चन्द्रमौलीश स्तोत्रम्
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✦ अर्थ
चन्द्रमौलीश स्तोत्रम् भगवान शिव — जो अपने मस्तक पर चन्द्रकला धारण करते हैं — की संस्कृत स्तुति है। यह त्रिनेत्र प्रभु, उमापति, शरण व मोक्ष के दाता का वंदन करती है। सोमवार, महाशिवरात्रि और श्रावण मास में इसका पाठ विशेष शुभ माना जाता है।
उत्पत्ति और कथा
Sringeri tradition · Bharati Tirtha · Medieval
चन्द्रमौलीश स्तोत्रम् परंपरागत रूप से भारती तीर्थ द्वारा रचित माना जाता है। यह चन्द्रमौलीश — मस्तक पर चन्द्रकला धारण करने वाले भगवान शिव — की स्तुति है, जो त्रिनेत्र प्रभु, उमापति, शरण व मोक्ष के दाता का वंदन करती है।
✦ शास्त्रों में वर्णित
कहा जाता है कि सच्चे और भक्ति-भरे हृदय से चन्द्रमौलीश स्तोत्रम् का पाठ करना उस दिव्य कृपा के निकट जाना है, जो प्रेमपूर्वक पुकारने वालों को कभी नहीं त्यागती।
मंत्र
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श्रीगणेशाय नमः । ओङ्कारजपरतानामोङ्कारार्थं मुदा विवृण्वानम् । ओजःप्रदं नतेभ्यस्तमहं प्रणमामि चद्रमौलीशम् ॥ १॥ नम्रसुरासुरनिकरं नलिनाहङ्कारहारिपदयुगलम् । नमदिष्टदानधीरं सततं प्रणमामि चन्द्रमौलीशम् ॥ २॥ मननाद्यत्पदयोः खलु महतीं सिद्धिं जवात्प्रपद्यन्ते । मन्देतरलक्ष्मीप्रदमनिशं प्रणमामि चद्रमौलीशम् ॥ ३॥ शितिकण्ठमिन्दुदिनकरशुचिलोचनमम्बुजाक्षविधिसेव्यम् । नतमतिदानधुरीणं सततं प्रणमामि चद्रमौलीशम् ॥ ४॥ वाचो विनिवर्तते यस्मादप्राप्य सह हृदैवेति । गीयन्ते श्रुतिततिभिस्तमहं प्रणमामि चद्रमौलीशम् ॥ ५॥ यच्छन्ति यत्पदाम्बुजभक्ताः कुतुकात्स्वभक्तेभ्यः । सर्वानपि पुरुषार्थांस्तमहं प्रणमामि चद्रमौलीशम् ॥ ६॥ पञ्चाक्षरमनुवर्णैरादौ कॢप्तां स्तुतिं पठन्नेनाम् । प्राप्य दृढां शिवभक्तिं भुक्त्वा भोगाँल्लभेत मुक्तिमपि ॥ ७॥ इति शृङ्गेरि श्रीजगद्गुरु श्रीसच्चिदानन्दशिवाभिनवनृसिंह- भारतीस्वामिभिः विरचितं श्रीचन्द्रमौलीशस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
śrīgaṇeśāya namaḥ | oṅkārajaparatānāmoṅkārārthaṃ mudā vivṛṇvānam | ojaḥpradaṃ natebhyastamahaṃ praṇamāmi cadramaulīśam || 1|| namrasurāsuranikaraṃ nalināhaṅkārahāripadayugalam | namadiṣṭadānadhīraṃ satataṃ praṇamāmi candramaulīśam || 2|| mananādyatpadayoḥ khalu mahatīṃ siddhiṃ javātprapadyante | mandetaralakṣmīpradamaniśaṃ praṇamāmi cadramaulīśam || 3|| śitikaṇṭhamindudinakaraśucilocanamambujākṣavidhisevyam | natamatidānadhurīṇaṃ satataṃ praṇamāmi cadramaulīśam || 4|| vāco vinivartate yasmādaprāpya saha hṛdaiveti | gīyante śrutitatibhistamahaṃ praṇamāmi cadramaulīśam || 5|| yacchanti yatpadāmbujabhaktāḥ kutukātsvabhaktebhyaḥ | sarvānapi puruṣārthāṃstamahaṃ praṇamāmi cadramaulīśam || 6|| pañcākṣaramanuvarṇairādau kḷptāṃ stutiṃ paṭhannenām | prāpya dṛḍhāṃ śivabhaktiṃ bhuktvā bhogā~llabheta muktimapi || 7|| iti śṛṅgeri śrījagadguru śrīsaccidānandaśivābhinavanṛsiṃha- bhāratīsvāmibhiḥ viracitaṃ śrīcandramaulīśastotraṃ sampūrṇam ||
अर्थ:चन्द्रमौलीश — मस्तक पर चन्द्रकला धारण करने वाले भगवान शिव — की स्तुति, जो त्रिनेत्र प्रभु, उमापति, शरण व मोक्ष के दाता को वंदन करती है।
चन्द्रमौलीश स्तोत्रम् पाठ के लाभ
चन्द्रमौलीश स्तोत्रम् का पाठ देव की कृपा, आशीर्वाद और रक्षा प्रदान करता है माना जाता है।
भक्ति जगाता है, मन को शांत करता है और प्रभु-स्मरण में हृदय को स्थिर करता है।
सोमवार, महाशिवरात्रि तथा श्रावण मास में सर्वाधिक शुभ।
श्रद्धा सहित दैनिक पाठ हेतु उपयुक्त, एक मूल्यवान संस्कृत स्तुति।
चन्द्रमौलीश स्तोत्रम् जप विधि
स्नान करके देव की प्रतिमा के सम्मुख पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें। दीप जलाएँ और चन्द्रमौलीश स्तोत्रम् का धीरे-धीरे, भक्तिभाव से पाठ करें। इसे प्रतिदिन, विशेषकर सोमवार, महाशिवरात्रि और श्रावण मास में पढ़ा जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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