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लक्ष्मीं क्षीरसमुद्रराजतनयाम् (महालक्ष्मी ध्यान) — Complete Lyrics

लक्ष्मीं क्षीरसमुद्रराजतनयाम् (महालक्ष्मी ध्यान)

Sanskrit text with English transliteration and translation

लक्ष्मीं क्षीरसमुद्रराजतनयां श्रीरङ्गधामेश्वरीं दासीभूतसमस्तदेववनितां लोकैकदीपाङ्कुराम्। श्रीमन्मन्दकटाक्षलब्धविभवब्रह्मेन्द्रगङ्गाधरां त्वां त्रैलोक्यकुटुम्बिनीं सरसिजां वन्दे मुकुन्दप्रियाम्॥
lakṣmīṃ kṣīra-samudra-rāja-tanayāṃ śrī-raṅga-dhāmeśvarīṃ dāsī-bhūta-samasta-deva-vanitāṃ lokaika-dīpāṅkurām | śrīman-manda-kaṭākṣa-labdha-vibhava-brahmendra-gaṅgādharāṃ tvāṃ trailokya-kuṭumbinīṃ sarasijāṃ vande mukunda-priyām ||
मैं लक्ष्मी की वन्दना करता हूँ — जो क्षीरसागर के राजा की पुत्री हैं, श्रीरंग धाम की ईश्वरी; जिनकी समस्त देव-पत्नियाँ दासी होकर सेवा करती हैं, जो समस्त लोकों को प्रकाशित करने वाली एकमात्र दीप-शिखा हैं; जिनके श्रीयुक्त मन्द कटाक्ष से ब्रह्मा, इन्द्र और गंगाधर (शिव) वैभव प्राप्त करते हैं; जो तीनों लोकों को अपना कुटुम्ब मानने वाली, कमल में जन्मी, मुकुन्द (विष्णु) की प्रिया हैं।

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