बटुक भैरव स्तोत्रम् PDF
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वन्दे बालं स्फटिकसदृशं कुण्डलोद्भासिवक्त्रं दिव्याकल्पैर्नवमणिमयैः किङ्किणीनूपुराद्यैः। दीप्ताकारं विशदवदनं सुप्रसन्नं त्रिनेत्रं हस्ताब्जाभ्यां बटुकमनिशं शूलदण्डौ दधानम्॥१॥
Vande bālaṁ sphaṭika-sadṛśaṁ kuṇḍalodbhāsi-vaktraṁ Divyākalpair-nava-maṇi-mayaiḥ kiṅkiṇī-nūpurādyaiḥ। Dīptākāraṁ viśada-vadanaṁ suprasannaṁ trinetraṁ Hastābjābhyāṁ baṭukam-aniśaṁ śūla-daṇḍau dadhānam॥1॥
मैं बटुक — भैरव के बालरूप — को नमन करता हूँ, जिनकी कान्ति स्फटिक के समान निर्मल है और जिनका मुख कुण्डलों से देदीप्यमान है; जो नवरत्नजड़ित दिव्य आभूषणों, किंकिणी एवं नूपुर आदि से अलंकृत हैं; जो दीप्त आकार वाले होकर भी विशद-मुख, त्रिनेत्र एवं अत्यन्त प्रसन्न हैं, और जो अपने दोनों कर-कमलों में निरन्तर शूल एवं दण्ड धारण करते हैं।
उद्यद्भास्करसन्निभं त्रिनयनं रक्ताङ्गरागस्रजं स्मेरास्यं वरदं कपालमभयं शूलं दधानं करैः। नीलग्रीवमुदारभूषणशतं शीतांशुचूडोज्ज्वलं बन्धूकारुणवाससं भयहरं देवं सदा भावये॥२॥
Udyad-bhāskara-sannibhaṁ tri-nayanaṁ raktāṅga-rāga-srajaṁ Smerāsyaṁ varadaṁ kapālam-abhayaṁ śūlaṁ dadhānaṁ karaiḥ। Nīla-grīvam-udāra-bhūṣaṇa-śataṁ śītāṁśu-cūḍojjvalaṁ Bandhūkāruṇa-vāsasaṁ bhaya-haraṁ devaṁ sadā bhāvaye॥2॥
मैं उस भयहारी देव का सदा ध्यान करता हूँ, जो उदीयमान सूर्य के समान कान्तिमान्, त्रिनयन, रक्त अंगराग एवं रक्त माला धारण किए हुए हैं; जिनका मुख स्मित-युक्त है, जो हाथों में वरमुद्रा, कपाल, अभयमुद्रा एवं शूल धारण करते हैं; जो नीलकण्ठ हैं, सैकड़ों उदार आभूषणों से विभूषित हैं, मस्तक पर शीतल चन्द्र से उज्ज्वल हैं, और बन्धूक पुष्प के समान अरुण वस्त्र धारण करते हैं।
ध्यायेन्नीलाद्रिकान्तं शशिकलधवलं मुण्डमालं महेशं दिग्वस्त्रं पिङ्गकेशं डमरुमथ सृणिं खड्गशूलाभयानि। नागं घण्टां कपालं करसरसिरुहैर्बिभ्रतं भीमदंष्ट्रं सर्पाकल्पं त्रिनेत्रं मणिमयविलसत्किङ्किणीनूपुराढ्यम्॥३॥
Dhyāyen-nīlādri-kāntaṁ śaśi-kala-dhavalaṁ muṇḍa-mālaṁ maheśaṁ Dig-vastraṁ piṅga-keśaṁ ḍamarum-atha sṛṇiṁ khaḍga-śūlābhayāni। Nāgaṁ ghaṇṭāṁ kapālaṁ kara-sarasiruhair-bibhrataṁ bhīma-daṁṣṭraṁ Sarpākalpaṁ trinetraṁ maṇi-maya-vilasat-kiṅkiṇī-nūpurāḍhyam॥3॥
महेश का ध्यान करना चाहिए, जो नीलगिरि के समान सुन्दर, चन्द्रकला से धवल, मुण्डमाला धारण करने वाले हैं; जो दिग्वस्त्र (दिगम्बर), पिंगल केश वाले हैं, और कर-कमलों में डमरु, सृणि (अंकुश), खड्ग, शूल एवं अभय, तथा नाग, घण्टा एवं कपाल धारण करते हैं; जिनकी दाढ़ें भयंकर हैं, जो सर्पों से अलंकृत, त्रिनेत्र, एवं मणिमय देदीप्यमान किंकिणी-नूपुरों से सुशोभित हैं।