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कार्तिकेय अष्टकम् — Complete Lyrics

कार्तिकेय अष्टकम्

Sanskrit text with English transliteration and translation

Verse 1
नमोऽस्तु वृन्दारकवृन्दवन्द्यपादारविन्दाय सुधाकराय। षडाननायामितविक्रमाय गौरीहृदानन्दसमुद्भवाय॥ १॥
namo'stu vṛndārakavṛndavandyapādāravindāya sudhākarāya। ṣaḍānanāyāmitavikramāya gaurīhṛdānandasamudbhavāya॥ 1॥
उन्हें नमस्कार जिनके चरण-कमल देवताओं के समूह से वन्दित हैं, जो चन्द्रमा के समान शीतल एवं अनुग्रहकारी हैं, जो षण्मुख एवं अमित पराक्रमी हैं, जो गौरी (पार्वती) के हृदय के आनन्द रूप में प्रकट हुए।
Verse 2
नमोऽस्तु तुभ्यं प्रणतार्तिहन्त्रे कर्त्रे समस्तस्य मनोरथानाम्। दात्रे रथानां परतारकस्य हन्त्रे प्रचण्डासुरतारकस्य॥ २॥
namo'stu tubhyaṃ praṇatārtihantre kartre samastasya manorathānām। dātre rathānāṃ paratārakasya hantre pracaṇḍāsuratārakasya॥ 2॥
आपको नमस्कार, जो प्रणत जनों के दुःख को हरने वाले, सबके मनोरथों को पूर्ण करने वाले, रथ-युद्ध में विजय देने वाले, तथा प्रचण्ड तारकासुर का नाश करने वाले हैं।
Verse 3
अमूर्तमूर्ताय सहस्रमूर्तये गुणाय गण्याय परात्पराय। अपारपाराय परापराय नमोऽस्तु तुभ्यं शिखिवाहनाय॥ ३॥
amūrtamūrtāya sahasramūrtaye guṇāya gaṇyāya parātparāya। apārapārāya parāparāya namo'stu tubhyaṃ śikhivāhanāya॥ 3॥
उन्हें नमस्कार जो अमूर्त भी हैं और मूर्त भी, सहस्रों रूप वाले, गुणस्वरूप, अगण्य, परात्पर, अपार के पार, पर एवं अपर से परे हैं — आपको नमस्कार, हे मयूरवाहन।
Verse 4
नमोऽस्तु ते ब्रह्मविदां वराय दिगम्बरायाम्बरसंस्थिताय। हिरण्यवर्णाय हिरण्यबाहवे नमो हिरण्याय हिरण्यरेतसे॥ ४॥
namo'stu te brahmavidāṃ varāya digambarāyāmbarasaṃsthitāya। hiraṇyavarṇāya hiraṇyabāhave namo hiraṇyāya hiraṇyaretase॥ 4॥
आपको नमस्कार, ब्रह्मवेत्ताओं में श्रेष्ठ, दिगम्बर होकर भी अम्बर (आकाश) में स्थित, स्वर्णवर्ण, स्वर्णबाहु; स्वर्णस्वरूप एवं स्वर्णरेता (अग्नि की स्वर्णिम तेजस् से उत्पन्न) को नमस्कार।
Verse 5
तपःस्वरूपाय तपोधनाय तपःफलानां प्रतिपादकाय। सदा कुमाराय हि मारमारिणे तृणीकृतैश्वर्यविरागिणे नमः॥ ५॥
tapaḥsvarūpāya tapodhanāya tapaḥphalānāṃ pratipādakāya। sadā kumārāya hi māramāriṇe tṛṇīkṛtaiśvaryavirāgiṇe namaḥ॥ 5॥
जो तपःस्वरूप, तपोधन, समस्त तपों के फल प्रदान करने वाले, नित्य कुमार, मार (काम) के दर्प का नाश करने वाले, ऐश्वर्य को तृणवत् मानने वाले विरागी हैं — उन्हें नमस्कार।
Verse 6
नमोऽस्तु तुभ्यं शरजन्मने विभो प्रभातसूर्यारुणदन्तपङ्क्तये। बालाय चाबालपराक्रमाय षाण्मातुरायालमनातुराय॥ ६॥
namo'stu tubhyaṃ śarajanmane vibho prabhātasūryāruṇadantapaṅktaye। bālāya cābālaparākramāya ṣāṇmāturāyālamanāturāya॥ 6॥
आपको नमस्कार, हे विभो, शर (सरकण्डों) में जन्म लेने वाले, जिनकी दन्तपंक्ति प्रातःकालीन सूर्य की भाँति अरुण है; जो बालक होकर भी अबाल (महान्) पराक्रमी, षण्मातुर (छह माताओं के पुत्र) एवं सर्वथा निराकुल हैं।
Verse 7
मीढुष्टमायोत्तरमीढुषे नमो नमो गणानां पतये गणाय। नमोऽस्तु ते जन्मजरातिगाय नमो विशाखाय सुशक्तिपाणये॥ ७॥
mīḍhuṣṭamāyottaramīḍhuṣe namo namo gaṇānāṃ pataye gaṇāya। namo'stu te janmajarātigāya namo viśākhāya suśaktipāṇaye॥ 7॥
अत्यन्त उदार से भी अधिक दानशील को नमस्कार; गणों के पति एवं स्वयं गणस्वरूप को बार-बार नमस्कार; जन्म एवं जरा से परे आपको नमस्कार; मंगलमयी शक्ति (वेल) धारण करने वाले विशाख को नमस्कार।
Verse 8
सर्वस्य नाथस्य कुमारकाय क्रौञ्चारये तारकमारकाय। स्वाहेय गाङ्गेय कार्तिकेय शैवेय तुभ्यं सततं नमोऽस्तु॥ ८॥
sarvasya nāthasya kumārakāya krauñcāraye tārakamārakāya। svāheya gāṅgeya ca kārtikeya śaiveya tubhyaṃ satataṃ namo'stu॥ 8॥
सर्वनाथ (शिव) के कुमार, क्रौञ्च के शत्रु, तारक के नाशक — हे स्वाहापुत्र, हे गंगापुत्र, हे कार्तिकेय, हे शिवपुत्र — आपको सदा नमस्कार हो।
Verse 9
इति स्कान्दे काशीखण्डतः श्रीकार्तिकेयाष्टकं सम्पूर्णम्॥
iti skānde kāśīkhaṇḍataḥ śrīkārtikeyāṣṭakaṃ sampūrṇam॥
इस प्रकार स्कन्द पुराण के काशीखण्ड से श्रीकार्तिकेय अष्टकम् सम्पूर्ण हुआ।

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