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अल्पाक्षरमसन्दिग्धम् — Word-by-Word Meaning

अल्पाक्षरमसन्दिग्धम्

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

अल्पाक्षरम्
alpākṣaram
अल्प अक्षरों वाला, संक्षिप्त, छोटा
असन्दिग्धम्
asandigdham
संदेहरहित, अस्पष्टता से रहित, स्पष्ट
सारवत्
sāravat
सार से पूर्ण, अर्थपूर्ण, ठोस
विश्वतोमुखम्
viśvato-mukham
सब ओर मुख वाला, सर्वत्र लागू, व्यापक
अस्तोभम्
astobham
निरर्थक भरती के शब्दों / विरामों से रहित, पादपूर्ति-रहित
अनवद्यम्
anavadyam
निर्दोष, दोषरहित, त्रुटिहीन
ca
और
सूत्रम्
sūtram
एक सूत्र (संक्षिप्त सूत्रात्मक कथन)
सूत्रविदः
sūtra-vidaḥ
जो सूत्रों को जानते हैं, सूत्रों के विशेषज्ञ
विदुः
viduḥ
उसे (ऐसा) जानते हैं, घोषित करते हैं

Complete Translation

अल्प अक्षरों वाला (संक्षिप्त), संदेहरहित (स्पष्ट), सारयुक्त, सर्वत्र लागू होने वाला (व्यापक), निरर्थक शब्दों से रहित, और दोषरहित — विद्वान जन ऐसे ही कथन को सच्चा सूत्र मानते हैं। यह श्लोक स्वयं एक सुन्दर पद में उन छह गुणों को परिभाषित करता है जो किसी कथन को उत्तम बनाते हैं: संक्षिप्तता, स्पष्टता, सार, व्यापकता, मितव्ययिता और निर्दोषता।

Origin & History

Source: Subhashita

Author: Unknown (classical Sanskrit shastra tradition)

Period: Classical Sanskrit literature

संस्कृत शास्त्रों में ज्ञान को प्रायः सूत्रों में संक्षिप्त किया जाता था — संक्षिप्त, सूत्रात्मक कथन जिनका उद्देश्य न्यूनतम शब्दों में अधिकतम अर्थ भरना था। यह प्रसिद्ध श्लोक, जो सुभाषित एवं व्याकरण परम्पराओं में प्रचलित है, ऐसे ही सूत्र के आदर्श को परिभाषित करता है, और उत्तम सूत्र के छह गुणों की गणना करता है। उपयुक्त रूप से, यह श्लोक स्वयं उसी संक्षिप्तता एवं स्पष्टता का निर्दोष उदाहरण है जिसकी यह प्रशंसा करता है।

Frequently Asked Questions

यह श्लोक किसकी परिभाषा देता है?
यह सूत्र की शास्त्रीय परिभाषा देता है — एक उत्तम सूत्र। यह उन छह गुणों को बताता है जो सच्चे सूत्र में होने चाहिए: संक्षिप्तता, स्पष्टता, सार, सर्वत्र लागू होना, भरती के शब्दों से रहित होना, और निर्दोषता।
श्लोक में बताए गए सूत्र के छह गुण कौन से हैं?
अल्पाक्षरम् (संक्षिप्त), असन्दिग्धम् (संदेहरहित), सारवत् (सारयुक्त), विश्वतोमुखम् (व्यापक), अस्तोभम् (निरर्थक शब्दों से रहित), और अनवद्यम् (निर्दोष)। ये मिलकर संक्षिप्त, उत्तम अभिव्यक्ति के आदर्श को परिभाषित करते हैं।
यह श्लोक कहाँ प्रयुक्त होता है?
यह एक प्रसिद्ध सुभाषित है जो समस्त सूत्र-आधारित शास्त्रों में — विशेषतः व्याकरण एवं न्याय में — सूत्र को उत्तम बनाने वाली बातों के मानक वर्णन के रूप में उद्धृत होता है। यह स्वयं संक्षिप्तता एवं स्पष्टता का आदर्श है।

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