श्री दुर्गाष्टकम् PDF
श्री दुर्गाष्टकम् की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।
कात्यायनि महामाये खड्गबाणधनुर्धरि। खड्गधारिणि चण्डि दुर्गादेवि नमोऽस्तु ते॥१॥
katyayani mahamaye khadga-bana-dhanur-dhari | khadga-dharini chandi durga-devi namo'stu te ||1||
हे कात्यायनी, महामाये, खड्ग-बाण-धनुष धारण करने वाली, खड्गधारिणी चण्डी — हे देवि दुर्गे, आपको नमस्कार है!
वसुदेवसुते कालि वासुदेवसहोदरि। वसुन्धरे श्रिये दुर्गे दुर्गादेवि नमोऽस्तु ते॥२॥
vasudeva-sute kali vasudeva-sahodari | vasundhare shriye durge durga-devi namo'stu te ||2||
हे वसुदेव की पुत्री काली, वासुदेव (कृष्ण) की सहोदरी, हे वसुन्धरा और श्री-स्वरूपा दुर्गे — हे देवि दुर्गे, आपको नमस्कार है!
योगनिद्रे महानिद्रे योगमाये महेश्वरि। योगसिद्धिकरि शुद्धे दुर्गादेवि नमोऽस्तु ते॥३॥
yoga-nidre maha-nidre yoga-maye maheshwari | yoga-siddhi-kari shuddhe durga-devi namo'stu te ||3||
हे योगनिद्रा, हे महानिद्रा, हे योगमाया, महेश्वरी, योगसिद्धि देने वाली, शुद्धस्वरूपा — हे देवि दुर्गे, आपको नमस्कार है!
शङ्खचक्रगदापाणे शार्ङ्गाद्यायुधबाहवे। पीताम्बरधरे धन्ये दुर्गादेवि नमोऽस्तु ते॥४॥
shankha-chakra-gada-pane sharngadyayudha-bahave | pitambara-dhare dhanye durga-devi namo'stu te ||4||
हे शङ्ख, चक्र और गदा धारण करने वाली, शार्ङ्ग आदि आयुधों से युक्त बाहुओं वाली, पीताम्बरधारिणी, धन्ये — हे देवि दुर्गे, आपको नमस्कार है!
ऋग्यजुःसामाथर्वाणश्चतुःसामन्तलोकिनि। ब्रह्मस्वरूपिणि ब्राह्मि दुर्गादेवि नमोऽस्तु ते॥५॥
rig-yajuh-samatharvanash chatuh-samanta-lokini | brahma-svarupini brahmi durga-devi namo'stu te ||5||
हे ऋक्, यजुः, साम और अथर्व — चारों वेदस्वरूपा, सब लोकों में व्याप्त, ब्रह्मस्वरूपिणी ब्राह्मी — हे देवि दुर्गे, आपको नमस्कार है!
वृष्णीनां कुलसम्भूते विष्णुनाथसहोदरि। वृष्णिरूपधरे धन्ये दुर्गादेवि नमोऽस्तु ते॥६॥
vrishninam kula-sambhute vishnu-natha-sahodari | vrishni-rupa-dhare dhanye durga-devi namo'stu te ||6||
हे वृष्णिकुल में जन्म लेने वाली, विष्णुनाथ की सहोदरी, वृष्णिरूपधारिणी, धन्ये — हे देवि दुर्गे, आपको नमस्कार है!
सर्वज्ञे सर्वगे शर्वे सर्वेशे सर्वसाक्षिणि। सर्वामृतजटाभारे दुर्गादेवि नमोऽस्तु ते॥७॥
sarvajne sarvage sharve sarveshe sarva-sakshini | sarvamrita-jata-bhare durga-devi namo'stu te ||7||
हे सर्वज्ञे, सर्वव्यापिनी, शर्वे, सर्वेश्वरी, सब की साक्षिणी, समस्त अमृत से युक्त जटा धारण करने वाली — हे देवि दुर्गे, आपको नमस्कार है!
अष्टबाहु महासत्त्वे अष्टमीनवमीप्रिये। अट्टहासप्रिये भद्रे दुर्गादेवि नमोऽस्तु ते॥८॥
ashta-bahu mahasattve ashtami-navami-priye | attahasa-priye bhadre durga-devi namo'stu te ||8||
हे अष्टभुजा महासत्त्वा, अष्टमी-नवमी तिथि की प्रिया, अट्टहास में रमने वाली, भद्रे — हे देवि दुर्गे, आपको नमस्कार है!
दुर्गाष्टकमिदं पुण्यं भक्तितो यः पठेन्नरः। सर्वकाममवाप्नोति दुर्गालोकं स गच्छति॥
durgashtakam idam punyam bhaktito yah pathen narah | sarva-kamam avapnoti durga-lokam sa gacchati ||
जो मनुष्य भक्तिपूर्वक इस पवित्र दुर्गाष्टक का पाठ करता है, वह समस्त कामनाओं को प्राप्त करता है और दुर्गालोक को जाता है।