वक्रतुण्ड महाकाय — गणेश श्लोक
अन्य नाम / खोज: vakratunda mahakaya suryakoti samaprabha · nirvighnam kuru me deva · ganesh shloka
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✦ अर्थ
वक्रतुण्ड महाकाय भगवान गणेश का सबसे प्रसिद्ध श्लोक है, जो किसी भी नए कार्य के आरंभ में बोला जाता है। इसमें गणेश से समस्त कार्यों में विघ्न दूर करने की प्रार्थना है। केवल आधे मिनट में पूर्ण होने वाला यह श्लोक हर हिंदू बालक की पहली प्रार्थना है।
उत्पत्ति और कथा
Traditional Sanskrit devotional verse (found across multiple texts) · Ancient tradition · Ancient
यह श्लोक इतना प्राचीन और सार्वभौमिक है कि इसका विशिष्ट मूल खोज पाना असंभव है — यह अनेक पुराणों और भक्ति-ग्रंथों में मिलता है। 'वक्रतुण्ड महाकाय' श्लोक गणेश का प्रमुख आवाहन है, जो केवल दो पंक्तियों में उनके संपूर्ण स्वरूप (वक्र शुंड, विशाल काया, सूर्य-सी प्रभा) और उनके प्रमुख कार्य (विघ्न-नाश) को समेट लेता है। यह संसार का सर्वाधिक स्मरण किया जाने वाला संस्कृत श्लोक है।
✦ शास्त्रों में वर्णित
नए आरंभ से पूर्व 'वक्रतुण्ड महाकाय' जपने की परंपरा हजारों वर्षों से इसलिए चली आ रही है क्योंकि यह फलदायी है — किसी भी हिंदू से पूछें, उसके पास इस आवाहन के बाद विघ्न दूर होने की अपनी अनुभूतियाँ होंगी। गणेश पुराण कहता है कि गणेश का प्रयोजन ही अपने भक्तों का मार्ग निष्कंटक करना है। करोड़ों विद्यार्थी परीक्षा से पहले, व्यवसायी नए उद्यम से पहले और परिवार शुभ अवसरों से पहले इसे जपते हैं — सहस्राब्दियों से अरबों जनों की यह सामूहिक साक्षी ही इसका सबसे बड़ा चमत्कार है।
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वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
Vakratunda Mahakaya Suryakoti Samaprabha Nirvighnam Kuru Me Deva Sarvakaryeshu Sarvada
अर्थ:हे वक्रतुण्ड, महाकाय, करोड़ों सूर्यों-सी प्रभा वाले गणेश! मेरे समस्त कार्यों को सदा निर्विघ्न करें।
शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम्। प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये॥
Shuklambaradharam Vishnum Shashivarnam Chaturbhujam Prasannavadanam Dhyayet Sarvavighnopashantaye
अर्थ:श्वेत वस्त्रधारी, सर्वव्यापक विष्णु, चन्द्र-से वर्ण वाले, चतुर्भुज, प्रसन्नमुख का — समस्त विघ्नों की शान्ति हेतु — ध्यान करें।
अगजानन पद्मार्कं गजाननं अहर्निशम्। अनेकदन्तं भक्तानां एकदन्तं उपास्महे॥
Agajanana Padmarkam Gajaananam Aharnisham Anekadantam Bhaktanam Ekadantam Upasmahe
अर्थ:अगजा (पार्वती) के मुखकमल के लिए सूर्य-समान गजानन का हम दिन-रात वन्दन करते हैं; अनेक दाँतों वाले, भक्तों के विघ्नों का नाश करने वाले को नमस्कार।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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वक्रतुण्ड महाकाय — गणेश श्लोक पाठ के लाभ
सर्वाधिक जपा जाने वाला हिंदू श्लोक — हर नए आरंभ से पहले बोला जाता है
परीक्षा, साक्षात्कार, व्यवसाय के शुभारंभ, विवाह और यात्रा से पहले बोला जाता है
'निर्विघ्नं कुरु मे देव' — समस्त विघ्नों को दूर करने की प्रत्यक्ष प्रार्थना
तीन श्लोक — गणेश के स्वरूप, ध्यान और उपासना को समेटे हुए
हर हिंदू बालक को सिखाई जाने वाली पहली प्रार्थना
केवल 30 सेकंड में — व्यस्त आधुनिक जीवन के लिए उपयुक्त
वक्रतुण्ड महाकाय — गणेश श्लोक जप विधि
यह हिंदू धर्म की सार्वभौमिक आरंभ-प्रार्थना है। किसी भी महत्वपूर्ण कार्य के आरंभ से पूर्व इन 3 श्लोकों का जप करें। आँखें बंद करें, गणेश के प्रसन्न मुख का स्मरण करें और पाठ करें। किसी विशेष तैयारी की आवश्यकता नहीं — कहीं भी, कभी भी जपा जा सकता है। अनेक लोग इसे प्रतिदिन प्रातः दिन की पहली प्रार्थना के रूप में जपते हैं।
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