मरणान्तानि वैराणि — Complete Lyrics
मरणान्तानि वैराणि
Sanskrit text with English transliteration and translation
मरणान्तानि वैराणि निर्वृत्तं नः प्रयोजनम्।
क्रियतामस्य संस्कारो ममाप्येष यथा तव॥
maraṇāntāni vairāṇi nirvṛttaṁ naḥ prayojanam।
kriyatām asya saṁskāro mamāpy eṣa yathā tava॥
वैर-भाव मृत्यु तक ही रहते हैं; उसकी मृत्यु से हमारा प्रयोजन पूर्ण हो चुका है। अब इसका अन्तिम संस्कार किया जाए — क्योंकि जैसे यह तुम्हारा है, वैसे ही यह मेरा भी है। ये श्रीराम के वे वचन हैं जो उन्होंने रावण के गिर जाने पर विभीषण से कहे, कि शत्रु का भी विधिपूर्वक अन्तिम संस्कार किया जाए।
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