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काकः कृष्णः पिकः कृष्णः PDF

काकः कृष्णः पिकः कृष्णः की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

काकः कृष्णः पिकः कृष्णः को भेदः पिककाकयोः। वसन्तकाले सम्प्राप्ते काकः काकः पिकः पिकः॥

kākaḥ kṛṣṇaḥ pikaḥ kṛṣṇaḥ ko bhedaḥ pika-kākayoḥ। vasanta-kāle samprāpte kākaḥ kākaḥ pikaḥ pikaḥ॥

कौआ काला है, कोयल भी काली है — फिर कोयल और कौए में क्या अन्तर है? परन्तु जब वसन्त ऋतु आती है, तब कौआ कौआ ही सिद्ध होता है और कोयल कोयल। बाहर से सज्जन और निकृष्ट एक से दिख सकते हैं, किन्तु समय आने पर अपनी वाणी और आचरण से उनका वास्तविक स्वभाव प्रकट हो जाता है।