सुखकर्ता दुखहर्ता — गणेश आरती Meaning — Line by Line
सुखकर्ता दुखहर्ता — गणेश आरती
Every verse and every word explained in English & Hindi
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Sukhkarta Dukhharta Varta Vighnachi
सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची। नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची। सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची। कंठी झळके माळ मुक्ताफळाची॥
Sukhkarta Dukhharta Varta Vighnachi Nuravi Puravi Prem Krupa Jayachi Sarvangi Sundar Uti Shendurachi Kanthi Jhalke Mal Muktaphalachi
Meaningजो सुख देते और दुख हरते हैं, जो सभी विघ्नों का निवारण करते हैं। वे विजयी प्रभु के प्रेम और कृपा से परिपूर्ण हैं। उनका सारा सुंदर शरीर सिंदूर से सुशोभित है। उनके कंठ में मोतियों की माला चमकती है।
Jai Dev Jai Dev Jai Mangalmurti
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती। दर्शनमात्रे मनकामना पुरती। जय देव जय देव॥
Jai Dev Jai Dev Jai Mangalmurti Darshanmatre Mankamana Purti Jai Dev Jai Dev
Meaningजय देव, जय देव, जय मंगलमूर्ति! केवल दर्शन मात्र से सब मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। जय देव, जय देव!
Ratnakhachit Fara Tuj Gaurikumara
रत्नखचित फरा तुज गौरीकुमरा। चंदनाची उटी कुंकुमकेशरा। हिरेजडित मुकुट शोभतो बरा। रुणझुणती नूपुरे चरणी घागरिया॥
Ratnakhachit Fara Tuj Gaurikumara Chandanachi Uti Kumkumkeshara Hirejdit Mukut Shobhato Bara Runjhunati Noopure Charani Ghagariya
Meaningहे गौरी के पुत्र, आपका सिंहासन रत्नों से जड़ा है। आप चंदन, कुंकुम और केसर से अनुलिप्त हैं। हीरों से जड़ा मुकुट आप पर सुंदर शोभा देता है। आपके चरणों में नूपुर रुनझुन करते हैं।
Jai Dev Jai Dev Jai Mangalmurti
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती। दर्शनमात्रे मनकामना पुरती। जय देव जय देव॥
Jai Dev Jai Dev Jai Mangalmurti Darshanmatre Mankamana Purti Jai Dev Jai Dev
Meaningजय देव, जय देव, जय मंगलमूर्ति! केवल दर्शन मात्र से सब मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। जय देव, जय देव!
Lambodar Pitambar Phanivar Bandhana
लंबोदर पीतांबर फणिवरबंधना। सरळ सोंड वक्रतुंड त्रिनयना। दास रामाचे वाट पाहे सदना। संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवरवंदना॥
Lambodar Pitambar Phanivar Bandhana Saral Sond Vakratunda Trinayana Das Ramache Vaat Pahe Sadana Sankati Pavave Nirvani Rakshave SurvarVandana
Meaningहे लंबोदर, पीतांबरधारी, सर्पराज से बँधे हुए। सरल सूँड और वक्रतुंड वाले, त्रिनेत्रधारी। हे राम के सेवक, आपके भक्त घर में आपकी प्रतीक्षा करते हैं। संकट के समय हमारे पास आइए, अंतिम क्षण में हमारी रक्षा कीजिए, हे देवताओं द्वारा वंदित।
Jai Dev Jai Dev Jai Mangalmurti
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती। दर्शनमात्रे मनकामना पुरती। जय देव जय देव॥
Jai Dev Jai Dev Jai Mangalmurti Darshanmatre Mankamana Purti Jai Dev Jai Dev
Meaningजय देव, जय देव, जय मंगलमूर्ति! केवल दर्शन मात्र से सब मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। जय देव, जय देव!
Word-by-Word Breakdown
Origin & History
Source: Composed by Sant Ramdas
Author: Samarth Ramdas
Period: 17th century CE
संत रामदास (1608-1681), छत्रपति शिवाजी महाराज के आध्यात्मिक गुरु, ने इस आरती की रचना अपने मराठी भक्ति-साहित्य के अंग रूप में की। यह सरल, सशक्त मराठी पदों में गणेश पूजा का सार समेटे है। यह आरती गणेश चतुर्थी उत्सवों की पर्याय बन गई, विशेषकर 1893 में लोकमान्य तिलक द्वारा स्वतंत्रता आंदोलन के समय सार्वजनिक गणेशोत्सव लोकप्रिय किए जाने के बाद।
Frequently Asked Questions
सुखकर्ता दुखहर्ता किस भाषा में है?▼
इस गणेश आरती की रचना किसने की?▼
यह आरती कब गाई जाती है?▼
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