माता गुरुतरा भूमेः PDF
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माता गुरुतरा भूमेः खात् पितोच्चतरस्तथा। मनः शीघ्रतरं वातात् चिन्ता बहुतरी तृणात्॥
mātā gurutarā bhūmeḥ khāt pitoccatarastathā। manaḥ śīghrataraṁ vātāt cintā bahutarī tṛṇāt॥
माता पृथ्वी से भी अधिक गुरु (भारी एवं पूज्य) है; पिता आकाश से भी ऊँचा है; मन वायु से भी अधिक तीव्र है; और चिन्ताएँ घास के तिनकों से भी अधिक हैं। युधिष्ठिर का यह प्रसिद्ध उत्तर माता को पृथ्वी से और पिता को आकाश से भी श्रेष्ठ बताता है, और साथ ही चेतावनी देता है कि चंचल मन और उसकी चिन्ताएँ अनन्त हैं।