Mantra.Tips

मार्गबन्धु स्तोत्रम् PDF

मार्गबन्धु स्तोत्रम् की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।

शम्भो महादेव देव शिव शम्भो महादेव देवेश शम्भो। शम्भो महादेव देव॥

Shambho Mahadeva Deva Shiva Shambho Mahadeva Devesha Shambho Shambho Mahadeva Deva

हे शम्भो, महादेव, देव शिव! हे शम्भो, महादेव, देवेश शम्भो! हे शम्भो, महादेव, देव!

फालावनम्रं फणिकुण्डलं वा नागेन्द्रहारं मृगराजहारम्। चन्द्रार्धचूडं अमृतस्वरूपं मार्गसहायं मम देव देव॥

Phalavanamram Phani-kundalam Va Nagendra-haram Mrigaraja-haram Chandrardha-choodam Amrita-svaroopam Marga-sahayam Mama Deva Deva

जो कृपा से नम्र हैं, जो सर्पों के कुण्डल, नागराज तथा मृगराज (सिंह) के चर्म की माला धारण करते हैं, जो मस्तक पर अर्धचन्द्र धारण करते हैं, जिनका स्वरूप अमृतमय है — हे मेरे देवों के देव, मेरी यात्रा के सहायक बनो।

अङ्गे विराजद्भुजगेन्द्रहारं अब्जे विराजत्करुणाकटाक्षम्। गङ्गाधरं चन्द्रकलावतंसं मार्गसहायं मम देव देव॥

Ange Virajad-bhujagendra-haram Abje Virajat-karunaa-kataksham Gangadharam Chandra-kalaa-vatamsam Marga-sahayam Mama Deva Deva

जिनके अंग पर नागेन्द्र की माला सुशोभित है, जिनके कमलनेत्रों में करुणा का कटाक्ष विराजमान है, जो गंगाधर हैं और चन्द्रकला को आभूषण रूप में धारण करते हैं — हे मेरे देवों के देव, मेरी यात्रा के सहायक बनो।

नित्यं चिदानन्दमयं महेशं नित्यं गुणातीतमपारमेयम्। नित्यं प्रपन्नार्तिहरं नतोऽहं मार्गसहायं मम देव देव॥

Nityam Chid-ananda-mayam Mahesham Nityam Gunaateetam-aprameyam Nityam Prapannarti-haram Natoham Marga-sahayam Mama Deva Deva

जो नित्य चिदानन्दमय महेश हैं, जो नित्य गुणातीत और अपरिमेय हैं, जो शरणागतों की पीड़ा हरने वाले हैं — उन्हें मैं नमन करता हूँ। हे मेरे देवों के देव, मेरी यात्रा के सहायक बनो।

एकं अनेकं च विचारयन्तं एकं विभुं भिन्नमनन्तरूपम्। एकाक्षरं यं निखिलं वदन्ति मार्गसहायं मम देव देव॥

Ekam Anekam Cha Vichaarayantam Ekam Vibhum Bhinnam-ananta-roopam Ekaaksharam Yam Nikhilam Vadanti Marga-sahayam Mama Deva Deva

जो एक और अनेक का विचार करते हैं, जो एक होकर भी विभु तथा भिन्न-भिन्न अनन्त रूपों वाले हैं, जिन्हें सब एकाक्षर (ॐ) कहते हैं — हे मेरे देवों के देव, मेरी यात्रा के सहायक बनो।

यं ब्रह्ममुख्याः सुरवर्यगण्या ध्यायन्ति योगेन सदा मुनीन्द्राः। सर्वेश्वरं सर्वहितावहं तं मार्गसहायं मम देव देव॥

Yam Brahma-mukhyaah Sura-varya-ganyaa Dhyaayanti Yogena Sadaa Muneendraah Sarveshvaram Sarva-hitaavaham Tam Marga-sahayam Mama Deva Deva

जिनका ब्रह्मा आदि श्रेष्ठ देवगण तथा मुनीन्द्र सदा योग द्वारा ध्यान करते हैं, जो सर्वेश्वर तथा सबका हित करने वाले हैं — हे मेरे देवों के देव, मेरी यात्रा के सहायक बनो।

पञ्चाननं फालविलोचनं वा फणीन्द्रहारं प्रलयानलाभम्। भस्माङ्गरागं भवनाशनं तं मार्गसहायं मम देव देव॥

Panchananam Phala-vilochanam Va Phaneendra-haram Pralayanalaabham Bhasmanga-raagam Bhava-nashanam Tam Marga-sahayam Mama Deva Deva

जो पंचमुख हैं, जिनके ललाट पर नेत्र है, जो नागराज की माला धारण करते हैं, जो प्रलयाग्नि के समान तेजस्वी हैं, जो भस्म से अंगराग किए हुए तथा संसार के नाशक हैं — हे मेरे देवों के देव, मेरी यात्रा के सहायक बनो।

यो भूतनाथो भुवनाधिपो वा यो वामदेवो भगवान्महेशः। यो रुद्ररूपः स तु शूलपाणिः मार्गसहायं मम देव देव॥

Yo Bhoota-natho Bhuvanaadhipo Va Yo Vamadevo Bhagavan-Mahesha Yo Rudra-roopah Sa Tu Shoolapaanih Marga-sahayam Mama Deva Deva

जो भूतनाथ और भुवनों के अधिपति हैं, जो वामदेव, भगवान महेश हैं, जो रुद्ररूप शूलपाणि हैं — हे मेरे देवों के देव, मेरी यात्रा के सहायक बनो।

यस्याङ्घ्रिपद्मात्सुरसिन्धुरादौ यस्योत्तमाङ्गाद्विधुगाङ्गतोयम्। यो दक्षिणामूर्तिरनेकरूपः मार्गसहायं मम देव देव॥

Yasyanghri-padmaat-sura-sindhur-adau Yasyottamaangaad-vidhu-gaanga-toyam Yo Dakshinamoortir-aneka-roopah Marga-sahayam Mama Deva Deva

जिनके चरणकमल से आदि में देवनदी (गंगा) प्रकट हुई, जिनके उत्तमांग (मस्तक) से चन्द्रमा-सी उज्ज्वल गंगा का जल बहता है, जो अनेक रूपों वाले दक्षिणामूर्ति हैं — हे मेरे देवों के देव, मेरी यात्रा के सहायक बनो।