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मंगल भवन अमंगल हारी PDF

मंगल भवन अमंगल हारी की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवउ सो दसरथ अजिर बिहारी॥

maṅgala bhavana amaṅgala hārī dravau so dasaratha ajira bihārī

जो समस्त मंगलों के धाम और सब अमंगलों को हरने वाले हैं, तथा राजा दशरथ के आँगन में (बालरूप से) क्रीड़ा करते हैं, वे ही प्रभु (श्रीराम) करुणा से द्रवित होकर मुझ पर कृपा करें।