Mantra.Tips

ककाररूपा कल्याणी (ललिता त्रिशती आरम्भ) PDF

ककाररूपा कल्याणी (ललिता त्रिशती आरम्भ) की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

ककाररूपा कल्याणी कल्याणगुणशालिनी । कल्याणशैलनिलया कमनीया कलावती ॥

Kakārarūpā kalyāṇī kalyāṇaguṇaśālinī | Kalyāṇaśailanilayā kamanīyā kalāvatī ||

वह 'क' अक्षर का साक्षात् स्वरूप हैं; कल्याणी हैं, समस्त कल्याणकारी गुणों से सुशोभित; जो कल्याण-पर्वत (श्रीनगर) पर निवास करती हैं, परम कमनीया, समस्त कलाओं से युक्त हैं।

कमलाक्षी कल्मषघ्नी करुणामृतसागरा । कदम्बकाननावासा कदम्बकुसुमप्रिया ॥

Kamalākṣī kalmaṣaghnī karuṇāmṛtasāgarā | Kadambakānanāvāsā kadambakusumapriyā ||

वे कमलनयना हैं, समस्त पापों की नाशिनी, करुणा-अमृत की सागर; जो कदम्ब-वन में निवास करती हैं और कदम्ब-पुष्पों को प्रिय मानती हैं।

कन्दर्पविद्या कन्दर्पजनकापाङ्गवीक्षणा । कर्पूरवीटीसौरभ्यकल्लोलितककुप्तटा ॥

Kandarpavidyā kandarpajanakāpāṅgavīkṣaṇā | Karpūravīṭīsaurabhyakallolitakakuptaṭā ||

वे कन्दर्प (काम) की गुप्त विद्या (कामकला) हैं; जिनके कटाक्ष से स्वयं कामदेव का जन्म होता है; और जिनके कर्पूर-सुगन्धित ताम्बूल की सुगन्ध से दिशाओं के तट तरंगित हो उठते हैं।