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इन्द्रकृत लक्ष्मीस्तोत्रम् PDF

इन्द्रकृत लक्ष्मीस्तोत्रम् की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

ॐ नमः कमलवासिन्यै नारायण्यै नमो नमः। कृष्णप्रियायै सारायै पद्मायै च नमो नमः॥

Om Namah Kamala Vasinyai Narayanyai Namo Namah Krishnapriyayai Sarayai Padmayai Cha Namo Namah

ॐ, कमल पर निवास करने वाली नारायणी को बार-बार नमस्कार; कृष्णप्रिया, सारस्वरूपा, पद्मा को नमस्कार।

पद्मपत्रेक्षणायै च पद्मास्यायै नमो नमः। पद्मासनायै पद्मिन्यै वैष्णव्यै च नमो नमः॥

Padma Patrekshanayai Cha Padmasyayai Namo Namah Padmasanayai Padminyai Vaishnavyai Cha Namo Namah

कमल-नयना, कमल-मुखी, कमलासना, पद्मिनी, वैष्णवी को बार-बार नमस्कार।

सर्वसम्पत्स्वरूपायै सर्वदात्र्यै नमो नमः। सुखदायै मोक्षदायै सिद्धिदायै नमो नमः॥

Sarva Sampat Svarupayai Sarvadatryai Namo Namah Sukhadayai Mokshadayai Siddhidayai Namo Namah

समस्त सम्पत्ति की स्वरूपा, सबको देने वाली; सुख, मोक्ष और सिद्धि देने वाली को नमस्कार।

हरिभक्तिप्रदात्र्यै च हर्षदात्र्यै नमो नमः। कृष्णवक्षस्थितायै च कृष्णेशायै नमो नमः॥

Haribhakti Pradatryai Cha Harshadatryai Namo Namah Krishna Vakshasthitayai Cha Krishneshayai Namo Namah

हरि की भक्ति और हर्ष देने वाली; कृष्ण के वक्ष पर स्थित, कृष्ण की ईश्वरी को नमस्कार।

कृष्णशोभास्वरूपायै रत्नाढ्यायै नमो नमः। सम्पत्त्यधिष्ठातृदेव्यै महादेव्यै नमो नमः॥

Krishna Shobha Svarupayai Ratnadhyayai Namo Namah Sampatti Adhishthatru Devyai Mahadevyai Namo Namah

कृष्ण की शोभास्वरूपा, रत्नों से सम्पन्न; सम्पत्ति की अधिष्ठात्री देवी, महादेवी को नमस्कार।

सस्याधिष्ठातृदेव्यै च सस्यलक्ष्म्यै नमो नमः। नमो बुद्धिस्वरूपायै बुद्धिदायै नमो नमः॥

Sasya Adhishthatru Devyai Cha Sasya Lakshmyai Namo Namah Namo Buddhi Svarupayai Buddhidayai Namo Namah

सस्य (अन्न) की अधिष्ठात्री देवी, सस्यलक्ष्मी; बुद्धिस्वरूपा, बुद्धि देने वाली को नमस्कार।

वैकुण्ठे च महालक्ष्मीर्लक्ष्मीः क्षीरोदसागरे। स्वर्गलक्ष्मीरिन्द्रगेहे राजलक्ष्मीर्नृपालये॥

Vaikunthe Cha Mahalakshmir Lakshmih Kshiroda Sagare Svarga Lakshmir Indra Gehe Raja Lakshmir Nripalaye

वैकुण्ठ में आप महालक्ष्मी हैं, क्षीरसागर में लक्ष्मी; इन्द्र के भवन में स्वर्गलक्ष्मी, राजा के महल में राजलक्ष्मी।

गृहलक्ष्मीश्च गृहिणां गेहे च गृहदेवता। सुरभिस्सा गवां माता दक्षिणा यज्ञकामिनी॥

Griha Lakshmish Cha Grihinam Gehe Cha Griha Devata Surabhih Sa Gavam Mata Dakshina Yajna Kamini

गृहस्थों के घर में गृहलक्ष्मी और गृहदेवता; गौओं की माता सुरभि, और यज्ञ की दक्षिणा।

अदितिर्देवमाता त्वं कमला कमलालये। स्वाहा त्वं च हविर्दाने कव्यदाने स्वधा स्मृता॥

Aditir Deva Mata Tvam Kamala Kamalalaye Svaha Tvam Cha Havirdane Kavyadane Svadha Smrita

आप देवों की माता अदिति हैं, कमलालय में कमला; हविर्दान में स्वाहा और कव्यदान में स्वधा कही जाती हैं।

त्वं हि विष्णुस्वरूपा च सर्वाधारा वसुन्धरा। शुद्धसत्त्वस्वरूपा त्वं नारायणपरायणा॥

Tvam Hi Vishnu Svarupa Cha Sarvadhara Vasundhara Shuddha Sattva Svarupa Tvam Narayana Parayana

आप ही विष्णुस्वरूपा, सर्वाधार वसुन्धरा; शुद्धसत्त्वस्वरूपा, नारायण में परायण हैं।

क्रोधहिंसावर्जिता च वरदा च शुभानना। परमार्थप्रदा त्वं च हरिदास्यप्रदा परा॥

Krodha Himsa Varjita Cha Varada Cha Shubhanana Paramartha Prada Tvam Cha Haridasya Prada Para

क्रोध और हिंसा से रहित, वरदायिनी, शुभानना; परमार्थ देने वाली और हरि की सेवा देने वाली परा।

यया विना जगत्सर्वं भस्मीभूतमसारकम्। जीवन्मृतं च विश्वं च शवतुल्यं यया विना॥

Yaya Vina Jagat Sarvam Bhasmibhutam Asarakam Jivanmritam Cha Vishvam Cha Shava Tulyam Yaya Vina

जिसके बिना समस्त जगत् भस्मीभूत और सारहीन हो जाता है; जिसके बिना विश्व जीवित होकर भी मृत, शव-तुल्य है।

सर्वेषां च परा त्वं हि सर्वबान्धवरूपिणी। यया विना न सम्भाष्यो बान्धवैर्बान्धवः सदा॥

Sarvesham Cha Para Tvam Hi Sarva Bandhava Rupini Yaya Vina Na Sambhashyo Bandhavair Bandhavah Sada

आप सबसे परा और समस्त बन्धुत्व की स्वरूपा हैं; जिसके बिना बन्धु से बन्धु का सम्भाषण भी नहीं होता।

त्वया हीनो बन्धुहीनस्त्वया युक्तः सबान्धवः। धर्मार्थकाममोक्षाणां त्वं च कारणरूपिणी॥

Tvaya Hino Bandhuhinas Tvaya Yuktah Sabandhavah Dharma Artha Kama Mokshanam Tvam Cha Karana Rupini

आपसे रहित मनुष्य बन्धुहीन है, आपसे युक्त सबन्धु; आप ही धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की कारणरूपिणी हैं।

स्तनन्धयानां त्वं माता शिशूनां शैशवे यथा। तथा त्वं सर्वदा माता सर्वेषां सर्वविश्वतः॥

Stanandhayanam Tvam Mata Shishunam Shaishave Yatha Tatha Tvam Sarvada Mata Sarvesham Sarva Vishvatah

जैसे शैशव में स्तनपान करते शिशुओं की माता होती है, वैसे ही आप समस्त विश्व में सबकी सदा माता हैं।

त्यक्तस्तनो मातृहीनः स चेज्जीवति दैवतः। त्वया हीनो जनः कोऽपि न जीवत्येव निश्चितम्॥

Tyakta Stano Matruhinah Sa Chej Jivati Daivatah Tvaya Hino Janah Kopi Na Jivatyeva Nishchitam

मातृहीन, स्तनहीन शिशु भी दैववश जीवित रह सकता है, परन्तु आपसे रहित कोई भी जन निश्चय ही जीवित नहीं रहता।

सुप्रसन्नस्वरूपा त्वं मे प्रसन्ना भवाम्बिके। वैरिग्रहस्तद्विषयं देहि मह्यं सनातनि॥

Suprasanna Svarupa Tvam Me Prasanna Bhava Ambike Vairigrahas Tad Vishayam Dehi Mahyam Sanatani

आप सुप्रसन्न स्वरूपा हैं; हे माता, मुझ पर प्रसन्न हों। हे सनातनी, शत्रुओं के अधीन गई वह सम्पदा मुझे लौटा दें।

वयं यावत्त्वया हीना बन्धुहीनाश्च भिक्षुकाः। सर्वसम्पद्विहीनाश्च तावदेव हरिप्रिये॥

Vayam Yavat Tvaya Hina Bandhuhinash Cha Bhikshukah Sarva Sampad Vihinash Cha Tavadeva Haripriye

जब तक हम आपसे रहित हैं, तब तक बन्धुहीन, भिक्षुक और समस्त सम्पत्ति से रहित हैं, हे हरिप्रिये।

राज्यं देहि श्रियं देहि बलं देहि सुरेश्वरि। कीर्तिं देहि धनं देहि पुत्रान्मह्यं च देहि वै॥

Rajyam Dehi Shriyam Dehi Balam Dehi Sureshvari Kirtim Dehi Dhanam Dehi Putran Mahyam Cha Dehi Vai

हे सुरेश्वरी! मुझे राज्य दें, श्री दें, बल दें; कीर्ति दें, धन दें और पुत्र दें।

कामं देहि मतिं देहि भोगान्देहि हरिप्रिये। ज्ञानं देहि च धर्मं च सर्वसौभाग्यमीप्सितम्॥

Kamam Dehi Matim Dehi Bhogan Dehi Haripriye Jnanam Dehi Cha Dharmam Cha Sarva Saubhagyam Ipsitam

हे हरिप्रिये! मुझे काम, मति और भोग दें; ज्ञान, धर्म और समस्त वांछित सौभाग्य दें।

सर्वाधिकारमेवं वै प्रभावं च प्रतापकम्। जयं पराक्रमं युद्धे परमैश्वर्यमेव च॥

Sarva Adhikaram Evam Vai Prabhavam Cha Pratapakam Jayam Parakramam Yuddhe Paramaishvaryam Eva Cha

इसी प्रकार मुझे समस्त अधिकार, प्रभाव और प्रताप; युद्ध में जय, पराक्रम और परम ऐश्वर्य दें।