सिद्ध कुञ्जिका स्तोत्रम्
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✦ अर्थ
सिद्ध कुञ्जिका स्तोत्र दुर्गा सप्तशती की 'गुप्त कुंजी' है, जिसे भगवान शिव ने पार्वती को बताया। इसके केवल पाठ मात्र से सम्पूर्ण सप्तशती पाठ का फल प्राप्त होता है। यह नवरात्रि में अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।
उत्पत्ति और कथा
Revealed by Lord Shiva to Parvati (part of Durga Saptashati tradition) · Lord Shiva (as narrator) · Ancient (Markandeya Purana tradition)
सिद्ध कुञ्जिका स्तोत्र भगवान शिव और देवी पार्वती के बीच संवाद के रूप में प्रस्तुत है। पार्वती शिव से दुर्गा सप्तशती (मार्कण्डेय पुराण के देवी माहात्म्य के ७०० श्लोक) का पूर्ण फल प्राप्त करने का सरलतम उपाय पूछती हैं। शिव यह 'गुप्त कुंजी' प्रकट करते हैं — सम्पूर्ण सप्तशती की शक्ति का एक स्तोत्र में संकेन्द्रित सार। वे इसकी गोपनीयता पर बल देते हुए कहते हैं कि इसे अपने गहनतम रहस्य की भाँति सुरक्षित रखना चाहिए, और देवताओं के लिए भी यह दुर्लभ है।
✦ शास्त्रों में वर्णित
दुर्गा सप्तशती (चण्डी पाठ) हिन्दू धर्म के सबसे शक्तिशाली ग्रन्थों में से एक है — कहा जाता है कि नवरात्रि में इसका सम्पूर्ण पाठ किसी भी मनोकामना को पूर्ण कर सकता है। परन्तु पूर्ण पाठ के लिए विस्तृत तैयारियों (कवच, अर्गला, कीलक, न्यास आदि) की आवश्यकता होती है जिनमें घंटों लगते हैं। भगवान शिव ने कुञ्जिका को एक संक्षिप्त मार्ग के रूप में प्रकट किया जिसमें सम्पूर्ण सप्तशती की शक्ति संकेन्द्रित रूप में समाहित है। भारत भर के भक्त साक्षी हैं कि नवरात्रि में केवल कुञ्जिका स्तोत्र का गहन भक्ति से पाठ करने से असंभव प्रतीत होने वाली समस्याएँ — न्यायालयीन मुकदमे, स्वास्थ्य संकट, आर्थिक बर्बादी और सम्बन्धों का टूटना — हल हुई हैं।
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ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा॥
Om Aim Hreem Kleem Chamundayai Vichche Om Glaum Hum Kleem Joom Sah Jvalaya Jvalaya Jvala Jvala Prajvala Prajvala Aim Hreem Kleem Chamundayai Vichche Jvala Ham Sam Lam Ksham Phat Svaha
अर्थ:ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे; ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः — (ये देवी चामुण्डा के दिव्य बीजमन्त्र हैं, जिनसे स्तोत्र आरम्भ होता है)।
शिव उवाच: शृणु देवि प्रवक्ष्यामि कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्। येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजापः शुभो भवेत्॥
Shiva Uvacha: Shrinu Devi Pravakshyami Kunjikaastotram Uttamam Yena Mantraprabhaavena Chandeejaapah Shubho Bhavet
अर्थ:शिव बोले: हे देवी! सुनो, मैं परम कुञ्जिका स्तोत्र कहता हूँ, जिसके प्रभाव से दुर्गा-पाठ सफल होता है।
न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम्। न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो न च वार्चनम्॥
Na Kavacham Naargalaastotram Keelakam Na Rahasyakam Na Sooktam Naapi Dhyanam Cha Na Nyaaso Na Cha Varchanam
अर्थ:न कवच, न अर्गला स्तोत्र, न कीलक, न रहस्य और न सूक्त (पढ़ने की आवश्यकता है) —
कुञ्जिकापाठमात्रेण दुर्गापाठफलं लभेत्। अति गुह्यतरं देवि देवानामपि दुर्लभम्॥
Kunjikapaathamatrena Durgaapaathphalam Labhet Ati Guhyataram Devi Devaanamapi Durlabham
अर्थ:केवल कुञ्जिका के पाठ मात्र से सम्पूर्ण दुर्गा-पाठ का फल प्राप्त हो जाता है; यह अति गुह्य है।
गोपनीयं प्रयत्नेन स्वयोनिरिव पार्वति। मारणं मोहनं वश्यं स्तम्भनोच्चाटनादिकम्। पाठमात्रेण संसिद्ध्येत् कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्॥
Gopaneeyam Prayatnena Svayoniriva Parvati Maaranam Mohanam Vashyam Stambhanocchaatanaadikam Paathamatrena Samsiddhyet Kunjikaastotram Uttamam
अर्थ:हे पार्वती! इसे अपने गर्भ की भाँति यत्नपूर्वक गुप्त रखना चाहिए; इससे मारण, मोहन आदि सब (सिद्धियाँ) सध जाती हैं।
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा॥
Om Aim Hreem Kleem Chamundayai Vichche Om Glaum Hum Kleem Joom Sah Jvalaya Jvalaya Jvala Jvala Prajvala Prajvala Aim Hreem Kleem Chamundayai Vichche Jvala Ham Sam Lam Ksham Phat Svaha
अर्थ:ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे; ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः — हे देवी, प्रज्वलित हो! (ये मन्त्र-बीज देवी की शक्तियाँ हैं)।
नमस्ते रुद्ररूपिण्यै नमस्ते मधुमर्दिनि। नमः कैटभनाशिन्यै नमस्ते महिषार्दिनि॥
Namaste Rudraroopinyai Namaste Madhumardini Namah Kaitabhanashinyai Namaste Mahishardini
अर्थ:हे रुद्ररूपिणी, तुम्हें नमस्कार; हे मधु-मर्दिनी, तुम्हें नमस्कार; हे कैटभ-नाशिनी आदि रूपों को नमस्कार।
नमस्ते शुम्भहन्त्र्यै च निशुम्भासुरघातिनि। जाग्रतं हि महादेवि जपं सिद्धं कुरुष्व मे॥
Namaste Shumbhahantryai Cha Nishumbhasuraghatin Jagratam Hi Mahadevi Japam Siddham Kurushva Me
अर्थ:हे शुम्भ का वध करने वाली और निशुम्भासुर का नाश करने वाली, तुम्हें नमस्कार; जाग्रत हो, हे देवी!
ऐंकारी सृष्टिरूपायै ह्रींकारी प्रतिपालिका। क्लींकारी कामरूपिण्यै बीजरूपे नमोऽस्तु ते॥
Aimkari Srishtiroopayai Hrimkari Pratipalika Klimkari Kamaroopinyai Beejaroope Namostu Te
अर्थ:'ऐं' तुम्हारा सृष्टि-रूप है, 'ह्रीं' पालन-रूप, 'क्लीं' कामना-रूप — इन बीजों में तुम विराजमान हो।
चामुण्डा चण्डघाती च यैकारी वरदायिनी। विच्चे चाभयदा नित्यं नमस्ते मन्त्ररूपिणि॥
Chamunda Chandaghati Cha Yaikari Varadayini Vichche Chabhayada Nityam Namaste Mantraroopini
अर्थ:चामुण्डा, चण्ड का नाश करने वाली; 'यै' वरदायिनी, 'विच्चे' नित्य वर देने वाली — इन रूपों में तुम्हें नमस्कार।
धां धीं धूं धूर्जटेः पत्नी वां वीं वूं वागधीश्वरी। क्रां क्रीं क्रूं कालिका देवी शां शीं शूं मे शुभं कुरु॥
Dham Dhim Dhoom Dhurjateh Patni Vam Vim Voom Vagadhishvari Kram Krim Kroom Kalika Devi Sham Shim Shoom Me Shubham Kuru
अर्थ:धां धीं धूं — हे धूर्जटि (शिव) की पत्नी! वां वीं वूं — हे वाणी की अधीश्वरी! (ये बीजमन्त्र देवी के स्वरूप हैं)।
हुं हुं हुंकाररूपिण्यै जं जं जं जम्भनादिनी। भ्रां भ्रीं भ्रूं भैरवी भद्रे भवान्यै ते नमो नमः॥
Hum Hum Humkararoopinyai Jam Jam Jam Jambhanadini Bhram Bhrim Bhroom Bhairavi Bhadre Bhavanyai Te Namo Namah
अर्थ:हुं हुं हुंकाररूपिणी; जं जं जं गर्जना करने वाली; भ्रां भ्रीं भ्रूं — हे भैरवी, भवानी! (इन बीजमन्त्रों में स्थित देवी को नमस्कार)।
इति श्रीसिद्धकुञ्जिकास्तोत्रं सम्पूर्णम्॥
Iti Shri Siddha Kunjika Stotram Sampoornam
अर्थ:इस प्रकार श्रीसिद्धकुञ्जिका स्तोत्र सम्पूर्ण हुआ।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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सिद्ध कुञ्जिका स्तोत्रम् पाठ के लाभ
दुर्गा सप्तशती की प्रमुख कुंजी — शिव कहते हैं कि किसी अन्य तैयारी की आवश्यकता नहीं
कुञ्जिका का अर्थ है 'चाबी' — यह चण्डी पाठ के ७०० श्लोकों की पूर्ण शक्ति खोल देती है
शिव घोषणा करते हैं: केवल इसका पाठ सम्पूर्ण सप्तशती का पूर्ण फल देता है
इसमें सबसे शक्तिशाली तांत्रिक बीजमन्त्र हैं (ऐं, ह्रीं, क्लीं, फट्)
'अति गुह्यतरं' — भगवान शिव इसे 'रहस्यों का परम रहस्य' कहते हैं
नवरात्रि में आवश्यक — पूर्ण फल हेतु दुर्गा सप्तशती से पूर्व इसका पाठ करें
रक्षा, शत्रुओं पर विजय और समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति प्रदान करता है
सिद्ध कुञ्जिका स्तोत्रम् जप विधि
यह स्तोत्र परम्परागत रूप से दुर्गा सप्तशती (चण्डी पाठ) पढ़ने से पूर्व पढ़ा जाता है। भगवान शिव पार्वती को बताते हैं कि केवल इस स्तोत्र का पाठ करने से सम्पूर्ण ७०० श्लोकों की सप्तशती का पूर्ण फल प्राप्त होता है — बिना कवच, अर्गला, कीलक या किसी अन्य तैयारी के। दुर्गा की प्रतिमा के सम्मुख बैठें। घी का दीपक जलाएँ। गहन एकाग्रता और भक्ति से पाठ करें। बीजमन्त्रों (ऐं, ह्रीं, क्लीं) का शुद्ध उच्चारण करें। नवरात्रि में नौ दिन प्रतिदिन पाठ करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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