ॐ जय लक्ष्मी माता आरती
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✦ अर्थ
लक्ष्मी आरती ('ॐ जय लक्ष्मी माता') धन, समृद्धि और सौभाग्य की देवी माँ लक्ष्मी को समर्पित प्रिय आरती है, जो विशेषकर दीपावली पर गाई जाती है। यह लक्ष्मी को जगत-जननी, सुख-सम्पत्ति की दात्री और भवसागर से तारने वाली के रूप में वंदन करती है। इसे गाने से हृदय आनंद से भर जाता है और पाप धुल जाते हैं।
उत्पत्ति और कथा
Hindu devotional folk tradition · Unknown (folk composition) · Medieval period
लक्ष्मी आरती 'ॐ जय लक्ष्मी माता' एक प्रिय लोक-गीत है जो सदियों से हिन्दू घरों में, विशेषकर दीपावली — प्रकाश का पर्व जो लक्ष्मी को समर्पित है — पर गाया जाता रहा है। यह आरती समुद्र मंथन की पुराण-कथा से प्रेरित है, जहाँ लक्ष्मी चौदह रत्नों में सबसे सुंदर रूप में प्रकट हुईं। उन्होंने भगवान विष्णु को अपना पति चुना, और तब से जहाँ भी विष्णु की पूजा होती है, उनके साथ लक्ष्मी का भी सम्मान होता है। इसकी सरल, हृदयस्पर्शी भाषा ने इसे हर हिन्दू घर तक पहुँचाया है — सबसे साधारण गाँव के घर से लेकर भव्यतम मंदिर तक।
✦ शास्त्रों में वर्णित
इस आरती से जुड़ा सबसे व्यापक रूप से मान्य चमत्कार हर दीपावली की रात होता है। हिन्दू परंपरा मानती है कि देवी लक्ष्मी स्वयं दीपावली पर पृथ्वी पर विचरण करती हैं और उन घरों में पधारती हैं जो स्वच्छ, सुप्रकाशित और भक्ति से भरे हों। जो परिवार सच्चे हृदय से यह आरती गाते हैं, वे बताते हैं कि आने वाला वर्ष अप्रत्याशित समृद्धि लाता है — ऋण चुक जाते हैं, व्यापार फलते-फूलते हैं और आर्थिक चिंताएँ घुल जाती हैं। आरती का यह वचन कि 'जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता और सब सम्भव हो जाता' — असंख्य परिवारों द्वारा केवल काव्यात्मक नहीं, बल्कि शब्दशः सत्य माना जाता है, जिन्होंने पीढ़ी-दर-पीढ़ी इसकी परिवर्तनकारी शक्ति का अनुभव किया है।
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ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥
Om Jai Lakshmi Mata, Maiya Jai Lakshmi Mata Tumko Nishdin Sevat, Hari Vishnu Vidhata Om Jai Lakshmi Mata
अर्थ:ॐ, माता लक्ष्मी की जय! प्यारी माँ, माता लक्ष्मी की जय! भगवान हरि विष्णु, विधाता, रात-दिन आपकी सेवा करते हैं। ॐ, माता लक्ष्मी की जय!
उमा रमा ब्रह्माणी, तुम ही जग माता। सूर्य चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥
Uma Rama Brahmani, Tum Hi Jag Mata Surya Chandrama Dhyavat, Narad Rishi Gata Om Jai Lakshmi Mata
अर्थ:आप ही उमा (पार्वती) हैं, आप ही रमा (लक्ष्मी) हैं, आप ही ब्रह्माणी (सरस्वती) हैं — आप ही जगत की माता हैं। सूर्य और चंद्रमा आपका ध्यान करते हैं, और नारद ऋषि आपका गुणगान करते हैं। ॐ, माता लक्ष्मी की जय!
दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता। जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि सिद्धि धन पाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥
Durga Roop Niranjani, Sukh Sampatti Data Jo Koi Tumko Dhyavat, Riddhi Siddhi Dhan Pata Om Jai Lakshmi Mata
अर्थ:आप दुर्गा का पवित्र, निरंजन रूप हैं, सुख और समृद्धि की दात्री हैं। जो भी आपका ध्यान करता है, वह ऋद्धि, सिद्धि और धन पाता है। ॐ, माता लक्ष्मी की जय!
तुम पाताल निवासिनी, तुम ही शुभदाता। कर्म प्रभाव प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥
Tum Patal Nivasini, Tum Hi Shubh Data Karma Prabhav Prakashini, Bhav Nidhi Ki Trata Om Jai Lakshmi Mata
अर्थ:आप पाताल में भी निवास करती हैं, आप ही समस्त शुभ की दात्री हैं। आप कर्म के प्रभाव को प्रकाशित करती हैं, और भवसागर से तारने वाली हैं। ॐ, माता लक्ष्मी की जय!
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता। सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥
Jis Ghar Mein Tum Rehti, Sab Sadgun Aata Sab Sambhav Ho Jata, Man Nahin Ghabrata Om Jai Lakshmi Mata
अर्थ:जिस घर में आप निवास करती हैं, वहाँ सब सद्गुण आ जाते हैं। सब सम्भव हो जाता है, और मन भयभीत नहीं होता। ॐ, माता लक्ष्मी की जय!
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता। खान पान का वैभव, सब तुमसे आता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥
Tum Bin Yagya Na Hote, Vastra Na Koi Pata Khan Pan Ka Vaibhav, Sab Tumse Aata Om Jai Lakshmi Mata
अर्थ:आपके बिना न यज्ञ हो सकते हैं, न ही कोई वस्त्र पा सकता है। खान-पान का समस्त वैभव आप ही से आता है। ॐ, माता लक्ष्मी की जय!
शुभ गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि जाता। रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥
Shubh Gun Mandir Sundar, Kshirodadhi Jata Ratna Chaturdash Tum Bin, Koi Nahin Pata Om Jai Lakshmi Mata
अर्थ:आप शुभ गुणों का सुंदर मंदिर हैं, क्षीरसागर से जन्मी हैं। आपके बिना कोई भी चौदह बहुमूल्य रत्न नहीं पा सकता। ॐ, माता लक्ष्मी की जय!
महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता। उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥
Mahalakshmiji Ki Aarti, Jo Koi Jan Gata Ur Anand Samata, Paap Utar Jata Om Jai Lakshmi Mata
अर्थ:जो भी महालक्ष्मी की यह आरती गाता है — उसका हृदय आनंद से भर जाता है, और उसके सब पाप धुल जाते हैं। ॐ, माता लक्ष्मी की जय!
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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ॐ जय लक्ष्मी माता आरती पाठ के लाभ
धन और समृद्धि के लिए देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद आह्वान करती है।
घर से दरिद्रता और आर्थिक कठिनाइयों को दूर करती है।
घर में सद्गुण, शांति और सौहार्द लाती है।
दीपावली पर गाई जाने पर पूरे वर्ष के लिए लक्ष्मी की उपस्थिति घर में आमंत्रित करती है।
पापों का नाश करती है और भक्त के कर्म को शुद्ध करती है।
व्यापार, करियर और भौतिक प्रयासों में सफलता सुनिश्चित करती है।
मंगल और समृद्धि का वातावरण रचती है।
ॐ जय लक्ष्मी माता आरती जप विधि
स्वच्छ थाली में घी का दीया जलाएं। लक्ष्मी के चित्र या मूर्ति के सामने ताजे पुष्प और चावल के दाने रखें। आरती गाते हुए जलती थाली को देवी के सामने घड़ी की दिशा में गोलाकार घुमाएं। दूसरे हाथ से घंटी बजाएं। दीपावली की रात यह आरती मुख्य लक्ष्मी पूजन के बाद की जाती है। गाने के बाद आरती की ज्योति सभी परिवारजनों के साथ बाँटें। लक्ष्मी का स्वागत करने के लिए घर को स्वच्छ और सुप्रकाशित रखना पारंपरिक है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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