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हिनस्ति दैत्यतेजांसि PDF

हिनस्ति दैत्यतेजांसि की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

हिनस्ति दैत्यतेजांसि स्वनेनापूर्य या जगत् । सा घण्टा पातु नो देवि पापेभ्यो नः सुतानिव ॥

hinasti daityatejāṃsi svanenāpūrya yā jagat sā ghaṇṭā pātu no devi pāpebhyo naḥ sutāniva

जो अपने नाद से जगत् को भरकर दैत्यों के तेज का नाश करता है, वह आपका घण्टा हमें पापों से वैसे ही बचाए, हे देवी! जैसे माता अपनी संतान की रक्षा करती है।

असुरासृग्वसापङ्कचर्चितस्ते करोज्ज्वलः । शुभाय खड्गो भवतु चण्डिके त्वां नता वयम् ॥

asurāsṛgvasāpaṅkacarcitaste karojjvalaḥ śubhāya khaḍgo bhavatu caṇḍike tvāṃ natā vayam

असुरों के रक्त और चर्बी के पंक से लिपा हुआ, आपके हाथ में उज्ज्वल वह खड्ग हमारे कल्याण के लिए हो, हे चण्डिके! हम आपको प्रणाम करते हैं।