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महामृत्युंजय स्तोत्रम् PDF

महामृत्युंजय स्तोत्रम् की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

रुद्रं पशुपतिं स्थाणुं नीलकण्ठमुमापतिम्। नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्युः करिष्यति॥१॥

Rudram Pashupatim Sthanum Nilakantham Umapatim। Namami Shirasa Devam Kim No Mrityuh Karishyati॥1॥

मैं उस देव को सिर झुकाकर प्रणाम करता हूँ — रुद्र, पशुपति, स्थाणु, नीलकण्ठ, उमापति को। फिर मृत्यु मेरा क्या कर सकती है?

नीलकण्ठं कालमूर्तिं कालज्ञं कालनाशनम्। नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्युः करिष्यति॥२॥

Nilakantham Kalamurtim Kalajnam Kalanashanam। Namami Shirasa Devam Kim No Mrityuh Karishyati॥2॥

मैं उस देव को सिर झुकाकर प्रणाम करता हूँ — नीलकण्ठ, कालमूर्ति, कालज्ञ, कालनाशक को। फिर मृत्यु मेरा क्या कर सकती है?

नीलकण्ठं विरूपाक्षं निर्मलं निलयप्रदम्। नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्युः करिष्यति॥३॥

Nilakantham Virupaksham Nirmalam Nilayapradam। Namami Shirasa Devam Kim No Mrityuh Karishyati॥3॥

मैं उस देव को सिर झुकाकर प्रणाम करता हूँ — नीलकण्ठ, विरूपाक्ष, निर्मल, निलयप्रद को। फिर मृत्यु मेरा क्या कर सकती है?

वामदेवं महादेवं लोकनाथं जगद्गुरुम्। नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्युः करिष्यति॥४॥

Vamadevam Mahadevam Lokanatham Jagadgurum। Namami Shirasa Devam Kim No Mrityuh Karishyati॥4॥

मैं उस देव को सिर झुकाकर प्रणाम करता हूँ — वामदेव, महादेव, लोकनाथ, जगद्गुरु को। फिर मृत्यु मेरा क्या कर सकती है?

देवदेवं जगन्नाथं देवेशं वृषभध्वजम्। नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्युः करिष्यति॥५॥

Devadevam Jagannatham Devesham Vrishabhadhvajam। Namami Shirasa Devam Kim No Mrityuh Karishyati॥5॥

मैं उस देव को सिर झुकाकर प्रणाम करता हूँ — देवदेव, जगन्नाथ, देवेश, वृषभध्वज को। फिर मृत्यु मेरा क्या कर सकती है?

गंगाधरं महादेवं सर्पाभरणभूषितम्। नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्युः करिष्यति॥६॥

Gangadharam Mahadevam Sarpabharana-Bhushitam। Namami Shirasa Devam Kim No Mrityuh Karishyati॥6॥

मैं उस देव को सिर झुकाकर प्रणाम करता हूँ — गंगाधर, महादेव, सर्पों के आभूषण से सुशोभित को। फिर मृत्यु मेरा क्या कर सकती है?

त्र्यक्षं चतुर्भुजं शान्तं जटामुकुटधारिणम्। नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्युः करिष्यति॥७॥

Tryaksham Chaturbhujam Shantam Jata-Mukuta-Dharinam। Namami Shirasa Devam Kim No Mrityuh Karishyati॥7॥

मैं उस देव को सिर झुकाकर प्रणाम करता हूँ — त्रिनेत्र, चतुर्भुज, शान्त, जटामुकुटधारी को। फिर मृत्यु मेरा क्या कर सकती है?

भस्मोद्धूलितसर्वाङ्गं नागाभरणभूषितम्। नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्युः करिष्यति॥८॥

Bhasmoddhulita-Sarvangam Nagabharana-Bhushitam। Namami Shirasa Devam Kim No Mrityuh Karishyati॥8॥

मैं उस देव को सिर झुकाकर प्रणाम करता हूँ — जिनके सर्वांग भस्म से धूलित हैं, नागों के आभूषण से सुशोभित को। फिर मृत्यु मेरा क्या कर सकती है?

अनन्तमव्ययं शान्तमक्षमालाधरं हरम्। नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्युः करिष्यति॥९॥

Anantam-Avyayam Shantam-Akshamala-Dharam Haram। Namami Shirasa Devam Kim No Mrityuh Karishyati॥9॥

मैं उस देव को सिर झुकाकर प्रणाम करता हूँ — अनन्त, अव्यय, शान्त, अक्षमालाधारी हर को। फिर मृत्यु मेरा क्या कर सकती है?

आनन्दं परमं नित्यं कैवल्यपददायिनम्। नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्युः करिष्यति॥१०॥

Anandam Paramam Nityam Kaivalya-Pada-Dayinam। Namami Shirasa Devam Kim No Mrityuh Karishyati॥10॥

मैं उस देव को सिर झुकाकर प्रणाम करता हूँ — परम नित्य आनन्द, कैवल्यपद देने वाले को। फिर मृत्यु मेरा क्या कर सकती है?

स्वर्गापवर्गदातारं सृष्टिस्थित्यन्तकारिणम्। नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्युः करिष्यति॥११॥

Svargapavarga-Dataram Srishti-Sthity-Anta-Karinam। Namami Shirasa Devam Kim No Mrityuh Karishyati॥11॥

मैं उस देव को सिर झुकाकर प्रणाम करता हूँ — स्वर्ग और अपवर्ग दोनों के दाता, सृष्टि-स्थिति-संहार के कर्ता को। फिर मृत्यु मेरा क्या कर सकती है?

कल्पायुर्देहि मे पुण्यं यावदायुररोगताम्। नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्युः करिष्यति॥१२॥

Kalpayur-Dehi Me Punyam Yavad-Ayur-Arogatam। Namami Shirasa Devam Kim No Mrityuh Karishyati॥12॥

हे प्रभु, मुझे कल्प के समान दीर्घ आयु, पुण्य और जीवनपर्यन्त आरोग्य प्रदान करें — मैं उस देव को सिर झुकाकर प्रणाम करता हूँ। फिर मृत्यु मेरा क्या कर सकती है?