शिव गायत्री मंत्र
अन्य नाम / खोज: om tatpurushaya vidmahe mahadevaya dhimahi
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✦ अर्थ
शिव गायत्री मंत्र (रुद्र गायत्री) भगवान शिव का गायत्री मंत्र है, जो पवित्र गायत्री छंद में रचा गया है। यह बुद्धि को जाग्रत व प्रकाशित करने, तथा शांति, स्वास्थ्य, निर्भयता और आध्यात्मिक उन्नति के लिए जपा जाता है। यह एक पूर्ण दैनिक वैदिक मंत्र है, जो ध्यान, जप और पूजा के आरंभ हेतु उपयुक्त है।
उत्पत्ति और कथा
The Gayatri mantra of Lord Shiva · Traditional (Vedic)
सार्वभौम गायत्री मंत्र के अतिरिक्त, वैदिक परंपरा प्रत्येक महान देव को उसका अपना गायत्री प्रदान करती है — पवित्र गायत्री छंद में रची वह प्रार्थना जो उस देव से बुद्धि को प्रकाशित करने की याचना करती है। शिव गायत्री मंत्र शांति, स्वास्थ्य, निर्भयता और आध्यात्मिक उन्नति के दाता भगवान शिव का आवाहन करता है, उसी शाश्वत शैली "विद्महे… धीमहि… प्रचोदयात्" में — "हम जानें, हम ध्यान करें, वे प्रभु हमारी बुद्धि को प्रेरित करें।" संध्या कालों में जपा गया यह एक पूर्ण व सौम्य दैनिक साधना है।
मंत्र
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ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि । तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ॥
Om Tatpurushaya Vidmahe Mahadevaya Dhimahi. Tanno Rudrah Prachodayat.
अर्थ:ॐ। हम Lord Shiva को जानें, उनका ध्यान करें; वे Lord Shiva हमारी बुद्धि को प्रेरित व प्रकाशित करें।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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शिव गायत्री मंत्र पाठ के लाभ
भगवान शिव का गायत्री मंत्र — समस्त वैदिक छंदों में सर्वाधिक शक्तिशाली पवित्र गायत्री छंद द्वारा शिव की कृपा का आवाहन
शांति, स्वास्थ्य, निर्भयता और आध्यात्मिक उन्नति के लिए, तथा बुद्धि को जाग्रत व प्रकाशित करने हेतु जपा जाता है (प्रत्येक गायत्री का हृदय यही है)
भगवान शिव का पूर्ण दैनिक वैदिक मंत्र, ध्यान, जप और पूजा के आरंभ हेतु उपयुक्त
सोमवार को, तीनों संध्या कालों (प्रातः, मध्याह्न, संध्या) में, पूर्व की ओर मुख कर सर्वाधिक प्रभावशाली
शांत, एकाग्र मन से माला पर 108 बार जप किया जाता है; इससे स्पष्टता, शांति और भगवान शिव की स्थिर कृपा मिलती है
प्रायः महान गायत्री मंत्र ("ॐ भूर्भुवः स्वः…") के साथ दैनिक साधना के अंग रूप में जपा जाता है
शिव गायत्री मंत्र जप विधि
स्नान के बाद, प्रातः पूर्व की ओर मुख कर शांत मन से बैठें और "ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्" का माला पर 108 बार जप करें। समस्त गायत्री मंत्रों की भाँति इसे श्रेष्ठतः संध्या कालों (प्रातः, मध्याह्न, संध्या) में जपा जाता है। भगवान शिव को हृदय में धारण करें और मंत्र को मन में स्थिर होने दें। इसे सार्वभौम गायत्री मंत्र के साथ एक पूर्ण दैनिक साधना के रूप में नित्य जपा जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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