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हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता PDF

हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता । कहहिं सुनहिं बहुबिधि सब संता ॥ रामचन्द्र के चरित सुहाए । कलप कोटि लगि जाहिं न गाए ॥

Hari Ananta Hari Katha Ananta | Kahahin Sunahin Bahu-Bidhi Sab Santa || Ramachandra Ke Charita Suhae | Kalapa Koti Lagi Jahin Na Gae ||

हरि अनन्त हैं और हरि की कथाएँ भी अनन्त हैं; सब सन्त उन्हें अनेक प्रकार से कहते और सुनते हैं। श्रीरामचन्द्र के सुहावने (सुन्दर) चरित ऐसे हैं कि करोड़ों कल्पों तक गाने पर भी उनका अन्त नहीं आता।