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शिव गायत्री मंत्र

🕉️ hindu·📿 108× जप·🕐 प्रातः (व संध्या कालों में), विशेषकर सोमवार को·📜 The Gayatri mantra of Lord Shiva

अन्य नाम / खोज: om tatpurushaya vidmahe mahadevaya dhimahi

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अर्थ

शिव गायत्री मंत्र (रुद्र गायत्री) भगवान शिव का गायत्री मंत्र है, जो पवित्र गायत्री छंद में रचा गया है। यह बुद्धि को जाग्रत व प्रकाशित करने, तथा शांति, स्वास्थ्य, निर्भयता और आध्यात्मिक उन्नति के लिए जपा जाता है। यह एक पूर्ण दैनिक वैदिक मंत्र है, जो ध्यान, जप और पूजा के आरंभ हेतु उपयुक्त है।

उत्पत्ति और कथा

The Gayatri mantra of Lord Shiva · Traditional (Vedic)

सार्वभौम गायत्री मंत्र के अतिरिक्त, वैदिक परंपरा प्रत्येक महान देव को उसका अपना गायत्री प्रदान करती है — पवित्र गायत्री छंद में रची वह प्रार्थना जो उस देव से बुद्धि को प्रकाशित करने की याचना करती है। शिव गायत्री मंत्र शांति, स्वास्थ्य, निर्भयता और आध्यात्मिक उन्नति के दाता भगवान शिव का आवाहन करता है, उसी शाश्वत शैली "विद्महे… धीमहि… प्रचोदयात्" में — "हम जानें, हम ध्यान करें, वे प्रभु हमारी बुद्धि को प्रेरित करें।" संध्या कालों में जपा गया यह एक पूर्ण व सौम्य दैनिक साधना है।

मंत्र

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तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्

Om Tatpurushaya Vidmahe Mahadevaya Dhimahi. Tanno Rudrah Prachodayat.

अर्थ:ॐ। हम Lord Shiva को जानें, उनका ध्यान करें; वे Lord Shiva हमारी बुद्धि को प्रेरित व प्रकाशित करें।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

🔊Omॐ — आदि नाद
विद्महे🔊Vidmaheविद्महे — हम जानें / हम जानने की इच्छा करते हैं — परम पुरुष (तत्पुरुष) को
धीमहि🔊Dhimahiधीमहि — हम ध्यान करते हैं — महादेव का
तन्नः … प्रचोदयात्🔊Tannah … Prachodayatतन्नः … प्रचोदयात् — वे रुद्र (शिव) हमारी बुद्धि को प्रेरित व प्रकाशित करें

शिव गायत्री मंत्र पाठ के लाभ

भगवान शिव का गायत्री मंत्र — समस्त वैदिक छंदों में सर्वाधिक शक्तिशाली पवित्र गायत्री छंद द्वारा शिव की कृपा का आवाहन

शांति, स्वास्थ्य, निर्भयता और आध्यात्मिक उन्नति के लिए, तथा बुद्धि को जाग्रत व प्रकाशित करने हेतु जपा जाता है (प्रत्येक गायत्री का हृदय यही है)

भगवान शिव का पूर्ण दैनिक वैदिक मंत्र, ध्यान, जप और पूजा के आरंभ हेतु उपयुक्त

सोमवार को, तीनों संध्या कालों (प्रातः, मध्याह्न, संध्या) में, पूर्व की ओर मुख कर सर्वाधिक प्रभावशाली

शांत, एकाग्र मन से माला पर 108 बार जप किया जाता है; इससे स्पष्टता, शांति और भगवान शिव की स्थिर कृपा मिलती है

प्रायः महान गायत्री मंत्र ("ॐ भूर्भुवः स्वः…") के साथ दैनिक साधना के अंग रूप में जपा जाता है

शिव गायत्री मंत्र जप विधि

जप संख्या108बार
उत्तम समयप्रातः (व संध्या कालों में), विशेषकर सोमवार को

स्नान के बाद, प्रातः पूर्व की ओर मुख कर शांत मन से बैठें और "ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्" का माला पर 108 बार जप करें। समस्त गायत्री मंत्रों की भाँति इसे श्रेष्ठतः संध्या कालों (प्रातः, मध्याह्न, संध्या) में जपा जाता है। भगवान शिव को हृदय में धारण करें और मंत्र को मन में स्थिर होने दें। इसे सार्वभौम गायत्री मंत्र के साथ एक पूर्ण दैनिक साधना के रूप में नित्य जपा जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह भगवान शिव का गायत्री मंत्र है: "ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्"। पवित्र गायत्री छंद में रचित यह मंत्र "विद्महे… धीमहि… प्रचोदयात्" की शैली में शिव से बुद्धि को प्रेरित व प्रकाशित करने की प्रार्थना करता है।
यह शांति, स्वास्थ्य, निर्भयता और आध्यात्मिक उन्नति के लिए, तथा मन की स्पष्टता व प्रज्ञा जाग्रत करने हेतु जपा जाता है। गायत्री मंत्र होने के कारण यह विशेष रूप से पावन व स्थिरकारी माना जाता है, और दैनिक जीवन में भगवान शिव की कृपा लाता है।
इसे माला पर 108 बार जपें, श्रेष्ठतः प्रातः व अन्य संध्या कालों में, पूर्व की ओर मुख कर। सोमवार इसका विशेष दिन है। इसे दैनिक गायत्री साधना का अंग बनाया जा सकता है।
प्रत्येक गायत्री इसी शैली का अनुसरण करती है: "विद्महे" — हम जानें; "धीमहि" — हम ध्यान करें; "प्रचोदयात्" — वे देव हमारी बुद्धि को प्रेरित व प्रकाशित करें। इस प्रकार यह मंत्र देव से हममें प्रज्ञा जाग्रत करने की प्रार्थना है।
हाँ — देवताओं के गायत्री मंत्र भक्तिपूर्वक कोई भी जप सकता है। इन्हें प्रातः स्नान के बाद, स्वच्छ मन से, श्रेष्ठतः सोमवार को जपा जाता है, और ये एक सौम्य, पूर्ण दैनिक साधना हैं।

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