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शिव गायत्री मंत्र — Word-by-Word Meaning

शिव गायत्री मंत्र

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

Om
ॐ — आदि नाद
विद्महे
Vidmahe
विद्महे — हम जानें / हम जानने की इच्छा करते हैं — परम पुरुष (तत्पुरुष) को
धीमहि
Dhimahi
धीमहि — हम ध्यान करते हैं — महादेव का
तन्नः … प्रचोदयात्
Tannah … Prachodayat
तन्नः … प्रचोदयात् — वे रुद्र (शिव) हमारी बुद्धि को प्रेरित व प्रकाशित करें

Complete Translation

ॐ। हम Lord Shiva को जानें, उनका ध्यान करें; वे Lord Shiva हमारी बुद्धि को प्रेरित व प्रकाशित करें।

Origin & History

Source: The Gayatri mantra of Lord Shiva

Author: Traditional (Vedic)

सार्वभौम गायत्री मंत्र के अतिरिक्त, वैदिक परंपरा प्रत्येक महान देव को उसका अपना गायत्री प्रदान करती है — पवित्र गायत्री छंद में रची वह प्रार्थना जो उस देव से बुद्धि को प्रकाशित करने की याचना करती है। शिव गायत्री मंत्र शांति, स्वास्थ्य, निर्भयता और आध्यात्मिक उन्नति के दाता भगवान शिव का आवाहन करता है, उसी शाश्वत शैली "विद्महे… धीमहि… प्रचोदयात्" में — "हम जानें, हम ध्यान करें, वे प्रभु हमारी बुद्धि को प्रेरित करें।" संध्या कालों में जपा गया यह एक पूर्ण व सौम्य दैनिक साधना है।

Frequently Asked Questions

शिव गायत्री मंत्र क्या है?
यह भगवान शिव का गायत्री मंत्र है: "ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्"। पवित्र गायत्री छंद में रचित यह मंत्र "विद्महे… धीमहि… प्रचोदयात्" की शैली में शिव से बुद्धि को प्रेरित व प्रकाशित करने की प्रार्थना करता है।
शिव गायत्री मंत्र के क्या लाभ हैं?
यह शांति, स्वास्थ्य, निर्भयता और आध्यात्मिक उन्नति के लिए, तथा मन की स्पष्टता व प्रज्ञा जाग्रत करने हेतु जपा जाता है। गायत्री मंत्र होने के कारण यह विशेष रूप से पावन व स्थिरकारी माना जाता है, और दैनिक जीवन में भगवान शिव की कृपा लाता है।
इसे कब और कितनी बार जपना चाहिए?
इसे माला पर 108 बार जपें, श्रेष्ठतः प्रातः व अन्य संध्या कालों में, पूर्व की ओर मुख कर। सोमवार इसका विशेष दिन है। इसे दैनिक गायत्री साधना का अंग बनाया जा सकता है।
"विद्महे धीमहि प्रचोदयात्" का क्या अर्थ है?
प्रत्येक गायत्री इसी शैली का अनुसरण करती है: "विद्महे" — हम जानें; "धीमहि" — हम ध्यान करें; "प्रचोदयात्" — वे देव हमारी बुद्धि को प्रेरित व प्रकाशित करें। इस प्रकार यह मंत्र देव से हममें प्रज्ञा जाग्रत करने की प्रार्थना है।
क्या शिव गायत्री मंत्र कोई भी जप सकता है?
हाँ — देवताओं के गायत्री मंत्र भक्तिपूर्वक कोई भी जप सकता है। इन्हें प्रातः स्नान के बाद, स्वच्छ मन से, श्रेष्ठतः सोमवार को जपा जाता है, और ये एक सौम्य, पूर्ण दैनिक साधना हैं।

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