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ॐ जय लक्ष्मी माता आरती Meaning — Line by Line

ॐ जय लक्ष्मी माता आरती

Every verse and every word explained in English & Hindi

Meaning — Line by Line

Every verse of ॐ जय लक्ष्मी माता आरती with its Hindi meaning. Tap any word to hear it, or ▶ to recite the verse.

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  1. Verse 1. Om Jai Lakshmi Mata, Maiya Jai Lakshmi Mata
  2. Verse 2. Uma Rama Brahmani, Tum Hi Jag Mata
  3. Verse 3. Durga Roop Niranjani, Sukh Sampatti Data
  4. Verse 4. Tum Patal Nivasini, Tum Hi Shubh Data
  5. Verse 5. Jis Ghar Mein Tum Rehti, Sab Sadgun Aata
  6. Verse 6. Tum Bin Yagya Na Hote, Vastra Na Koi Pata
  7. Verse 7. Shubh Gun Mandir Sundar, Kshirodadhi Jata
  8. Verse 8. Mahalakshmiji Ki Aarti, Jo Koi Jan Gata
Verse 1#

Om Jai Lakshmi Mata, Maiya Jai Lakshmi Mata

जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥ जय लक्ष्मी माता॥

Om Jai Lakshmi Mata, Maiya Jai Lakshmi Mata Tumko Nishdin Sevat, Hari Vishnu Vidhata Om Jai Lakshmi Mata

Meaningॐ, माता लक्ष्मी की जय! प्यारी माँ, माता लक्ष्मी की जय! भगवान हरि विष्णु, विधाता, रात-दिन आपकी सेवा करते हैं। ॐ, माता लक्ष्मी की जय!

Verse 2#

Uma Rama Brahmani, Tum Hi Jag Mata

उमा रमा ब्रह्माणी, तुम ही जग माता। सूर्य चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥ जय लक्ष्मी माता॥

Uma Rama Brahmani, Tum Hi Jag Mata Surya Chandrama Dhyavat, Narad Rishi Gata Om Jai Lakshmi Mata

Meaningआप ही उमा (पार्वती) हैं, आप ही रमा (लक्ष्मी) हैं, आप ही ब्रह्माणी (सरस्वती) हैं — आप ही जगत की माता हैं। सूर्य और चंद्रमा आपका ध्यान करते हैं, और नारद ऋषि आपका गुणगान करते हैं। ॐ, माता लक्ष्मी की जय!

Verse 3#

Durga Roop Niranjani, Sukh Sampatti Data

दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता। जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि सिद्धि धन पाता॥ जय लक्ष्मी माता॥

Durga Roop Niranjani, Sukh Sampatti Data Jo Koi Tumko Dhyavat, Riddhi Siddhi Dhan Pata Om Jai Lakshmi Mata

Meaningआप दुर्गा का पवित्र, निरंजन रूप हैं, सुख और समृद्धि की दात्री हैं। जो भी आपका ध्यान करता है, वह ऋद्धि, सिद्धि और धन पाता है। ॐ, माता लक्ष्मी की जय!

Verse 4#

Tum Patal Nivasini, Tum Hi Shubh Data

तुम पाताल निवासिनी, तुम ही शुभदाता। कर्म प्रभाव प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥ जय लक्ष्मी माता॥

Tum Patal Nivasini, Tum Hi Shubh Data Karma Prabhav Prakashini, Bhav Nidhi Ki Trata Om Jai Lakshmi Mata

Meaningआप पाताल में भी निवास करती हैं, आप ही समस्त शुभ की दात्री हैं। आप कर्म के प्रभाव को प्रकाशित करती हैं, और भवसागर से तारने वाली हैं। ॐ, माता लक्ष्मी की जय!

Verse 5#

Jis Ghar Mein Tum Rehti, Sab Sadgun Aata

जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता। सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥ जय लक्ष्मी माता॥

Jis Ghar Mein Tum Rehti, Sab Sadgun Aata Sab Sambhav Ho Jata, Man Nahin Ghabrata Om Jai Lakshmi Mata

Meaningजिस घर में आप निवास करती हैं, वहाँ सब सद्गुण आ जाते हैं। सब सम्भव हो जाता है, और मन भयभीत नहीं होता। ॐ, माता लक्ष्मी की जय!

Verse 6#

Tum Bin Yagya Na Hote, Vastra Na Koi Pata

तुम बिन यज्ञ होते, वस्त्र कोई पाता। खान पान का वैभव, सब तुमसे आता॥ जय लक्ष्मी माता॥

Tum Bin Yagya Na Hote, Vastra Na Koi Pata Khan Pan Ka Vaibhav, Sab Tumse Aata Om Jai Lakshmi Mata

Meaningआपके बिना न यज्ञ हो सकते हैं, न ही कोई वस्त्र पा सकता है। खान-पान का समस्त वैभव आप ही से आता है। ॐ, माता लक्ष्मी की जय!

Verse 7#

Shubh Gun Mandir Sundar, Kshirodadhi Jata

शुभ गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि जाता। रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥ जय लक्ष्मी माता॥

Shubh Gun Mandir Sundar, Kshirodadhi Jata Ratna Chaturdash Tum Bin, Koi Nahin Pata Om Jai Lakshmi Mata

Meaningआप शुभ गुणों का सुंदर मंदिर हैं, क्षीरसागर से जन्मी हैं। आपके बिना कोई भी चौदह बहुमूल्य रत्न नहीं पा सकता। ॐ, माता लक्ष्मी की जय!

Verse 8#

Mahalakshmiji Ki Aarti, Jo Koi Jan Gata

महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता। उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥ जय लक्ष्मी माता॥

Mahalakshmiji Ki Aarti, Jo Koi Jan Gata Ur Anand Samata, Paap Utar Jata Om Jai Lakshmi Mata

Meaningजो भी महालक्ष्मी की यह आरती गाता है — उसका हृदय आनंद से भर जाता है, और उसके सब पाप धुल जाते हैं। ॐ, माता लक्ष्मी की जय!

Word-by-Word Breakdown

लक्ष्मी
Lakshmi
धन, सौभाग्य और समृद्धि की देवी
माता
Mata
माता
मैया
Maiya
प्यारी माँ (स्नेहसूचक शब्द)
निशदिन
Nishdin
रात और दिन, निरंतर
हरि विष्णु
Hari Vishnu
भगवान विष्णु (लक्ष्मी के पति)
विधाता
Vidhata
विधाता, परम प्रभु
उमा
Uma
देवी पार्वती
रमा
Rama
लक्ष्मी का दूसरा नाम (आनंद देने वाली)
ब्रह्माणी
Brahmani
ब्रह्मा की पत्नी (सरस्वती)
निरंजनी
Niranjani
पवित्र, निर्मल स्वरूपा
ऋद्धि सिद्धि
Riddhi Siddhi
समृद्धि और आध्यात्मिक शक्तियाँ
पाताल निवासिनी
Patal Nivasini
पाताल में निवास करने वाली (सर्वव्यापिनी)
शुभदाता
Shubhdata
शुभ की दात्री
भवनिधि
Bhavnidhi
सांसारिक अस्तित्व का सागर
त्राता
Trata
रक्षक, उद्धारक
सद्गुण
Sadgun
सद्गुण, उत्तम गुण
यज्ञ
Yagya
पवित्र अग्नि अनुष्ठान, यज्ञ
वैभव
Vaibhav
वैभव, भव्यता
क्षीरोदधि
Kshirodadhi
क्षीरसागर (जहाँ से लक्ष्मी प्रकट हुईं)
रत्न चतुर्दश
Ratna Chaturdash
चौदह रत्न (समुद्र मंथन से प्राप्त)
महालक्ष्मी
Mahalakshmi
महान लक्ष्मी, परम स्वरूप

Origin & History

Source: Hindu devotional folk tradition

Author: Unknown (folk composition)

Period: Medieval period

लक्ष्मी आरती 'ॐ जय लक्ष्मी माता' एक प्रिय लोक-गीत है जो सदियों से हिन्दू घरों में, विशेषकर दीपावली — प्रकाश का पर्व जो लक्ष्मी को समर्पित है — पर गाया जाता रहा है। यह आरती समुद्र मंथन की पुराण-कथा से प्रेरित है, जहाँ लक्ष्मी चौदह रत्नों में सबसे सुंदर रूप में प्रकट हुईं। उन्होंने भगवान विष्णु को अपना पति चुना, और तब से जहाँ भी विष्णु की पूजा होती है, उनके साथ लक्ष्मी का भी सम्मान होता है। इसकी सरल, हृदयस्पर्शी भाषा ने इसे हर हिन्दू घर तक पहुँचाया है — सबसे साधारण गाँव के घर से लेकर भव्यतम मंदिर तक।

Frequently Asked Questions

दीपावली पर लक्ष्मी आरती कब गाई जाती है?
लक्ष्मी आरती दीपावली की रात का केंद्रीय भक्ति-गीत है। यह मुख्य लक्ष्मी पूजन के समय और उसके बाद गाई जाती है, जो संध्या को किया जाता है। परिवार साथ मिलकर यह आरती गाते हैं और आने वाले वर्ष के लिए लक्ष्मी का आशीर्वाद आमंत्रित करते हैं।
लक्ष्मी और क्षीरसागर का क्या संबंध है?
हिन्दू पुराणों के अनुसार, देवी लक्ष्मी समुद्र मंथन (क्षीरसागर के मंथन) से 14 बहुमूल्य रत्नों के साथ प्रकट हुईं। आरती इसी का स्मरण करते हुए उन्हें क्षीरोदधि (दूध के सागर) से उत्पन्न कहती है और बताती है कि उनके बिना कोई भी 14 रत्न प्राप्त नहीं कर सकता।
'जिस घर में तुम रहतीं' वाला पद इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
यह पद (जिस घर में तुम रहतीं) आरती में शायद सबसे प्रिय है। यह वचन देता है कि जहाँ लक्ष्मी निवास करती हैं, वहाँ सब सद्गुण आते हैं, सब सम्भव हो जाता है और भय मिट जाता है। यही कारण है कि हिन्दू नियमित रूप से यह आरती करते हैं — अपने घरों में लक्ष्मी की उपस्थिति को आमंत्रित और बनाए रखने के लिए।
क्या लक्ष्मी आरती दीपावली के अलावा अन्य दिनों में गाई जा सकती है?
हाँ, इसे नियमित रूप से गाया जा सकता है और गाना चाहिए। शुक्रवार लक्ष्मी का विशेष दिन है, और हर शुक्रवार की संध्या को उनकी आरती करना एक सामान्य परंपरा है। इसे घर की दैनिक संध्या आरती में भी सम्मिलित किया जा सकता है।
आरती में लक्ष्मी के साथ उमा और ब्रह्माणी का उल्लेख क्यों है?
दूसरा पद लक्ष्मी की पहचान उमा (पार्वती) और ब्रह्माणी (सरस्वती) से कराता है, यह स्थापित करते हुए कि परम जगज्जननी इन तीनों रूपों में प्रकट होती हैं — धन (लक्ष्मी), ज्ञान (सरस्वती) और शक्ति (पार्वती/दुर्गा)। यह शक्ति परंपरा के अनुरूप है, जो सभी देवियों को एक ही रूप में देखती है।

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