Mantra.Tips

भू सूक्तम् PDF

भू सूक्तम् की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

ॐ भूमिर्भूम्ना द्यौर्वरिणान्तरिक्षं महित्वा। उपस्थे ते देव्यदिते॒ऽग्निमन्नमदेऽन्नाद्याय॥

Om Bhūmir bhūmnā dyaur variṇāntarikṣaṁ mahitvā Upasthe te devy adite 'gnim annam ade 'nnādyāya

भूमि अपनी विशालता से, द्युलोक अपने विस्तार से, अन्तरिक्ष अपनी महिमा से — हे देवि अदिति (असीम भूमाता)! आपकी गोद में मैं नित्य पोषण के लिए अग्नि और अन्न को स्थापित करता हूँ।

आशासानासोमनसो दिवं देवासो अग्निम्। यजन्त सुक्रतून्तरः॥

Āśāsānāso manaso divaṁ devāso agnim Yajanta sukratūn taraḥ

मन में स्वर्ग की कामना करते हुए देवों ने अग्नि का यजन किया और श्रेष्ठ, शीघ्र कर्म वाले यज्ञ किए।

भूमे मातर्निधेहि मा भद्रया सुप्रतिष्ठितम्। सह धीभिश्च देवि प्रजया सं रराणया॥

Bhūme mātar nidhehi mā bhadrayā supratiṣṭhitam Saha dhībhiś ca devi prajayā saṁ rarāṇayā

हे माता भूमि! मुझे मंगल के साथ भली प्रकार स्थिर करो — उत्तम बुद्धि और समृद्ध सन्तान के सहित, हे देवि, अनुग्रह प्रदान करती हुई।

मधु वाता ऋतायते मधु क्षरन्ति सिन्धवः। माध्वीर्नः सन्त्वोषधीः॥

Madhu vātā ṛtāyate madhu kṣaranti sindhavaḥ Mādhvīr naḥ santv oṣadhīḥ

ऋतधर्मी (सत्यनिष्ठ) के लिए वायु मधुर बहें, नदियाँ मधु बहाएँ, औषधियाँ हमारे लिए मधुमयी हों।

मधु नक्तमुतोषसो मधुमत्पार्थिवं रजः। मधु द्यौरस्तु नः पिता॥

Madhu naktam utoṣaso madhumat pārthivaṁ rajaḥ Madhu dyaur astu naḥ pitā

रात्रि और उषाएँ मधुर हों, पृथिवी की रज (मिट्टी) मधुमयी हो, हमारे पिता द्युलोक हमारे लिए मधुर हों।

मधुमान्नो वनस्पतिर्मधुमाँ अस्तु सूर्यः। माध्वीर्गावो भवन्तु नः॥

Madhumān no vanaspatir madhumāṁ astu sūryaḥ Mādhvīr gāvo bhavantu naḥ

वनस्पति हमारे लिए मधुमयी हो, सूर्य मधुमान् हो, और हमारी गौएँ मधुमयी (पोषणयुक्त) हों।

ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

Om Śāntiḥ Śāntiḥ Śāntiḥ