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कस्त्वं कोऽहं कुत आयातः PDF

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कस्त्वं कोऽहं कुत आयातः का मे जननी को मे तातः । इति परिभावय सर्वमसारं विश्वं त्यक्त्वा स्वप्नविचारम् ॥

Kastvam koham kuta ayatah ka me janani ko me tatah Iti paribhavaya sarvamasaram vishvam tyaktva svapnavicharam

तू कौन है? मैं कौन हूँ? कहाँ से आया हूँ? मेरी माता कौन, पिता कौन? इस प्रकार गहराई से विचार कर, और इस समस्त संसार को स्वप्न-सा असार जानकर त्याग दे।