गुरु वंदना
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✦ अर्थ
गुरु वंदना एक सार्वभौमिक प्रार्थना है जो गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर तथा साक्षात् परब्रह्म के रूप में महिमामण्डित करती है। यह अज्ञान के अन्धकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश देने वाले गुरु को नमस्कार करती है। अध्ययन व साधना के आरम्भ में इसका पाठ विनम्रता और कृतज्ञता जगाता है।
उत्पत्ति और कथा
Guru Gita (Skanda Purana) · Attributed to Lord Shiva (taught to Parvati) · Ancient (Puranic era)
गुरु गीता स्कन्द पुराण में भगवान शिव और देवी पार्वती के बीच एक संवाद है। पार्वती शिव से गुरु के स्वरूप और महत्त्व के विषय में पूछती हैं। शिव इन श्लोकों से उत्तर देते हैं, यह घोषित करते हुए कि गुरु सम्पूर्ण देवत्रयी — ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर — का स्वरूप हैं, क्योंकि गुरु ज्ञान का सृजन करते हैं, विद्या का पालन करते हैं और अज्ञान का नाश करते हैं। 'त्वमेव माता' श्लोक एक भिन्न स्रोत से है और समर्पण की एक सार्वभौमिक प्रार्थना है।
✦ शास्त्रों में वर्णित
छान्दोग्य उपनिषद् सत्यकाम जाबाल की कथा कहता है, जो अज्ञात माता-पिता का बालक था और ऋषि हारिद्रुमत गौतम के पास ज्ञान की कामना से गया। उसकी सत्यनिष्ठा के कारण गुरु ने उसे स्वीकार किया। वर्षों की विनम्र सेवा के पश्चात् गुरु ने उसे परम ज्ञान का उपदेश दिया। सत्यकाम महानतम ऋषियों में से एक हुआ — यह दर्शाते हुए कि गुरु-शिष्य का सम्बन्ध समस्त सामाजिक बाधाओं से परे है और साधारण मनुष्यों को प्रबुद्ध सत्त्व में रूपान्तरित करता है।
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गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुर्साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥
Gurur Brahma Gurur Vishnu Gurur Devo Maheshwarah Gurur Sakshat Param Brahma Tasmai Shri Gurave Namah
अर्थ:गुरु ब्रह्मा हैं, गुरु विष्णु हैं, गुरु ही साक्षात् महेश्वर (शिव) हैं; गुरु ही साक्षात् परब्रह्म हैं — उन श्रीगुरु को नमस्कार।
अखण्डमण्डलाकारं व्याप्तं येन चराचरम्। तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्री गुरवे नमः॥
Akhandamandalakaram Vyaptam Yena Characharam Tatpadam Darshitam Yena Tasmai Shri Gurave Namah
अर्थ:जो अखण्ड मण्डलाकार रूप में समस्त चराचर जगत् में व्याप्त हैं — उस (ब्रह्मरूप) पद को दिखाने वाले श्रीगुरु को नमस्कार।
अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानाञ्जनशलाकया। चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्री गुरवे नमः॥
Agyaana Timirandhasya Gyananjana Shalakaya Chakshur Unmilitam Yena Tasmai Shri Gurave Namah
अर्थ:अज्ञान के अन्धकार से अन्धे (मुझ) के नेत्रों को ज्ञान-अंजन की शलाका से खोलने वाले श्रीगुरु को नमस्कार।
त्वमेव माता च पिता त्वमेव त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव। त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव त्वमेव सर्वं मम देव देव॥
Tvameva Mata Cha Pita Tvameva Tvameva Bandhush Cha Sakha Tvameva Tvameva Vidya Dravinam Tvameva Tvameva Sarvam Mama Deva Deva
अर्थ:तुम ही माता हो, तुम ही पिता; तुम ही बन्धु और सखा हो; तुम ही विद्या और धन हो; हे देवदेव! तुम ही मेरा सर्वस्व हो।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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गुरु वंदना पाठ के लाभ
समस्त अध्ययन और आध्यात्मिक साधना के पूर्व पठित मूलभूत प्रार्थना
विनम्रता, कृतज्ञता और गुरुजनों के प्रति सम्मान जगाती है
ज्ञान और विद्या ग्रहण करने हेतु मन को खोलती है
भारत भर के लाखों विद्यालयों, आश्रमों और आध्यात्मिक केन्द्रों में नित्य पठित
गुरु-तत्त्व उस प्रकाश का प्रतीक है जो अज्ञान को दूर करता है
सार्वभौमिक — जीवन के समस्त शिक्षकों, मार्गदर्शकों और गुरुजनों पर लागू
गुरु वंदना जप विधि
हाथ जोड़कर और सच्ची श्रद्धा से पाठ करें। परम्परागत रूप से किसी भी कक्षा, व्याख्यान या आध्यात्मिक सभा के आरम्भ में पठित। गुरु पूर्णिमा (जुलाई की पूर्णिमा) पर इस मन्त्र का विशेष भक्ति से पाठ किया जाता है। पाठ करते समय अपने गुरु के चरण स्पर्श करें अथवा मानसिक रूप से नमन करें। इस मन्त्र का १०८ बार समर्पित साधना के रूप में भी जप किया जा सकता है।