श्री अय्यप्प अष्टोत्तरशतनामावली — Word-by-Word Meaning
श्री अय्यप्प अष्टोत्तरशतनामावली
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
Complete Translation
Origin & History
Source: Traditional Shasta / Ayyappa devotional liturgy (South Indian temple tradition)
Author: Traditional (composer unknown)
Period: Traditional
भगवान अय्यप्प की अष्टोत्तरशतनामावली धर्मशास्ता-उपासना की मन्दिर-परम्परा से सम्बद्ध है, जिसका केन्द्र केरल का प्रसिद्ध पर्वत-तीर्थ शबरीमला है। अय्यप्प हरिहरपुत्र के रूप में पूजे जाते हैं, जो विष्णु के मोहिनी रूप एवं शिव के मिलन से उत्पन्न हुए, वैष्णव एवं शैव परम्पराओं की एकता के प्रतीक — यह भाव महाशैव, वैष्णव एवं विष्णुपूजक जैसे नामों में प्रतिबिम्बित है। ये 108 नाम अर्चना के रूप में पढ़े जाते हैं, प्रत्येक नाम देवता के चरणों में पुष्प सहित अर्पित किया जाता है, और शबरीमला यात्रा से पूर्व किए जाने वाले कठोर 41 दिवसीय व्रत में किए जाने वाले भक्ति-कर्मों का केन्द्रीय अंग हैं।
Frequently Asked Questions
अय्यप्प अष्टोत्तरशतनामावली क्या है?▼
अय्यप्प को हरिहरपुत्र क्यों कहा जाता है?▼
इन 108 नामों के पाठ का सर्वोत्तम समय कौन-सा है?▼
पूजा में नामावली का उपयोग किस प्रकार होता है?▼
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