सुखकर्ता दुखहर्ता — गणेश आरती
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✦ अर्थ
'सुखकर्ता दुखहर्ता' संत रामदास द्वारा मराठी में रचित श्री गणेश की सर्वाधिक लोकप्रिय आरती है। यह सुख देने वाले और दुख हरने वाले विघ्नहर्ता गणेश की स्तुति करती है। गणेश चतुर्थी के दौरान महाराष्ट्र और पूरे भारत में यह श्रद्धापूर्वक गाई जाती है।
उत्पत्ति और कथा
Composed by Sant Ramdas · Samarth Ramdas · 17th century CE
संत रामदास (1608-1681), छत्रपति शिवाजी महाराज के आध्यात्मिक गुरु, ने इस आरती की रचना अपने मराठी भक्ति-साहित्य के अंग रूप में की। यह सरल, सशक्त मराठी पदों में गणेश पूजा का सार समेटे है। यह आरती गणेश चतुर्थी उत्सवों की पर्याय बन गई, विशेषकर 1893 में लोकमान्य तिलक द्वारा स्वतंत्रता आंदोलन के समय सार्वजनिक गणेशोत्सव लोकप्रिय किए जाने के बाद।
✦ शास्त्रों में वर्णित
गणेश चतुर्थी के दौरान भारत भर की करोड़ों गणेश मूर्तियाँ दूध का अर्घ्य 'पीती' हैं — 1995 में व्यापक रूप से और करोड़ों लोगों द्वारा देखी गई घटना। विज्ञान इसे केशिका क्रिया से समझाता है, पर भक्त इसे गणेश द्वारा अर्घ्य स्वीकार करना मानते हैं। 'सुखकर्ता दुखहर्ता' आरती का वचन — 'दर्शनमात्रे मनकामना पूर्ती' (केवल दर्शन से मनोकामना पूर्ण) — असंख्य भक्तों द्वारा प्रमाणित है, जो गणेश चतुर्थी के दौरान मनोकामनाओं की चमत्कारिक पूर्ति का अनुभव बताते हैं।
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सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची। नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची। सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची। कंठी झळके माळ मुक्ताफळाची॥
Sukhkarta Dukhharta Varta Vighnachi Nuravi Puravi Prem Krupa Jayachi Sarvangi Sundar Uti Shendurachi Kanthi Jhalke Mal Muktaphalachi
अर्थ:जो सुख देते और दुख हरते हैं, जो सभी विघ्नों का निवारण करते हैं। वे विजयी प्रभु के प्रेम और कृपा से परिपूर्ण हैं। उनका सारा सुंदर शरीर सिंदूर से सुशोभित है। उनके कंठ में मोतियों की माला चमकती है।
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती। दर्शनमात्रे मनकामना पुरती। जय देव जय देव॥
Jai Dev Jai Dev Jai Mangalmurti Darshanmatre Mankamana Purti Jai Dev Jai Dev
अर्थ:जय देव, जय देव, जय मंगलमूर्ति! केवल दर्शन मात्र से सब मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। जय देव, जय देव!
रत्नखचित फरा तुज गौरीकुमरा। चंदनाची उटी कुंकुमकेशरा। हिरेजडित मुकुट शोभतो बरा। रुणझुणती नूपुरे चरणी घागरिया॥
Ratnakhachit Fara Tuj Gaurikumara Chandanachi Uti Kumkumkeshara Hirejdit Mukut Shobhato Bara Runjhunati Noopure Charani Ghagariya
अर्थ:हे गौरी के पुत्र, आपका सिंहासन रत्नों से जड़ा है। आप चंदन, कुंकुम और केसर से अनुलिप्त हैं। हीरों से जड़ा मुकुट आप पर सुंदर शोभा देता है। आपके चरणों में नूपुर रुनझुन करते हैं।
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती। दर्शनमात्रे मनकामना पुरती। जय देव जय देव॥
Jai Dev Jai Dev Jai Mangalmurti Darshanmatre Mankamana Purti Jai Dev Jai Dev
अर्थ:जय देव, जय देव, जय मंगलमूर्ति! केवल दर्शन मात्र से सब मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। जय देव, जय देव!
लंबोदर पीतांबर फणिवरबंधना। सरळ सोंड वक्रतुंड त्रिनयना। दास रामाचे वाट पाहे सदना। संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवरवंदना॥
Lambodar Pitambar Phanivar Bandhana Saral Sond Vakratunda Trinayana Das Ramache Vaat Pahe Sadana Sankati Pavave Nirvani Rakshave SurvarVandana
अर्थ:हे लंबोदर, पीतांबरधारी, सर्पराज से बँधे हुए। सरल सूँड और वक्रतुंड वाले, त्रिनेत्रधारी। हे राम के सेवक, आपके भक्त घर में आपकी प्रतीक्षा करते हैं। संकट के समय हमारे पास आइए, अंतिम क्षण में हमारी रक्षा कीजिए, हे देवताओं द्वारा वंदित।
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती। दर्शनमात्रे मनकामना पुरती। जय देव जय देव॥
Jai Dev Jai Dev Jai Mangalmurti Darshanmatre Mankamana Purti Jai Dev Jai Dev
अर्थ:जय देव, जय देव, जय मंगलमूर्ति! केवल दर्शन मात्र से सब मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। जय देव, जय देव!
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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सुखकर्ता दुखहर्ता — गणेश आरती पाठ के लाभ
गणेश की सबसे लोकप्रिय आरती — महाराष्ट्र और पूरे भारत में हर गणेश चतुर्थी पर गाई जाती है।
'दर्शनमात्रे मनकामना पूर्ती' — केवल गणेश के दर्शन मात्र से सब मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
मराठी में गाई जाती है — विशाल मराठी भक्त-समुदाय से जुड़ती है।
गणेश चतुर्थी के 10 दिवसीय उत्सव में अनिवार्य, जिसे करोड़ों लोग मनाते हैं।
विघ्नों को हरती है (विघ्नहर्ता) और सुख प्रदान करती है (सुखकर्ता)।
हिन्दू धर्म की सबसे भावपूर्ण आरतियों में से एक।
सुखकर्ता दुखहर्ता — गणेश आरती जप विधि
यह आरती परंपरागत रूप से गणेश पूजा के समय मराठी में गाई जाती है, विशेषकर 10 दिवसीय गणेश चतुर्थी उत्सव के दौरान। बहु-बत्ती दीप (पंचारती) जलाएं। गणेश की मूर्ति के सामने उसे गोलाकार घुमाएं। पूरा परिवार और समुदाय साथ मिलकर गाते हैं, और 'जय देव जय देव' की टेक सबसे भावपूर्ण क्षण होता है। गणेश चतुर्थी पर मराठीतर भक्त भी यह आरती गाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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