गौरीदशकम् Meaning — Line by Line
गौरीदशकम्
Every verse and every word explained in English & Hindi
Meaning — Line by Line
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- Verse 1. līlārabdhasthāpitaluptākhilalokāṃ
- Verse 2. pratyāhāradhyānasamādhisthitibhājāṃ
- Verse 3. candrāpīḍānanditamandasmitavaktrāṃ
- Verse 4. ādikṣāntāmakṣaramūrtyā vilasantīṃ
- Verse 5. mūlādhārādutthitarūpāṃ śaśināḍī-
- Verse 6. nityaḥ śuddho niṣkala eko jagadīśaḥ
- Verse 7. yasyāḥ kukṣau līnamakhaṇḍaṃ jagadaṇḍaṃ
- Verse 8. yasyāmotaṃ protamaśeṣaṃ maṇimālā-
- Verse 9. nānākāraiḥ śaktikadambairbhuvanāni
- Verse 10. āśāpāśakleśavināśaṃ vidadhānāṃ
- Verse 11. prātaḥkāle bhāvaviśuddhaḥ praṇidhānāt
līlārabdhasthāpitaluptākhilalokāṃ
लीलारब्धस्थापितलुप्ताखिललोकां लोकातीतैर्योगिभिरन्तश्चिरमृग्याम् । बालादित्यश्रेणिसमानद्युतिपुञ्जां गौरीमम्बामम्बुरुहाक्षीमहमीडे ॥ १॥
līlārabdhasthāpitaluptākhilalokāṃ lokātītairyogibhirantaściramṛgyām | bālādityaśreṇisamānadyutipuñjāṃ gaurīmambāmamburuhākṣīmahamīḍe || 1||
Meaning1. मैं उस कमलनयना माता गौरी की स्तुति करता हूँ, जो लीलामात्र से समस्त लोकों की सृष्टि, स्थिति और संहार करती हैं, जिन्हें लोकातीत योगी अपने अन्तःकरण में चिरकाल खोजते हैं, और जो उदित सूर्यों की पंक्ति-सी द्युतिपुंज हैं।
pratyāhāradhyānasamādhisthitibhājāṃ
प्रत्याहारध्यानसमाधिस्थितिभाजां नित्यं चित्ते निर्वृतिकाष्ठां कलयन्तीम् । सत्यज्ञानानन्दमयीं तां तनुरूपां गौरीमम्बामम्बुरुहाक्षीमहमीडे ॥ २॥
pratyāhāradhyānasamādhisthitibhājāṃ nityaṃ citte nirvṛtikāṣṭhāṃ kalayantīm | satyajñānānandamayīṃ tāṃ tanurūpāṃ gaurīmambāmamburuhākṣīmahamīḍe || 2||
Meaning2. मैं उस कमलनयना माता गौरी की स्तुति करता हूँ, जो प्रत्याहार-ध्यान-समाधि में स्थित साधकों के चित्त में नित्य परम निर्वृति (आनन्द) की काष्ठा हैं — जो सत्-चित्-आनन्दमयी होते हुए भी सुन्दर रूप धारण करती हैं।
candrāpīḍānanditamandasmitavaktrāṃ
चन्द्रापीडानन्दितमन्दस्मितवक्त्रां चन्द्रापीडालङ्कृतनीलालकभाराम् । इन्द्रोपेन्द्राद्यर्चितपादाम्बुरुहां तां गौरीमम्बामम्बुरुहाक्षीमहमीडे ॥ ३॥
candrāpīḍānanditamandasmitavaktrāṃ candrāpīḍālaṅkṛtanīlālakabhārām | indropendrādyarcitapādāmburuhāṃ tāṃ gaurīmambāmamburuhākṣīmahamīḍe || 3||
Meaning3. मैं उस कमलनयना माता गौरी की स्तुति करता हूँ, जिनका मुख मन्द मुस्कान से प्रफुल्ल और चन्द्र से अलंकृत है, जिनके नील केशपाश को चन्द्रकला सुशोभित करती है, और जिनके चरणकमल इन्द्र-उपेन्द्र आदि देवों से पूजित हैं।
ādikṣāntāmakṣaramūrtyā vilasantīṃ
आदिक्षान्तामक्षरमूर्त्या विलसन्तीं भूते भूते भूतकदम्बप्रसवित्रीम् । शब्दब्रह्मानन्दमयीं तां तटिदाभां गौरीमम्बामम्बुरुहाक्षीमहमीडे ॥ ४॥
ādikṣāntāmakṣaramūrtyā vilasantīṃ bhūte bhūte bhūtakadambaprasavitrīm | śabdabrahmānandamayīṃ tāṃ taṭidābhāṃ gaurīmambāmamburuhākṣīmahamīḍe || 4||
Meaning4. मैं उस कमलनयना माता गौरी की स्तुति करता हूँ, जो 'अ' से 'क्ष' तक समस्त अक्षरों के स्वरूप में विलसित हैं, जो प्रत्येक भूत में भूतसमूह की प्रसविता हैं, जो शब्दब्रह्म-आनन्दमयी एवं विद्युत्-सी प्रभावाली हैं।
mūlādhārādutthitarūpāṃ śaśināḍī-
मूलाधारादुत्थितरूपां शशिनाडी- मध्याकाशे शुद्धमरीचिं प्रकटन्तीम् । हस्ते मुद्रामक्षवलीं पुस्तकमम्बां गौरीमम्बामम्बुरुहाक्षीमहमीडे ॥ ५॥
mūlādhārādutthitarūpāṃ śaśināḍī- madhyākāśe śuddhamarīciṃ prakaṭantīm | haste mudrāmakṣavalīṃ pustakamambāṃ gaurīmambāmamburuhākṣīmahamīḍe || 5||
Meaning5. मैं उस कमलनयना माता गौरी की स्तुति करता हूँ, जिनका रूप मूलाधार से ऊर्ध्व उठता है, जो शशिनाडी (सुषुम्ना) के मध्याकाश में शुद्ध किरण रूप में प्रकट होती हैं, और जो हाथों में मुद्रा, अक्षमाला और पुस्तक धारण करती हैं।
nityaḥ śuddho niṣkala eko jagadīśaḥ
नित्यः शुद्धो निष्कल एको जगदीशः साक्षी यस्याः सर्गविधौ संहरणे च । विश्वत्राणक्रीडनलोलां शिवपत्नीं गौरीमम्बामम्बुरुहाक्षीमहमीडे ॥ ६॥
nityaḥ śuddho niṣkala eko jagadīśaḥ sākṣī yasyāḥ sargavidhau saṃharaṇe ca | viśvatrāṇakrīḍanalolāṃ śivapatnīṃ gaurīmambāmamburuhākṣīmahamīḍe || 6||
Meaning6. मैं उस कमलनयना माता गौरी की स्तुति करता हूँ, जो उस नित्य-शुद्ध-निष्कल-एक जगदीश्वर (शिव) की पत्नी हैं, जो उनकी सृष्टि-संहार की लीला में केवल साक्षी हैं — और जो विश्व के परित्राण की क्रीड़ा में लीन रहती हैं।
yasyāḥ kukṣau līnamakhaṇḍaṃ jagadaṇḍaṃ
यस्याः कुक्षौ लीनमखण्डं जगदण्डं भूयो भूयः प्रादुरभूदुत्थितमेव । पत्या सार्धं तां रजताद्रौ निवसन्तीं गौरीमम्बामम्बुरुहाक्षीमहमीडे ॥ ७॥
yasyāḥ kukṣau līnamakhaṇḍaṃ jagadaṇḍaṃ bhūyo bhūyaḥ prādurabhūdutthitameva | patyā sārdhaṃ tāṃ rajatādrau nivasantīṃ gaurīmambāmamburuhākṣīmahamīḍe || 7||
Meaning7. मैं उस कमलनयना माता गौरी की स्तुति करता हूँ, जिनके उदर में अखण्ड ब्रह्माण्ड लीन हो जाता है और बार-बार उससे पुनः प्रकट होता है — जो अपने पति के साथ रजताद्रि (कैलास) पर निवास करती हैं।
yasyāmotaṃ protamaśeṣaṃ maṇimālā-
यस्यामोतं प्रोतमशेषं मणिमाला- सूत्रे यद्वत्क्वापि चरं चाप्यचरं च । तां सर्वज्ञां सर्वगतां सत्यविरूपां गौरीमम्बामम्बुरुहाक्षीमहमीडे ॥ ८॥
yasyāmotaṃ protamaśeṣaṃ maṇimālā- sūtre yadvatkvāpi caraṃ cāpyacaraṃ ca | tāṃ sarvajñāṃ sarvagatāṃ satyavirūpāṃ gaurīmambāmamburuhākṣīmahamīḍe || 8||
Meaning8. मैं उस कमलनयना माता गौरी की स्तुति करता हूँ, जिनमें समस्त चर और अचर ओत-प्रोत हैं, जैसे एक सूत्र में मणिमाला पिरोई हो — जो सर्वज्ञा, सर्वव्यापिनी और सत्यस्वरूपा हैं।
nānākāraiḥ śaktikadambairbhuvanāni
नानाकारैः शक्तिकदम्बैर्भुवनानि व्याप्य स्वैरं क्रीडति यैषा स्वयमेका । कल्याणीं तां कल्पलतामानतिभाजां गौरीमम्बामम्बुरुहाक्षीमहमीडे ॥ ९॥
nānākāraiḥ śaktikadambairbhuvanāni vyāpya svairaṃ krīḍati yaiṣā svayamekā | kalyāṇīṃ tāṃ kalpalatāmānatibhājāṃ gaurīmambāmamburuhākṣīmahamīḍe || 9||
Meaning9. मैं उस कमलनयना माता गौरी की स्तुति करता हूँ, जो अकेली एवं एक होकर भी विविध शक्तिसमूहों द्वारा समस्त भुवनों में व्याप्त होकर स्वच्छन्द क्रीड़ा करती हैं — जो कल्याणी हैं और नमन करने वालों के लिए कल्पलता-सी हैं।
āśāpāśakleśavināśaṃ vidadhānāṃ
आशापाशक्लेशविनाशं विदधानां पादाम्भोजध्यानपराणां पुरुषाणाम् । ईशामीशार्धाङ्गहरां तामभिरामां गौरीमम्बामम्बुरुहाक्षीमहमीडे ॥ १०॥
āśāpāśakleśavināśaṃ vidadhānāṃ pādāmbhojadhyānaparāṇāṃ puruṣāṇām | īśāmīśārdhāṅgaharāṃ tāmabhirāmāṃ gaurīmambāmamburuhākṣīmahamīḍe || 10||
Meaning10. मैं उस सुन्दर कमलनयना माता गौरी की स्तुति करता हूँ, जो उनके चरणकमल के ध्यान में रत पुरुषों के आशा-पाश रूपी क्लेश का नाश करती हैं — जो ईश्वरी हैं और जो शिव के अर्धांग को धारण करती हैं (अर्धनारीश्वर रूप)।
prātaḥkāle bhāvaviśuddhaḥ praṇidhānāt
प्रातःकाले भावविशुद्धः प्रणिधानात् भक्त्या नित्यं जल्पति गौरीदशकं यः । वाचां सिद्धिं सम्पदमग्र्यां शिवभक्तिं तस्य प्रयच्छत्यचिरान्मातृसमेता ॥ ११॥
prātaḥkāle bhāvaviśuddhaḥ praṇidhānāt bhaktyā nityaṃ jalpati gaurīdaśakaṃ yaḥ | vācāṃ siddhiṃ sampadamagryāṃ śivabhaktiṃ tasya prayacchatyacirānmātṛsametā || 11||
Meaning11. जो शुद्ध भाव से प्रातःकाल नित्य भक्ति एवं प्रणिधान से इस गौरीदशक का पाठ करता है, उसे माता (स्वामी सहित) शीघ्र ही वाक्-सिद्धि, श्रेष्ठ सम्पत्ति और शिवभक्ति प्रदान करती हैं।
Word-by-Word Breakdown
Origin & History
Source: Devotional hymn attributed to Adi Shankaracharya (Shakta / Advaita tradition)
Author: Adi Shankaracharya
Period: c. 8th century CE (traditional attribution)
गौरीदशकम् आदि शंकराचार्य की देवी के उस दर्शन को प्रतिबिम्बित करता है जिसमें वे ब्रह्म को ही उसके गतिशील, सृजनशील पक्ष (शक्ति) के रूप में देखते हैं। अद्वैत निरपेक्ष की शिक्षा देते हुए भी शंकर ने दिव्य माता को अनेक स्तोत्र समर्पित किए; यहाँ वे गौरी की स्तुति उस कमलनयना माता के रूप में करते हैं जो एक साथ योगियों द्वारा खोजी जाने वाली परा सच्चिदानन्द हैं और शिव के साथ कैलास पर निवास करने वाली करुणामयी देवी भी। यह स्तोत्र अद्वैत तत्त्वज्ञान, कुण्डलिनी योग और कोमल भक्ति को एक साथ बुनता है।
Frequently Asked Questions
गौरीदशकम् की रचना किसने की?▼
'दशकम्' का क्या अर्थ है?▼
गौरीदशकम् की टेक क्या है?▼
गौरीदशकम् अपने पाठकर्ताओं को क्या वरदान देता है?▼
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