, प्रदोष और श्रावण मास में पाठ किया जा सकता है। कृपा और रक्षा की प्रार्थना के साथ समापन करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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