श्री भैरव चालीसा
अन्य नाम / खोज: shri ganapati guru gauri pada prema sahita dhari matha · bhairav chalisa lyrics
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✦ अर्थ
श्री भैरव चालीसा भगवान शिव के उग्र रक्षक रूप काल भैरव — काशी के कोतवाल — की स्तुति में चालीस पदों का हिन्दी स्तोत्र है। यह भय, शत्रुओं, संकटों और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा के लिए तथा मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए पढ़ा जाता है। इसकी रचना कवि सुन्दरदास ने की।
उत्पत्ति और कथा
Traditional Hindi devotional chalisa · Sundardas · Devotional era
जब ब्रह्मा को अहंकार हुआ, तब भगवान शिव काल भैरव — समय और मृत्यु के मूर्त रूप — के रूप में प्रकट हुए और उन्हें विनम्र किया, फिर काशी में उसके शाश्वत कोतवाल के रूप में निवास किया — वह उग्र रक्षक जो कुत्ते पर सवार होता है और त्रिशूल धारण करता है। रूप में भयानक किन्तु भक्तों के प्रति कोमल (बटुक भैरव नामक बाल-रूप में भी पूजित), वे भय, पाप और बुराई के शीघ्र विनाशक हैं। यह चालीसा, कवि सुन्दरदास द्वारा रचित, चालीस पदों में उनकी स्तुति करती है।
✦ शास्त्रों में वर्णित
कहा जाता है कि काशी की कोई तीर्थयात्रा उसके कोतवाल काल भैरव के दर्शन बिना पूर्ण नहीं होती, जो हर आत्मा का लेखा रखते हैं — और जब वे अपना दण्ड चलाते हैं, तब बड़े-से-बड़े पाप भी नष्ट हो जाते हैं। भय, शत्रु, कानूनी संकट या तंत्र-बाधा का सामना करने वाले भक्त कालाष्टमी पर उनका चौमुखी दीपक जलाते हैं, यह चालीसा पढ़ते हैं, और उनके नाम पर कुत्ते को भोजन कराते हैं।
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श्री गणपति गुरु गौरी पद, प्रेम सहित धरि माथ । चालीसा वन्दन करों, श्री शिव भैरवनाथ ॥
Shri ganapati guru gauri pada, prema sahita dhari matha Chalisa vandana karom, shri shiva bhairavanatha
अर्थ:प्रेम सहित श्री गणपति, गुरु और गौरी के चरण अपने मस्तक पर धारण कर, मैं श्री शिव-भैरवनाथ की वन्दना में यह चालीसा अर्पित करता हूँ।
श्री भैरव संकट हरण, मंगल करण कृपाल । श्याम वरण विकराल वपु, लोचन लाल विशाल ॥
Shri bhairava samkata harana, mamgala karana kripala Shyama varana vikarala vapu, lochana lala vishala
अर्थ:श्री भैरव, संकट के हरने वाले, मंगल करने वाले, कृपालु; श्याम वर्ण और विकराल शरीर वाले, विशाल लाल नेत्रों वाले।
जय जय श्री काली के लाला । जयति जयति काशी कुतवाला ॥
Jaya jaya shri kali ke lala Jayati jayati kashi kutavala
अर्थ:काली के लाल की जय-जय; काशी के कोतवाल की जय-जय।
जयति बटुक भैरव भयहारी । जयति काल भैरव बलकारी ॥
Jayati batuka bhairava bhayahari Jayati kala bhairava balakari
अर्थ:भय हरने वाले बटुक भैरव की जय; बलशाली काल भैरव की जय।
जयति नाथ भैरव विख्याता । जयति सर्व भैरव सुखदाता ॥
Jayati natha bhairava vikhyata Jayati sarva bhairava sukhadata
अर्थ:विख्यात भैरवनाथ की जय; सुख देने वाले समस्त भैरवों की जय।
भैरव रूप कियो शिव धारण । भव के भार उतारण कारण ॥
Bhairava rupa kiyo shiva dharana Bhava ke bhara utarana karana
अर्थ:शिव ने भैरव का रूप संसार के भार को उतारने के लिए धारण किया।
भैरव रव सुनि हवै भय दूरी । सब विधि होय कामना पूरी ॥
Bhairava rava suni havai bhaya duri Saba vidhi hoya kamana puri
अर्थ:भैरव की गर्जना सुनकर भय दूर हो जाता है; सब प्रकार से कामना पूरी होती है।
शेष महेश आदि गुण गायो । काशी कोतवाल कहलायो ॥
Shesha mahesha adi guna gayo Kashi kotavala kahalayo
अर्थ:शेष, महेश आदि ने उनके गुण गाए; वे काशी के कोतवाल कहलाए।
जटाजूट शिर चन्द्र विराजत । बाला मुकुट बिजायठ साजत ॥
Jatajuta shira chandra virajata Bala mukuta bijayatha sajata
अर्थ:सिर पर जटाजूट और उसमें चन्द्रमा सुशोभित है; छोटा मुकुट और आभूषण उन्हें सजाते हैं।
कटि करधनी घुंघरू बाजत । दर्शन करत सकल भय भाजत ॥
Kati karadhani ghumgharu bajata Darshana karata sakala bhaya bhajata
अर्थ:कमर पर घुंघरुओं की करधनी बजती है; उनके दर्शन से समस्त भय भाग जाते हैं।
जीवन दान दास को दीन्ह्यो । कीन्ह्यो कृपा नाथ तब चीन्ह्यो ॥
Jivana dana dasa ko dinhyo Kinhyo kripa natha taba chinhyo
अर्थ:उन्होंने अपने दास को जीवन-दान दिया; कृपा करके फिर उसे अपना मान लिया।
बसि रसना बनि सारद काली । दीन्ह्यो वर राख्यो मम लाली ॥
Basi rasana bani sarada kali Dinhyo vara rakhyo mama lali
अर्थ:वे जिह्वा पर शारदा (सरस्वती) और काली रूप में बसते हैं; वर देकर उन्होंने मेरी लाज रखी।
धन्य धन्य भैरव भयभंजन । जय मनरंजन खलदल भंजन ॥
Dhanya dhanya bhairava bhayabhamjana Jaya manaramjana khaladala bhamjana
अर्थ:धन्य-धन्य हैं भैरव, भय के भंजन; मन को प्रसन्न करने वाले, दुष्ट-दल के संहारक की जय।
कर त्रिशूल डमरू शुचि कोड़ा । कृपा कटाक्ष सुयश नहिं थोड़ा ॥
Kara trishula damaru shuchi koda़a Kripa kataksha suyasha nahim thoda़a
अर्थ:उनके हाथों में त्रिशूल, डमरू और पवित्र कोड़ा है; उनकी कृपामयी तिरछी दृष्टि का यश कम नहीं।
जो भैरव निर्भय गुण गावत । अष्ट सिद्धि नव निधि फल पावत ॥
Jo bhairava nirbhaya guna gavata Ashta siddhi nava nidhi phala pavata
अर्थ:जो निर्भय होकर भैरव के गुण गाता है, वह अष्ट सिद्धि और नव निधि का फल पाता है।
रूप विशाल कठिन दुख मोचन । क्रोध कराल लाल दुहुं लोचन ॥
Rupa vishala kathina dukha mochana Krodha karala lala duhum lochana
अर्थ:विशाल रूप वाले, कठिन दुःख के मोचक; प्रचण्ड क्रोध वाले, दोनों नेत्र लाल।
अगणित भूत प्रेत संग डोलत । बम बम बम शिव बम बम बोलत ॥
Aganita bhuta preta samga dolata Bama bama bama shiva bama bama bolata
अर्थ:असंख्य भूत-प्रेत उनके संग विचरते हैं; 'बम बम बम, शिव, बम बम' वे बोलते हैं।
रुद्रकाय काली के लाला । महाकालहू के हो काला ॥
Rudrakaya kali ke lala Mahakalahu ke ho kala
अर्थ:रुद्र-शरीर वाले, काली के लाल; वे महाकाल के भी काल हैं।
बटुक नाथ हो काल गंभीरा । श्वेत रक्त अरु श्याम शरीरा ॥
Batuka natha ho kala gambhira Shveta rakta aru shyama sharira
अर्थ:बटुक नाथ, काल के समान गम्भीर; श्वेत, रक्त और श्याम शरीर वाले।
करत तीनहुं रूप प्रकाशा । भरत सुभक्तन कहं शुभ आशा ॥
Karata tinahum rupa prakasha Bharata subhaktana kaham shubha asha
अर्थ:अपने तीनों रूपों को प्रकाशित करते हुए, वे अपने सुभक्तों में शुभ आशा भरते हैं।
रत्न जड़ित कंचन सिंहासन । व्याघ्र चर्म शुचि नर्म सुआसन ॥
Ratna jada़ita kamchana simhasana Vyaghra charma shuchi narma suasana
अर्थ:रत्नजड़ित स्वर्ण सिंहासन पर, व्याघ्र-चर्म उनका कोमल और पवित्र आसन है।
तुम्हहि जाइ काशिहिं जन ध्यावहिं । विश्वनाथ कहं दर्शन पावहिं ॥
Tumhahi jai kashihim jana dhyavahim Vishvanatha kaham darshana pavahim
अर्थ:जो भक्त काशी जाकर आपका ध्यान करता है, वह विश्वनाथ का दर्शन पाता है।
जय प्रभु संहारक सुनन्द जय । जय उन्नत हर उमानन्द जय ॥
Jaya prabhu samharaka sunanda jaya Jaya unnata hara umananda jaya
अर्थ:जय हे प्रभु, संहारक और आनन्ददाता; जय हे उन्नत, हर और उमा के आनन्द।
भीम त्रिलोचन स्वान साथ जय । वैजनाथ श्री जगतनाथ जय ॥
Bhima trilochana svana satha jaya Vaijanatha shri jagatanatha jaya
अर्थ:भीम, त्रिलोचन, श्वान के साथ — जय; वैजनाथ, श्री जगतनाथ — जय।
महा भीम भीषण शरीर जय । रुद्र त्र्यम्बक धीर वीर जय ॥
Maha bhima bhishana sharira jaya Rudra tryambaka dhira vira jaya
अर्थ:महाभीम, भीषण शरीर वाले — जय; रुद्र, त्र्यम्बक, धीर और वीर — जय।
वननाथ जय प्रेतनाथ जय । श्वानारूढ़ शशिचन्द्रनाथ जय ॥
Vananatha jaya pretanatha jaya Shvanarudha़ shashichandranatha jaya
अर्थ:वननाथ — जय; प्रेतनाथ — जय; श्वान पर सवार, चन्द्रमा को शीश पर धारण करने वाले नाथ — जय।
निमिष दिगम्बर चक्रनाथ जय । गहत अनाथन नाथ हाथ जय ॥
Nimisha digambara chakranatha jaya Gahata anathana natha hatha jaya
अर्थ:क्षण भर में, दिगम्बर, चक्र के नाथ — जय; जो अनाथों को हाथ से थामते हैं, हे अनाथों के नाथ — जय।
त्रिशूलेश भूतेश चन्द्र जय । क्रोध वत्स अमरेश नन्द जय ॥
Trishulesha bhutesha chandra jaya Krodha vatsa amaresha nanda jaya
अर्थ:त्रिशूल के ईश, भूतों के ईश, चन्द्रमुकुट — जय; क्रोध के स्वामी, प्रिय, अमरों के ईश — जय।
श्री वामन नकुलेश चण्ड जय । कृत्याऊ कीरति प्रचण्ड जय ॥
Shri vamana nakulesha chanda jaya Krityau kirati prachanda jaya
अर्थ:श्री वामन, नकुल के ईश, प्रचण्ड — जय; महान कर्मों और प्रचण्ड कीर्ति वाले — जय।
रुद्र बटुक क्रोधेश कालधर । चक्र तुण्ड दश पाणि व्याल धर ॥
Rudra batuka krodhesha kaladhara Chakra tunda dasha pani vyala dhara
अर्थ:रुद्र बटुक, क्रोध के ईश, काल को धारण करने वाले; अपनी दस भुजाओं में चक्र, दण्ड और सर्प धारण करते हुए।
करि मद पान शम्भु गुणगावत । चौंसठ योगिन संग नचावत ॥
Kari mada pana shambhu gunagavata Chaumsatha yogina samga nachavata
अर्थ:मदिरा-पान करते हुए वे शम्भु के गुण गाते हैं; चौंसठ योगिनियों को अपने संग नचाते हैं।
करत कृपा जन पर बहु ढंगा । काशी कोतवाल अड़बंगा ॥
Karata kripa jana para bahu dhamga Kashi kotavala ada़bamga
अर्थ:वे अपने भक्तों पर अनेक प्रकार से कृपा करते हैं — काशी के अड़िग कोतवाल।
देयं काल भैरव जब सोटा । नसै पाप मोटा सें मोटा ॥
Deyam kala bhairava jaba sota Nasai papa mota sem mota
अर्थ:जब काल भैरव अपना सोटा (दण्ड) मारते हैं, तब बड़े-से-बड़े पाप नष्ट हो जाते हैं।
जनकर निर्मल होय शरीरा । मिटै सकल संकट भव पीरा ॥
Janakara nirmala hoya sharira Mitai sakala samkata bhava pira
अर्थ:भक्त का शरीर निर्मल हो जाता है, और समस्त संकट तथा संसार की पीड़ा मिट जाती है।
श्री भैरव भूतों के राजा । बाधा हरत करत शुभ काजा ॥
Shri bhairava bhutom ke raja Badha harata karata shubha kaja
अर्थ:श्री भैरव, भूतों के राजा, बाधाओं को हरते हैं और शुभ कार्य सम्पन्न करते हैं।
ऐलादी के दुख निवारयो । सदा कृपाकरि काज सम्हारयो ॥
Ailadi ke dukha nivarayo Sada kripakari kaja samharayo
अर्थ:उन्होंने ऐलादी के दुःख दूर किए; सदा कृपा करके उसके कार्य सँवारे।
सुन्दर दास सहित अनुरागा । श्री दुर्वासा निकट प्रयागा ॥
Sundara dasa sahita anuraga Shri durvasa nikata prayaga
अर्थ:सुन्दरदास ने, गहरी अनुरक्ति के साथ, प्रयाग में श्री दुर्वासा के आश्रम के निकट —
श्री भैरव जी की जय लेख्यो । सकल कामना पूरण देख्यो ॥
Shri bhairava ji ki jaya lekhyo Sakala kamana purana dekhyo
अर्थ:— श्री भैरव जी की स्तुति में यह रचा; (जो इसे पढ़ता है) उसकी समस्त कामनाएँ पूरी होती हैं।
जय जय जय भैरव बटुक स्वामी, संकट टार । कृपा दास पर कीजिए, शंकर के अवतार ॥
Jaya jaya jaya bhairava batuka svami, samkata tara Kripa dasa para kijie, shamkara ke avatara
अर्थ:जय-जय-जय भैरव, प्रभु बटुक, संकट के हरने वाले; अपने दास पर कृपा कीजिए, हे शंकर के अवतार।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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श्री भैरव चालीसा पाठ के लाभ
काल भैरव — शिव के उग्र रक्षक रूप और काशी के कोतवाल — का आह्वान करने के लिए पढ़ा जाता है, ताकि भय, शत्रुओं, दुर्घटनाओं और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा हो।
माना जाता है कि यह बाधाओं, तंत्र-बाधा, बुरी आत्माओं, अकाल मृत्यु तथा पीड़ित राहु, केतु और शनि के कष्टों को दूर करता है।
साहस, निर्भयता, शीघ्र न्याय और सच्ची मनोकामनाओं की पूर्ति देता है; भक्ति से पढ़ने पर बड़े-से-बड़े पापों को भी मिटाने वाला कहा गया है।
कालाष्टमी (कृष्ण पक्ष की आठवीं तिथि), भैरव अष्टमी, तथा रविवार और मंगलवार को सबसे प्रभावशाली — काल भैरव अष्टकम् और आरती के साथ पढ़ा जाता है।
परम्परा से चौमुखी दीपक के समक्ष पढ़ा जाता है; कुत्ते (भैरव का वाहन) को भोजन कराना उन्हें विशेष रूप से प्रिय माना जाता है।
श्री भैरव चालीसा जप विधि
सायंकाल, काल भैरव की छवि के समक्ष सरसों या तिल के तेल का दीपक (आदर्शतः चौमुखी, चार मुख वाला दीपक) जलाएँ। सिन्दूर अर्पित करें, और परम्परा से कुत्ते को भोजन का एक अंश दें। भैरव चालीसा को भक्ति से पढ़ें, आदर्शतः काल भैरव अष्टकम् और आरती के साथ। कालाष्टमी और भैरव अष्टमी सबसे शुभ दिन हैं; भय या संकट के समय प्रतिदिन पाठ की सलाह दी जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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