Mantra.Tips

महाविद्या महामाया स्तुति PDF

महाविद्या महामाया स्तुति की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

तथा संहृतिरूपान्ते जगतोऽस्य जगन्मये । महाविद्या महामाया महामेधा महास्मृतिः ॥

tathā saṃhṛtirūpānte jagato'sya jaganmaye mahāvidyā mahāmāyā mahāmedhā mahāsmṛtiḥ

और जगत् के अंत में आप संहाररूपा होती हैं, हे जगन्मयी! आप महाविद्या, महामाया, महामेधा और महास्मृति हैं; आप महामोह, महादेवी और महेश्वरी भी हैं। आप सबकी प्रकृति हैं और तीनों गुणों को प्रकट करने वाली हैं।

महामोहा च भवती महादेवी महेश्वरी । प्रकृतिस्त्वं च सर्वस्य गुणत्रयविभाविनी ॥

mahāmohā ca bhavatī mahādevī maheśvarī prakṛtistvaṃ ca sarvasya guṇatrayavibhāvinī