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भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम — Word-by-Word Meaning

भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

भद्रम्
bhadram
जो शुभ, अच्छा, मंगलमय, कल्याणकारी है
कर्णेभिः
karṇebhiḥ
कानों से
शृणुयाम
śṛṇuyāma
हम सुनें
देवाः
devāḥ
हे देवो, हे देदीप्यमान देवगण
पश्येम
paśyema
हम देखें, हम अवलोकन करें
अक्षभिः
akṣabhiḥ
आँखों से
यजत्राः
yajatrāḥ
हे पूजनीय, यज्ञ के योग्य आराध्य देवो
स्थिरैः अङ्गैः
sthirair aṅgaiḥ
दृढ़, स्थिर अंगों से
तुष्टुवांसः तनूभिः
tuṣṭuvāṁsaḥ tanūbhiḥ
स्वस्थ शरीरों से (देवों की) स्तुति करते हुए
व्यशेम
vyaśema
हम भोगें, हम प्राप्त करें, हम (जीवन) व्यतीत करें
देवहितम् यत् आयुः
devahitaṁ yat āyuḥ
देवों द्वारा निर्धारित/कल्याणकारी आयु जितनी हो
शान्तिः
śāntiḥ
शान्ति (शरीर, मन और आत्मा में तथा समस्त विघ्न-स्रोतों से शान्ति हेतु तीन बार उच्चारित)

Complete Translation

ॐ। हे देवगण! हम अपने कानों से शुभ (मंगलमय) ही सुनें; हे पूजनीय देवो! हम अपनी आँखों से शुभ ही देखें। दृढ़ अंगों और स्वस्थ शरीर से आपकी स्तुति करते हुए, हम देवों द्वारा प्रदत्त पूर्ण आयु का उपभोग करें। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः।

Origin & History

Source: Rig Veda 1.89.8; Shanti Mantra of the Mundaka and other Upanishads

Author: Traditional (Vedic)

Period: Vedic

भद्रं कर्णेभिः ऋग्वेद की एक प्राचीन प्रार्थना है जो पवित्र अध्ययन की दहलीज़ पर शान्ति-पाठ, अर्थात् शान्ति-आह्वान, के रूप में प्रयुक्त होने लगी। यह मुण्डक उपनिषद् के आरम्भ में आती है और अथर्व एवं ऋग्वेद परम्पराओं में शास्त्र-पाठ से पूर्व पढ़ी जाती है। इसमें उपासक, देदीप्यमान देवों को सम्बोधित करते हुए, प्रार्थना करते हैं कि उनके कान केवल शुभ सुनें एवं आँखें केवल शुभ देखें, उनके शरीर दृढ़ एवं स्वस्थ रहें, और वे देवों द्वारा प्रदत्त पूर्ण आयु को दिव्य की स्तुति में व्यतीत करें। इसके अन्त में आने वाला त्रिविध 'शान्तिः' अस्तित्व के प्रत्येक स्तर पर शान्ति का आह्वान करता है।

Frequently Asked Questions

भद्रं कर्णेभिः का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है 'हे देवो, हम अपने कानों से शुभ ही सुनें'। पूर्ण प्रार्थना यह माँगती है कि हम केवल अच्छा सुनें और देखें, स्वास्थ्य एवं पूर्ण आयु भोगें, और अपना जीवन देवों की स्तुति में व्यतीत करें, और 'ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः' से समाप्त होती है।
भद्रं कर्णेभिः कहाँ से आया है?
यह ऋग्वेद (1.89.8) का वैदिक मन्त्र है और कई उपनिषदों, विशेषकर मुण्डक उपनिषद्, के आरम्भ में शान्ति-मन्त्र (शान्ति-आह्वान) के रूप में आता है। यह अथर्ववेद एवं ऋग्वेद के शान्ति-पाठों से सम्बद्ध है।
भद्रं कर्णेभिः कब जपा जाता है?
यह शास्त्र-अध्ययन, उपासना, यज्ञ एवं शुभ अवसरों के आरम्भ में शान्ति-आह्वान के रूप में जपा जाता है, जिससे सामंजस्यपूर्ण एवं पवित्र वातावरण बने। इसे सामूहिक रूप से, उपस्थित सबके कल्याण की प्रार्थना करते हुए, पढ़ा जाता है।
'मैं' के स्थान पर 'हम' एवं 'हमारा' शब्द क्यों प्रयुक्त होते हैं?
वैदिक शान्ति-मन्त्र केवल अपने नहीं, अपितु सबके कल्याण की प्रार्थनाएँ हैं। 'हम सुनें, हम देखें, हम भोगें' कहकर साधक समस्त समुदाय को सम्मिलित करता है, जो सार्वभौमिक कल्याण एवं साझा आध्यात्मिक आकांक्षा की वैदिक भावना को व्यक्त करता है।

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