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अर्धनारीश्वर स्तोत्रम्

🕉️ hindu·📿 1× जप·🕐 प्रातः या सायंकाल; विशेषकर सोमवार·📜 Ascribed to Adi Shankaracharya

अन्य नाम / खोज: mandaramalalulitalakayai kapalamalankitashekharaya · ardhanarishwara stotram lyrics · ardhanarishwara stotra

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अर्थ

अर्धनारीश्वर स्तोत्र, जो आदि शंकराचार्य द्वारा रचित माना जाता है, अर्धनारीश्वर की स्तुति है — वह स्वरूप जो आधा शिव और आधा पार्वती है। पंक्ति दर पंक्ति यह पुरुष भाग (शिव) और स्त्री भाग (देवी) की स्तुति करता है — उनकी भस्म और उनका चंदन, उनका सर्प और उनकी चूड़ियाँ — एक ही देह में पुरुष और प्रकृति का मिलन। यह प्रभु की कृपा, भक्ति और मन की शांति के लिए, विशेषकर सोमवार को पढ़ा जाता है।

उत्पत्ति और कथा

Ascribed to Adi Shankaracharya · Adi Shankaracharya · Classical

अर्धनारीश्वर स्तोत्र परंपरागत रूप से आदि शंकराचार्य को समर्पित है। यह अर्धनारीश्वर की स्तुति है — वह स्वरूप जो आधा शिव और आधा पार्वती है — जो पंक्ति दर पंक्ति पुरुष भाग (शिव) और स्त्री भाग (देवी) का गुणगान करता है: उनकी भस्म और उनका चंदन, उनका सर्प और उनकी चूड़ियाँ, एक ही देह में पुरुष और प्रकृति का मिलन।

शास्त्रों में वर्णित

कहा जाता है कि सच्चे और भक्तिमय हृदय से अर्धनारीश्वर स्तोत्र का पाठ करना उन प्रभु की कृपा के निकट पहुँचना है, जो प्रेमपूर्वक उन्हें पुकारने वालों को कभी नहीं त्यागते।

मंत्र

किसी भी पंक्ति या ▶ बटन पर टैप कर सुनें

श्रीगणेशाय नमः मन्दारमालालुलितालकायै कपालमालाङ्कितशेखराय दिव्याम्बरायै दिगम्बराय नमः शिवायै नमः शिवाय १॥ एकः स्तनस्तुङ्गतरः परस्य वार्तामिव प्रष्टुमगान्मुखाग्रम् यस्याः प्रियार्धस्थितिमुद्वहन्त्याः सा पातु वः पर्वतराजपुत्री २॥ यस्योपवीतगुण एव फणावृतैक- वक्षोरुहः कुचपटीयति वामभागे तस्मै ममास्तु तमसामवसानसीम्ने चन्द्रार्धमौलिशिरसे नमः शिवाय ३॥ स्वेदार्द्रवामकुचमण्डनपत्रभङ्ग- संशोषिदक्षिणकराङ्गुलिभस्मरेणुः स्त्रीपुंनपुंसकपदव्यतिलङ्घिनी वः शम्भोस्तनुः सुखयतु प्रकृतिश्चतुर्थी ४॥ इत्यर्धनारीश्वरस्तोत्रं सम्पूर्णम्

śrīgaṇeśāya namaḥ || mandāramālālulitālakāyai kapālamālāṅkitaśekharāya | divyāmbarāyai ca digambarāya namaḥ śivāyai ca namaḥ śivāya || 1|| ekaḥ stanastuṅgataraḥ parasya vārtāmiva praṣṭumagānmukhāgram | yasyāḥ priyārdhasthitimudvahantyāḥ sā pātu vaḥ parvatarājaputrī || 2|| yasyopavītaguṇa eva phaṇāvṛtaika- vakṣoruhaḥ kucapaṭīyati vāmabhāge | tasmai mamāstu tamasāmavasānasīmne candrārdhamauliśirase ca namaḥ śivāya || 3|| svedārdravāmakucamaṇḍanapatrabhaṅga- saṃśoṣidakṣiṇakarāṅgulibhasmareṇuḥ | strīpuṃnapuṃsakapadavyatilaṅghinī vaḥ śambhostanuḥ sukhayatu prakṛtiścaturthī || 4|| ityardhanārīśvarastotraṃ sampūrṇam |

अर्थ:अर्धनारीश्वर — आधे शिव व आधे पार्वती के स्वरूप — की स्तुति, जो पंक्ति-दर-पंक्ति पुरुष अर्ध (शिव) व स्त्री अर्ध (देवी) का वर्णन करती है: उनकी भस्म व उनका चंदन, उनका सर्प व उनकी चूड़ियाँ, एक ही देह में पुरुष व प्रकृति का संयोग।

अर्धनारीश्वर स्तोत्रम् पाठ के लाभ

अर्धनारीश्वर स्तोत्र का पाठ प्रभु की कृपा, आशीर्वाद और रक्षा प्रदान करने वाला माना जाता है।

यह भक्ति को बढ़ाता है, मन को शांत करता है और हृदय को प्रभु के स्मरण में स्थिर करता है।

सोमवार को, तथा महाशिवरात्रि, प्रदोष और श्रावण मास में यह सबसे शुभ माना जाता है।

यह एक छोटा, मधुर स्तोत्र है जिसे कोई भी सीखकर श्रद्धापूर्वक प्रतिदिन पढ़ सकता है।

अर्धनारीश्वर स्तोत्रम् जप विधि

जप संख्या1बार
उत्तम समयप्रातः या सायंकाल; विशेषकर सोमवार
दिशाEast or North

स्नान करके देवता की प्रतिमा के समक्ष पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें। दीप जलाकर अर्धनारीश्वर स्तोत्र का धीरे-धीरे और भक्तिपूर्वक पाठ करें। इसे प्रतिदिन, अथवा विशेषकर महाशिवरात्रि, प्रदोष और श्रावण मास में पढ़ा जा सकता है। अंत में कृपा और रक्षा की प्रार्थना के साथ समापन करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह अर्धनारीश्वर की स्तुति है — वह स्वरूप जो आधा शिव और आधा पार्वती है — जो पंक्ति दर पंक्ति पुरुष भाग (शिव) और स्त्री भाग (देवी) का गुणगान करता है: उनकी भस्म और उनका चंदन, उनका सर्प और उनकी चूड़ियाँ, एक ही देह में पुरुष और प्रकृति का मिलन।
इसे आदि शंकराचार्य द्वारा रचित माना जाता है। इसका पाठ प्रातः या सायंकाल भक्तिपूर्वक किया जाता है, और विशेषकर सोमवार को तथा महाशिवरात्रि, प्रदोष और श्रावण मास में।

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