श्री यन्त्र मंत्र (षोडशी मंत्र)
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✦ अर्थ
श्री यन्त्र मंत्र (षोडशी मंत्र) श्रीविद्या तंत्र परंपरा का सर्वाधिक शक्तिशाली मंत्र है, जिसमें लक्ष्मी, त्रिपुर सुन्दरी और पंचदशी बीज मंत्र संयुक्त हैं। श्री यन्त्र संपूर्ण ब्रह्मांड को ज्यामितीय रूप में दर्शाता है। यह धन-समृद्धि, आध्यात्मिक उन्नति और ब्रह्मांडीय सामंजस्य के लिए जपा जाता है।
उत्पत्ति और कथा
Sri Vidya Tantric tradition · Ancient Tantric sages (attributed to Adi Shankaracharya for popularization) · Ancient (codified in medieval period)
श्री यन्त्र और उससे संबंधित मंत्र श्रीविद्या परंपरा से आते हैं, जो हिंदू तंत्र के सबसे परिष्कृत विद्यालयों में से एक है। श्री यन्त्र की ज्यामिति — 9 परस्पर गुँथे त्रिकोण जो 43 छोटे त्रिकोण बनाते हैं — गणितीय रूप से अत्यंत सटीक है और कहा जाता है कि यह ब्रह्मांडीय सृष्टि और प्रलय की संपूर्ण प्रक्रिया का प्रतिनिधित्व करती है। आदि शंकराचार्य को प्रमुख शंकराचार्य मठों में श्री यन्त्र पूजा की स्थापना का श्रेय दिया जाता है।
✦ शास्त्रों में वर्णित
शृंगेरी शारदा पीठम (शंकराचार्य द्वारा स्थापित) में स्थित श्री यन्त्र की 1200 वर्षों से अधिक समय से निरंतर पूजा होती आ रही है। इस मठ ने अपने संपूर्ण इतिहास में कभी आर्थिक कठिनाई का सामना नहीं किया — इसके पास सदैव ठीक उतने ही संसाधन रहे जितने आवश्यक थे। वैज्ञानिकों ने पाया है कि श्री यन्त्र की ज्यामिति एक अनूठा अनुनाद पैटर्न उत्पन्न करती है जो 'ॐ' ध्वनि की कंपन आवृत्ति से मेल खाता है — यह संकेत देता है कि प्राचीन ऋषियों ने आधुनिक भौतिकी द्वारा तरंग पैटर्न समझने से हजारों वर्ष पूर्व ही ध्वनि को ज्यामिति में संकेतबद्ध कर दिया था।
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ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः॥
Om Shreem Hreem Shreem Kamale Kamalalaye Praseeda Praseeda Shreem Hreem Shreem Om Mahalakshmyai Namah
अर्थ:ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं — हे कमल में निवास करने वाली कमला (लक्ष्मी)! प्रसन्न हों, प्रसन्न हों; मुझे धन-समृद्धि प्रदान करें।
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुन्दरीयै नमः॥
Om Aim Hreem Shreem Tripura Sundaryai Namah
अर्थ:ॐ ऐं ह्रीं श्रीं — त्रिपुरसुन्दरी देवी को नमस्कार।
का ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं स क ल ह्रीं श्रीं॥
Ka E Ee La Hreem Ha Sa Ka Ha La Hreem Sa Ka La Hreem Shreem
अर्थ:क ए ई ल ह्रीं, ह स क ह ल ह्रीं, स क ल ह्रीं, श्रीं — (यह श्रीविद्या का पञ्चदशाक्षरी मन्त्र है, देवी ललिता त्रिपुरसुन्दरी का बीज-स्वरूप)।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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श्री यन्त्र मंत्र (षोडशी मंत्र) पाठ के लाभ
श्री यन्त्र हिंदू धर्म की सबसे शक्तिशाली पवित्र ज्यामिति मानी जाती है
इसमें लक्ष्मी मंत्र + त्रिपुर सुन्दरी मंत्र + पंचदशी बीज मंत्र संयुक्त हैं
श्री यन्त्र संपूर्ण ब्रह्मांड को ज्यामितीय रूप में प्रकट करता है
धन आकर्षण, आध्यात्मिक प्रगति और ब्रह्मांडीय सामंजस्य के लिए प्रयुक्त होता है
जप करते समय श्री यन्त्र पर ध्यान करना कई गुना अधिक प्रभावशाली है
यह सबसे गहन तांत्रिक साधनाओं में से एक है — भौतिक और आध्यात्मिक धन को जोड़ती है
श्री यन्त्र मंत्र (षोडशी मंत्र) जप विधि
अपने सामने एक श्री यन्त्र (मुद्रित चित्र भी हो सकता है) रखें। घी का दीपक जलाएँ। पहला मंत्र (ॐ श्रीं...) लक्ष्मी पूजन के लिए है — 108 बार जप करें। दूसरा (ॐ ऐं ह्रीं श्रीं) त्रिपुर सुन्दरी का आवाहन करता है। तीसरा (क ए ई ल ह्रीं...) उन्नत पंचदशी मंत्र है — परंपरागत रूप से गुरु से दीक्षा आवश्यक है। आरंभ करने वालों को पहले मंत्र पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। जप करते समय श्री यन्त्र के केंद्र बिंदु (बिंदु) पर कोमलता से दृष्टि टिकाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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ॐ
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