Mantra.Tips
kara-charana-kritamkshama-prarthanaforgiveness-prayerend-of-puja

करचरणकृतं — क्षमा प्रार्थना

🕉️ hindu·📿 1× जप·🕐 किसी भी पूजा, हवन, आरती या नित्य उपासना के समापन पर·📜 Traditional kshama-prarthana (closing prayer of worship)

अन्य नाम / खोज: karacharanakritam vakkayajam karmajam va · kshama prarthana mantra · forgiveness prayer hindu · kara charan kritam

Share:

अपनी भाषा/लिपि में पढ़ें

अर्थ

करचरणकृतं किसी भी पूजा के अंत में पढ़ी जाने वाली सार्वभौमिक क्षमा-प्रार्थना है, जिसमें भक्त हाथ, पैर, वाणी, नेत्र, कान या मन से हुई हर भूल के लिए भगवान से क्षमा माँगता है। यह विनम्रता और दिव्य करुणा में विश्वास जगाती है। यद्यपि यहाँ यह महादेव (शिव) को संबोधित है, अंतिम नाम बदलकर इसे अपने इष्ट देव को भी अर्पित किया जाता है।

उत्पत्ति और कथा

Traditional kshama-prarthana (closing prayer of worship) · Traditional · Classical

यह प्रिय श्लोक हिन्दू उपासना का पारंपरिक समापन है — प्रत्येक पूजा के अंत में भगवान को अर्पित क्षमा की विनम्र प्रार्थना। यह स्वीकार करते हुए कि कोई मानवीय उपासना त्रुटि से रहित नहीं हो सकती, भक्त शरीर, वाणी और मन के हर दोष को 'करुणा के सागर' के चरणों में रख देता है, इस विश्वास के साथ कि सच्चा प्रेम अर्पण को पूर्ण बना देता है। प्रायः महादेव (शिव) को संबोधित यह श्लोक अनुष्ठान को पूर्ण करने हेतु विश्व भर में पढ़ा जाता है।

शास्त्रों में वर्णित

कहा जाता है कि करुणा के सागर भगवान उस भक्त की उपासना के हर दोष को अनदेखा कर देते हैं जो इस श्लोक से हृदयपूर्वक समापन करता है — क्योंकि उनके लिए भक्त की सच्चाई समस्त त्रुटि से बढ़कर है।

मंत्र

किसी भी पंक्ति या ▶ बटन पर टैप कर सुनें

करचरणकृतं वाक्कायजं कर्मजं वा श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधम् विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो

Karacharanakritam vakkayajam karmajam va Shravananayanajam va manasam vaparadham Vihitamavihitam va sarvametatkshamasva Jaya jaya karunabdhe shrimahadeva shambho

अर्थ:हाथ, पैर, वाणी, शरीर या कर्म से, अथवा कान, नेत्र या मन से किया हुआ — विहित या अविहित — मेरा जो भी अपराध हो, उस सबको क्षमा कीजिए; हे करुणा के सागर, श्री महादेव शम्भो, आपकी जय हो, जय हो।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

करचरणकृतं वाक्कायजं कर्मजं वा🔊Karacharanakritam vakkayajam karmajam vaWhatever offence committed by hand, foot, speech, body or action
श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधम्🔊Shravananayanajam va manasam vaparadhamor by the ears, the eyes, or the mind — any offence
विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व🔊Vihitamavihitam va sarvametat kshamasvawhether prescribed or forbidden — forgive all of this
जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो🔊Jaya jaya karunabdhe shrimahadeva shambhoVictory, victory to You, O ocean of compassion, Sri Mahadeva Shambhu!

करचरणकृतं — क्षमा प्रार्थना पाठ के लाभ

किसी भी पूजा या उपासना के अंत में पढ़ी जाने वाली सार्वभौमिक क्षमा-प्रार्थना (क्षमा-प्रार्थना), जिसमें भगवान से हर त्रुटि व कमी को क्षमा करने की प्रार्थना की जाती है।

शरीर, वाणी और मन के दोषों को — जाने या अनजाने किए गए — स्वीकार कर उन्हें भगवान की असीम करुणा को समर्पित करती है।

अनुष्ठान को पूर्ण करती है: परंपरा के अनुसार पूजा-विधि की कोई भी चूक अंत में इस श्लोक को श्रद्धापूर्वक पढ़ने से पूर्ण हो जाती है।

विनम्रता, पश्चाताप और दिव्य दया में विश्वास जगाती है, हृदय को अपराध-बोध से हल्का करती है।

यद्यपि यहाँ यह महादेव (शिव) को संबोधित है, अंतिम नाम बदलकर वही श्लोक अपने इष्ट देव को अर्पित किया जाता है।

करचरणकृतं — क्षमा प्रार्थना जप विधि

जप संख्या1बार
उत्तम समयकिसी भी पूजा, हवन, आरती या नित्य उपासना के समापन पर
दिशाTowards the deity / East

उपासना के बिल्कुल अंत में हाथ जोड़कर एक बार पढ़ें, पूजा के दौरान हाथ, पैर, वाणी, नेत्र, कान या मन की किसी भी त्रुटि के लिए — और वस्तुतः समस्त दोषों के लिए — श्रद्धापूर्वक क्षमा माँगते हुए। अन्य देवों के भक्त 'श्री महादेव शम्भो' के स्थान पर अपने इष्ट देवता का नाम रखते हैं (जैसे विष्णु के लिए 'श्री माधव')।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह क्षमा-प्रार्थना है — उपासना के अंत में पढ़ी जाने वाली क्षमा की प्रार्थना। यह भगवान से हाथ, पैर, वाणी, शरीर, कान, नेत्र या मन से किए हर दोष को क्षमा करने की प्रार्थना करती है, चाहे विहित हो या अविहित, जाने या अनजाने, और किसी भी त्रुटि के बावजूद पूजा को पूर्ण करती है।
सदा पूजा, हवन, आरती या नित्य प्रार्थना के अंत में, अंतिम अर्पण के रूप में — उपासना की समस्त कमियों को भगवान की करुणा को समर्पित करते हुए।
हाँ। यह श्लोक सार्वभौमिक है; केवल अंतिम आह्वान बदलता है। शिव के लिए यह 'श्री महादेव शम्भो' से समाप्त होता है; विष्णु/कृष्ण के भक्तों के लिए यह 'श्री माधव' अथवा 'करुणाब्धे श्री कृष्ण' जैसे नामों से समाप्त होता है।

ये भी पढ़ें

उपयोगी लगा? अपनों के साथ साझा करें 🙏

Share:

Explore more sacred mantras with complete meaning and chanting guides