गणेश चालीसा
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✦ अर्थ
गणेश चालीसा विघ्नहर्ता और बुद्धि के दाता गजानन गणेश की चालीस चौपाइयों की स्तुति है, जो उनके दिव्य जन्म, महिमा और भक्तों पर आशीर्वाद का वर्णन करती है। इसका पाठ विघ्नों को दूर कर बुद्धि, सफलता, समृद्धि और शुभ आरंभ प्रदान करता है।
उत्पत्ति और कथा
Hindu devotional tradition (Chalisa literature) · Unknown (folk composition in the Chalisa tradition) · Medieval period
गणेश चालीसा भगवान गणेश की जन्म-कथा के लिए अनेक पुराण-स्रोतों से ली गई है। इस चालीसा में वर्णित कथा बताती है कि पार्वती ने पुत्र-प्राप्ति के लिए कठोर तप किया, तब एक दिव्य ब्राह्मण (स्वयं गणेश छद्म रूप में) प्रकट हुए, उन्हें आशीर्वाद दिया और फिर पालने पर शिशु रूप में प्रकट हो गए। शिव पुराण के अन्य संस्करण में पार्वती द्वारा चंदन के लेप से गणेश की रचना का वर्णन है। संस्करण चाहे जो हो, सभी इस पर सहमत हैं कि गणेश शिव-पार्वती के प्रथम पुत्र हैं और सभी देवों से पहले पूजे जाने का परम स्थान रखते हैं।
✦ शास्त्रों में वर्णित
गणेश से जुड़े सबसे प्रसिद्ध चमत्कारों में से एक 21 सितंबर 1995 को घटित हुआ, जब समस्त भारत और विश्व भर में लाखों गणेश प्रतिमाएँ भक्तों द्वारा अर्पित दूध पीती हुई देखी गईं। 'दुग्ध चमत्कार' के नाम से प्रसिद्ध यह घटना नई दिल्ली के एक मंदिर से आरंभ हुई और कुछ ही घंटों में विश्व भर में फैल गई। वैज्ञानिक और संशयवादी इसकी जाँच करते रहे पर इसे पूर्णतः समझा न सके। भक्तों के लिए यह गणेश की जीवंत उपस्थिति का प्रमाण था — वही उपस्थिति जो गणेश चालीसा जैसी प्रार्थनाओं से आवाहित होती है। यह घटना आधुनिक इतिहास की सबसे व्यापक रूप से देखी और प्रलेखित धार्मिक घटनाओं में से एक है।
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जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल । विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल ॥
Jaya ganapati sadaguna sadana, kavivara badana kripala vighna harana mamgala karana, jaya jaya girijalala
अर्थ:गणपति की जय, सद्गुणों के धाम, कविजनों द्वारा वंदित कृपालु मुख वाले; विघ्नों के हर्ता और सब मंगल के करता — जय जय गिरिजा (पार्वती) के लाल!
जय जय जय गणपति गणराजू । मंगल भरण करण शुभः काजू ॥
Jaya jaya jaya ganapati ganaraju mamgala bharana karana shubhah kaju
अर्थ:जय जय जय गणपति, गणों के राजा; जो सबको मंगल से भरते और हर शुभ कार्य सिद्ध करते हैं।
जै गजबदन सदन सुखदाता । विश्व विनायका बुद्धि विधाता ॥
Jai gajabadana sadana sukhadata vishva vinayaka buddhi vidhata
अर्थ:जय गजमुख, सुख के धाम और दाता; विश्व के स्वामी (विनायक) और बुद्धि के विधाता।
वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावना । तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन ॥
Vakra tunda shuchi shunda suhavana tilaka tripunda bhala mana bhavana
अर्थ:वक्रतुंड और उज्ज्वल, सुंदर सूँड वाले; आपके भाल पर त्रिपुंड तिलक मन को मोहता है।
राजत मणि मुक्तन उर माला । स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला ॥
Rajata mani muktana ura mala svarna mukuta shira nayana vishala
अर्थ:आपके वक्ष पर मणियों और मोतियों की माला सुशोभित है; सिर पर स्वर्ण मुकुट और विशाल नेत्र।
पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं । मोदक भोग सुगन्धित फूलं ॥
Pustaka pani kuthara trishulam modaka bhoga sugandhita phulam
अर्थ:हाथ में पुस्तक, कुठार और त्रिशूल; मोदक का भोग और सुगंधित पुष्प।
सुन्दर पीताम्बर तन साजित । चरण पादुका मुनि मन राजित ॥
Sundara pitambara tana sajita charana paduka muni mana rajita
अर्थ:सुंदर पीतांबर से शरीर सुसज्जित; आपकी चरण-पादुकाएँ मुनियों के मन को आनंदित करती हैं।
धनि शिव सुवन षडानन भ्राता । गौरी लालन विश्व-विख्याता ॥
Dhani shiva suvana shadanana bhrata gauri lalana vishva-vikhyata
अर्थ:धन्य हैं आप, छह मुख वाले कार्तिकेय के भाई और शिव के पुत्र; गौरी के दुलारे, विश्व में विख्यात।
ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे । मुषक वाहन सोहत द्वारे ॥
Riddhi-siddhi tava chamvara sudhare mushaka vahana sohata dvare
अर्थ:ऋद्धि और सिद्धि आप पर राजसी चँवर डुलाती हैं; आपका मूषक वाहन द्वार पर शोभा देता है।
कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी । अति शुची पावन मंगलकारी ॥
Kahau janma shubha katha tumhari ati shuchi pavana mamgalakari
अर्थ:अब मैं आपके जन्म की मंगलमयी कथा कहता हूँ — अति पवित्र, पावन और सब मंगल देने वाली।
एक समय गिरिराज कुमारी । पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी ॥
Eka samaya giriraja kumari putra hetu tapa kinha bhari
अर्थ:एक समय पर्वतराज की पुत्री (पार्वती) ने पुत्र की कामना से कठोर तप किया।
भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा । तब पहुंच्यो तुम धरी द्विज रूपा ॥
Bhayo yajna jaba purna anupa taba pahumchyo tuma dhari dvija rupa
अर्थ:जब वह अनुपम यज्ञ पूर्ण हुआ, तब आप ब्राह्मण का रूप धारण कर पधारे।
अतिथि जानी के गौरी सुखारी । बहुविधि सेवा करी तुम्हारी ॥
Atithi jani ke gauri sukhari bahuvidhi seva kari tumhari
अर्थ:अतिथि जानकर गौरी प्रसन्न हुईं और उन्होंने अनेक प्रकार से आपकी सेवा की।
अति प्रसन्न हवै तुम वर दीन्हा । मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा ॥
Ati prasanna havai tuma vara dinha matu putra hita jo tapa kinha
अर्थ:अत्यंत प्रसन्न होकर आपने उस तप का वर दिया जो उन्होंने पुत्र हेतु किया था:
मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला । बिना गर्भ धारण यहि काला ॥
Milahi putra tuhi, buddhi vishala bina garbha dharana yahi kala
अर्थ:"तुम्हें विशाल बुद्धि वाला पुत्र प्राप्त होगा — और इसी क्षण, बिना गर्भ धारण किए।
गणनायक गुण ज्ञान निधाना । पूजित प्रथम रूप भगवाना ॥
Gananayaka guna jnana nidhana pujita prathama rupa bhagavana
अर्थ:वह गणों का नायक, गुण और ज्ञान का भंडार, सब देवों में प्रथम पूज्य भगवान होगा।"
अस कही अन्तर्धान रूप हवै । पालना पर बालक स्वरूप हवै ॥
Asa kahi antardhana rupa havai palana para balaka svarupa havai
अर्थ:ऐसा कहकर वह ब्राह्मण अंतर्धान हो गया, और पालने पर बालक का रूप धारण कर लिया।
बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना । लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना ॥
Bani shishu rudana jabahim tuma thana lakhi mukha sukha nahim gauri samana
अर्थ:जब शिशु रूप में आपने रुदन आरंभ किया, तो आपका मुख देखकर गौरी का आनंद किसी से न समाया।
सकल मगन, सुखमंगल गावहिं । नाभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं ॥
Sakala magana, sukhamamgala gavahim nabha te surana, sumana varshavahim
अर्थ:सब आनंद में मग्न होकर सुख-मंगल के गीत गाने लगे; आकाश से देवता पुष्प बरसाने लगे।
शम्भु, उमा, बहुदान लुटावहिं । सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं ॥
Shambhu, uma, bahudana lutavahim sura munijana, suta dekhana avahim
अर्थ:शंभु (शिव) और उमा ने बहुत दान लुटाया; देवता और मुनिजन पुत्र को देखने आए।
लखि अति आनन्द मंगल साजा । देखन भी आये शनि राजा ॥
Lakhi ati ananda mamgala saja dekhana bhi aye shani raja
अर्थ:आनंद और मंगल का यह उत्सव देखकर शनि राजा भी दर्शन को आए।
निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं । बालक, देखन चाहत नाहीं ॥
Nija avaguna guni shani mana mahim balaka, dekhana chahata nahim
अर्थ:अपने दोष को मन में स्मरण कर शनि बालक को देखना नहीं चाहते थे।
गिरिजा कछु मन भेद बढायो । उत्सव मोर, न शनि तुही भायो ॥
Girija kachhu mana bheda badhayo utsava mora, na shani tuhi bhayo
अर्थ:गिरिजा के मन में कुछ भेद बढ़ा: "मेरे उत्सव में क्या शनि को भी मेरे पुत्र को देखना नहीं भाया?"
कहत लगे शनि, मन सकुचाई । का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई ॥
Kahata lage shani, mana sakuchai ka karihau, shishu mohi dikhai
अर्थ:शनि मन में संकोच करते हुए कहने लगे: "यदि मैं बालक को देखूँ तो क्या होगा?"
नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ । शनि सों बालक देखन कहयऊ ॥
Nahim vishvasa, uma ura bhayau shani som balaka dekhana kahayau
अर्थ:उमा के हृदय में कोई शंका न उठी; उन्होंने शनि से बालक को देखने को कहा।
पदतहिं शनि दृग कोण प्रकाशा । बालक सिर उड़ि गयो अकाशा ॥
Padatahim shani driga kona prakasha balaka sira uड़i gayo akasha
अर्थ:ज्योंही शनि की तिरछी दृष्टि की किरण पड़ी, बालक का सिर आकाश में उड़ गया।
गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी । सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी ॥
Girija giri vikala havai dharani so duhkha dasha gayo nahim varani
अर्थ:गिरिजा व्याकुल होकर धरती पर गिर पड़ीं; उस दुख की दशा का वर्णन नहीं हो सकता।
हाहाकार मच्यौ कैलाशा । शनि कीन्हों लखि सुत को नाशा ॥
Hahakara machyau kailasha shani kinhom lakhi suta ko nasha
अर्थ:कैलाश पर हाहाकार मच गया — देखा गया कि शनि ने पुत्र का नाश कर दिया।
तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो । काटी चक्र सो गज सिर लाये ॥
Turata garuड़ chaढ़i vishnu sidhayo kati chakra so gaja sira laye
अर्थ:तुरंत विष्णु गरुड़ पर सवार होकर चल पड़े; चक्र से एक सिर काटकर हाथी का सिर ले आए।
बालक के धड़ ऊपर धारयो । प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो ॥
Balaka ke dhada़ upara dharayo prana mantra paढ़i shamkara darayo
अर्थ:उसे बालक के धड़ पर रखा, और शंकर ने प्राण-मंत्र पढ़कर उसे जीवित कर दिया।
नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे । प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वर दीन्हे ॥
Nama ganesha shambhu taba kinhe prathama pujya buddhi nidhi, vara dinhe
अर्थ:तब शंभु ने उन्हें गणेश नाम दिया, और प्रथम पूज्य होने तथा बुद्धि के भंडार का वर दिया।
बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा । पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा ॥
Buddhi pariksha jaba shiva kinha prithvi kara pradakshina linha
अर्थ:जब शिव ने उनकी बुद्धि की परीक्षा ली, तो दोनों भाइयों को पृथ्वी की परिक्रमा करनी थी।
चले षडानन, भरमि भुलाई । रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई ॥
Chale shadanana, bharami bhulai rache baitha tuma buddhi upai
अर्थ:छह मुख वाले कार्तिकेय भ्रमित होकर भटकने लगे; पर आपने एक चतुर उपाय रच लिया।
चरण मातु-पितु के धर लीन्हें । तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें ॥
Charana matu-pitu ke dhara linhem tinake sata pradakshina kinhem
अर्थ:आपने अपने माता-पिता के चरण पकड़ लिए, और उनकी सात बार परिक्रमा की।
धनि गणेश कही शिव हिये हरषे । नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे ॥
Dhani ganesha kahi shiva hiye harashe nabha te surana sumana bahu barase
अर्थ:"धन्य है गणेश!" शिव ने कहा, उनका हृदय आनंदित हुआ; आकाश से देवताओं ने अनेक पुष्प बरसाए।
तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई । शेष सहसमुख सके न गाई ॥
Tumhari mahima buddhi baड़ai shesha sahasamukha sake na gai
अर्थ:आपकी महिमा और बुद्धि की महानता को सहस्र मुख वाले शेष भी नहीं गा सके।
मैं मतिहीन मलीन दुखारी । करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी ॥
Maim matihina malina dukhari karahum kauna vidhi vinaya tumhari
अर्थ:मैं मंदबुद्धि, मलिन और दुखी हूँ — किस विधि से मैं आपकी समुचित स्तुति करूँ?
भजत रामसुन्दर प्रभुदासा । जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा ॥
Bhajata ramasundara prabhudasa jaga prayaga, kakara, durvasa
अर्थ:प्रयाग के (ककरा निवासी, दुर्वासा वंश के) रामसुंदर प्रभुदास आपका भजन करते हैं।
अब प्रभु दया दीना पर कीजै । अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै ॥
Aba prabhu daya dina para kijai apani shakti bhakti kuchha dijai
अर्थ:अब हे प्रभु, इस दीन पर दया कीजिए; अपनी शक्ति और भक्ति में से कुछ मुझे प्रदान कीजिए।
श्री गणेश यह चालीसा, पाठ करै कर ध्यान । नित नव मंगल गृह बसै, लहे जगत सन्मान ॥
Shri ganesha yaha chalisa, patha karai kara dhyana nita nava mamgala griha basai, lahe jagata sanmana
अर्थ:जो कोई इस गणेश चालीसा का एकाग्र मन और ध्यान से पाठ करता है — उसके घर में नित नया मंगल बसता है, और वह जगत में सम्मान पाता है।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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गणेश चालीसा पाठ के लाभ
भक्त के मार्ग से सभी विघ्नों को दूर करता है
बुद्धि, विवेक और विचारों की स्पष्टता प्रदान करता है
नए कार्यों, परीक्षाओं और व्यवसाय में सफलता सुनिश्चित करता है
घर में शुभता और सौभाग्य लाता है
गणेश सब देवों से पहले पूजे जाते हैं — यह चालीसा उनके प्रथम आशीर्वाद का आवाहन करती है
आने वाली चुनौतियों से जुड़े भय और चिंता को दूर करता है
आध्यात्मिक ज्ञान और सही-गलत में भेद करने की क्षमता प्रदान करता है
गणेश चालीसा जप विधि
गणेश की प्रतिमा या चित्र के सम्मुख बैठें। मोदक, दूर्वा घास और लाल पुष्प अर्पित करें। दीपक और धूप जलाएँ। भक्ति और एकाग्रता से गणेश चालीसा का पाठ करें। किसी भी नए कार्य, यात्रा या महत्वपूर्ण काम का आरंभ इस चालीसा से करना पारंपरिक है। बुधवार (गणेश का दिन) और गणेश चतुर्थी पर पाठ विशेष रूप से शुभ है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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