बगलामुखी स्तोत्रम् (श्रीब्रह्मास्त्रमहाविद्याबगलामुखीस्तोत्रम्) — Word-by-Word Meaning
बगलामुखी स्तोत्रम् (श्रीब्रह्मास्त्रमहाविद्याबगलामुखीस्तोत्रम्)
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
Complete Translation
Origin & History
Source: Rudrayamala Tantra, Uttara Khanda (Shri Brahmastra Mahavidya Bagalamukhi Stotram)
Author: Traditional (anonymous); attributed in the viniyoga to the sage Narada as the seer (rishi)
Period: Medieval Tantric period
दस महाविद्याओं में आठवीं देवी बगलामुखी के विषय में कहा जाता है कि वे सृष्टि को संकट में डालने वाले एक महान तूफान को स्तब्ध करने हेतु प्रकट हुईं, 'हरिद्रा' (हल्दी) सरोवर के स्वर्णिम जल से प्रकट होकर अराजकता की असुर-शक्तियों को कीलित करने के लिए। स्तम्भन की देवी के रूप में वे समस्त प्रतिकूल को स्तब्ध एवं मूक कर देती हैं। यह ब्रह्मास्त्र स्तोत्र, जो रुद्रयामल तंत्र में सुरक्षित है और प्रसिद्ध 'मध्येसुधाब्धि' ध्यान से आरम्भ होता है, उनकी उपासना में सर्वाधिक पठित स्तोत्र है, जो विजय, रक्षा एवं शत्रुओं के दमन हेतु अत्यन्त मूल्यवान माना जाता है।
Frequently Asked Questions
बगलामुखी कौन हैं?▼
यह 'ब्रह्मास्त्र' बगलामुखी स्तोत्रम् क्या है?▼
बगलामुखी की उपासना में पीला रंग इतना महत्त्वपूर्ण क्यों है?▼
प्रसिद्ध 'वादी मूकति' श्लोक का क्या अर्थ है?▼
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