Mantra.Tips

कराविन्देन (बालमुकुन्द ध्यान) PDF

कराविन्देन (बालमुकुन्द ध्यान) की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

कराविन्देन पादारविन्दं मुखारविन्दे विनिवेशयन्तम्। वटस्य पत्रस्य पुटे शयानं बालं मुकुन्दं मनसा स्मरामि॥

Kararavindena padaravindam, Mukharavinde vinivesayantam, Vatasya patrasya pute sayanam, Balam mukundam manasa smarami.

मैं अपने मन में उस बाल-मुकुन्द का स्मरण करता हूँ, जो वट के पत्ते के दोने पर लेटे हुए, अपने कमल-जैसे हाथ से अपने कमल-जैसे चरण (अँगूठे) को अपने कमल-मुख में रख रहे हैं।