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णमोकार मंत्र

🕉️ jain·📿 108× जप·🕐 प्रातः (सूर्योदय से पूर्व) और संध्या·🎵 ऑडियो सहित·📜 Jain Agamas (ancient Jain scriptures)

अन्य नाम / खोज: namo arihantanam · navkar mantra · namokar mantra jain · namo siddhanam

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अर्थ

णमोकार मंत्र (नवकार मंत्र) जैन धर्म का सबसे पवित्र और शक्तिशाली मंत्र है। यह किसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि पाँच परमेष्ठी — अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और समस्त साधुओं — के गुणों को नमस्कार करता है। यह सर्वव्यापी मंत्र समस्त पापों का नाश करता है और सब मंगलों में प्रथम मंगल है।

उत्पत्ति और कथा

Jain Agamas (ancient Jain scriptures) · Ancient Jain tradition (pre-Mahavira) · Over 2,500 years old

णमोकार मंत्र 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर (599-527 ई.पू.) से भी पूर्व का है। इसे नित्य (शाश्वत) माना जाता है — किसी के द्वारा रचा नहीं गया, बल्कि अनादि काल से विद्यमान। जब महावीर ने केवल ज्ञान (सर्वज्ञता) प्राप्त किया, तब देवताओं ने उत्सव में इस मंत्र का उच्चारण किया। यह प्रत्येक जैन बालक को सिखाई जाने वाली पहली प्रार्थना है और मृत्यु के समय जैन के होठों पर अंतिम प्रार्थना है।

शास्त्रों में वर्णित

जैन ग्रंथों में उल्लेख है कि राजगृह के राजा श्रेणिक, राजा के रूप में हिंसक कृत्यों से गंभीर कर्म संचित करने के बावजूद, भविष्य के जन्म में मुक्ति के लिए नियत हुए क्योंकि उन्होंने मृत्यु के क्षण में श्रद्धापूर्वक णमोकार मंत्र का जप किया। कहा जाता है कि मंत्र की शक्ति इतनी अपार है कि एक भी श्रद्धापूर्ण उच्चारण व्यक्ति के कर्म-भाग्य की दिशा बदल सकता है।

सुनें और साथ में जपें

सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित

किसी भी पंक्ति या ▶ बटन पर टैप कर सुनें

श्लोक 1

णमो अरिहंताणं णमो सिद्धाणं णमो आयरियाणं णमो उवज्झायाणं णमो लोए सव्व साहूणं

Namo Arihantanam Namo Siddhanam Namo Aayariyanam Namo Uvajjhayanam Namo Loe Savva Sahunam

अर्थ:अरिहन्तों को नमस्कार, सिद्धों को नमस्कार, आचार्यों को नमस्कार, उपाध्यायों को नमस्कार, लोक के समस्त साधुओं को नमस्कार।

श्लोक 2

एसो पंच णमोक्कारो सव्व पावप्पणासणो मंगलाणं सव्वेसिं पढमं हवइ मंगलं

Eso Panch Namokkaro Savva Pavappanasano Mangalanam Cha Savvesim Padhamam Havai Mangalam

अर्थ:यह पञ्च-नमस्कार समस्त पापों का नाश करने वाला है, और सब मंगलों में प्रथम (सर्वश्रेष्ठ) मंगल है।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

णमो🔊Namoमैं नमन करता हूँ / नमस्कार करता हूँ
अरिहंताणं🔊Arihantanamअरिहंत — जिन्होंने आंतरिक शत्रुओं (कषायों) पर विजय प्राप्त की है
सिद्धाणं🔊Siddhanamसिद्ध — मुक्त आत्माएँ जिन्होंने मोक्ष प्राप्त किया है
आयरियाणं🔊Aayariyanamआचार्य — आध्यात्मिक गुरु और संघ के प्रमुख
उवज्झायाणं🔊Uvajjhayanamउपाध्याय — शास्त्रों की शिक्षा देने वाले गुरु
लोए सव्व साहूणं🔊Loe Savva Sahunamसंसार के समस्त साधु (मुनि और साध्वियाँ)
पंच णमोक्कारो🔊Panch Namokkaroयह पंच नमस्कार
सव्व पावप्पणासणो🔊Savva Pavappanasanoसमस्त पापों का नाश करता है
मंगलं🔊Mangalamमंगल, समस्त मंगलों में सर्वश्रेष्ठ

णमोकार मंत्र पाठ के लाभ

जैन धर्म का सर्वाधिक पवित्र और शक्तिशाली मंत्र — समस्त पापों का नाश करता है

इन पाँच परमेष्ठियों को नमस्कार करने से विनम्रता विकसित होती है और अहंकार का नाश होता है

किसी विशेष व्यक्ति की नहीं, बल्कि गुणों की उपासना करता है — इसी से यह सच्चे अर्थों में सार्वभौमिक है

आंतरिक शांति, मानसिक स्पष्टता और आध्यात्मिक प्रगति प्रदान करता है

नकारात्मक कर्म और अशुभ घटनाओं से रक्षा करता है

किसी भी महत्वपूर्ण कार्य से पहले जप करने से सफलता और मंगल सुनिश्चित होता है

णमोकार मंत्र जप विधि

जप संख्या108बार
उत्तम समयप्रातः (सूर्योदय से पूर्व) और संध्या

स्वच्छ, शांत स्थान पर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें। आँखें बंद करें और हाथ जोड़ें। प्रत्येक पंक्ति धीरे-धीरे बोलें, जिन परमेष्ठी को आप नमस्कार कर रहे हैं उनके गुणों का चिंतन करें। णमोकार मंत्र कुछ नहीं माँगता — यह शुद्ध श्रद्धा है। निःस्वार्थ श्रद्धा का यही भाव इसे इतना शक्तिशाली बनाता है। गहन ध्यान के लिए माला से 108 बार जप करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

णमोकार (नवकार) मंत्र जैन धर्म का सबसे महत्वपूर्ण मंत्र है। यह पाँच परमेष्ठियों — अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और समस्त साधुओं — को नमस्कार करता है। यह किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि आध्यात्मिक पूर्णता के गुणों की उपासना करता है।
हाँ। णमोकार मंत्र सार्वभौमिक है क्योंकि इसमें किसी विशेष देव, व्यक्ति या संप्रदाय का उल्लेख नहीं है। यह गुणों को नमस्कार करता है — आध्यात्मिक विजय, मुक्ति, शिक्षण और त्याग — जो सार्वभौमिक आदर्श हैं।
जैन धर्म सिखाता है कि प्रत्येक आत्मा आत्म-प्रयास से ईश्वर (अरिहंत/सिद्ध) बनने की क्षमता रखती है। णमोकार मंत्र उन्हें नमस्कार करता है जिन्होंने यह सिद्धि प्राप्त की और जो दूसरों का मार्गदर्शन करते हैं — किसी सृष्टिकर्ता देव में नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उपलब्धि में दिव्यता को पहचानता है।

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