Mantra.Tips

लोकाभिरामं रणरङ्गधीरम् PDF

लोकाभिरामं रणरङ्गधीरम् की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

लोकाभिरामं रणरङ्गधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्। कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये॥

Lokabhiramam rana-ranga-dhiram, Rajiva-netram raghuvamsha-natham, Karunya-rupam karunakaram tam, Sri-Ramachandram sharanam prapadye.

मैं श्रीरामचन्द्र की शरण लेता हूँ — जो समस्त लोकों के मनोहर हैं, रणभूमि में अविचल धीर हैं, कमल के समान नेत्रों वाले रघुवंश के नाथ हैं, करुणा के मूर्तरूप और करुणा के अनन्त आगार हैं।