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गोवर्धनधरं वन्दे PDF

गोवर्धनधरं वन्दे की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

गोवर्धनधरं वन्दे गोपालं गोकुलोत्सवम्। गोविन्दं गोकुलानन्दं गोपिकाप्राणवल्लभम्॥

Govardhana-Dharam Vande Gopalam Gokulotsavam. Govindam Gokulanandam Gopika-Prana-Vallabham.

मैं गोवर्धन को धारण करने वाले गोपाल को प्रणाम करता हूँ — जो गोकुल के उत्सव हैं, गोविन्द हैं, गोकुल के आनन्द हैं, और गोपियों के प्राणों के प्रिय हैं। हे गोवर्धन, जो महामेरु के समान गोविन्द के कर पर धारण किए गए — आप सदा गोपों और उनके गोधन (गायों) के रक्षक बनिए।

गोवर्धनो महामेरुर्गोविन्देन धृतः करे। गोपानां गोधनानां च रक्षको भव शाश्वतम्॥

Govardhano Maha-Merur Govindena Dhritah Kare. Gopanam Go-Dhananam Cha Rakshako Bhava Shashvatam.