अर्धनारीश्वर स्तोत्रम् — Word-by-Word Meaning
अर्धनारीश्वर स्तोत्रम्
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
Complete Translation
अर्धनारीश्वर — आधे शिव व आधे पार्वती के स्वरूप — की स्तुति, जो पंक्ति-दर-पंक्ति पुरुष अर्ध (शिव) व स्त्री अर्ध (देवी) का वर्णन करती है: उनकी भस्म व उनका चंदन, उनका सर्प व उनकी चूड़ियाँ, एक ही देह में पुरुष व प्रकृति का संयोग।
Origin & History
Source: Ascribed to Adi Shankaracharya
Author: Adi Shankaracharya
Period: Classical
अर्धनारीश्वर स्तोत्र परंपरागत रूप से आदि शंकराचार्य को समर्पित है। यह अर्धनारीश्वर की स्तुति है — वह स्वरूप जो आधा शिव और आधा पार्वती है — जो पंक्ति दर पंक्ति पुरुष भाग (शिव) और स्त्री भाग (देवी) का गुणगान करता है: उनकी भस्म और उनका चंदन, उनका सर्प और उनकी चूड़ियाँ, एक ही देह में पुरुष और प्रकृति का मिलन।
Frequently Asked Questions
अर्धनारीश्वर स्तोत्र क्या है?▼
यह अर्धनारीश्वर की स्तुति है — वह स्वरूप जो आधा शिव और आधा पार्वती है — जो पंक्ति दर पंक्ति पुरुष भाग (शिव) और स्त्री भाग (देवी) का गुणगान करता है: उनकी भस्म और उनका चंदन, उनका सर्प और उनकी चूड़ियाँ, एक ही देह में पुरुष और प्रकृति का मिलन।
अर्धनारीश्वर स्तोत्र की रचना किसने की, और इसका पाठ कब किया जाता है?▼
इसे आदि शंकराचार्य द्वारा रचित माना जाता है। इसका पाठ प्रातः या सायंकाल भक्तिपूर्वक किया जाता है, और विशेषकर सोमवार को तथा महाशिवरात्रि, प्रदोष और श्रावण मास में।
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