मुग्धा मुहुर्विदधती वदने मुरारेः PDF
मुग्धा मुहुर्विदधती वदने मुरारेः की पूरी लिरिक्स — संस्कृत, रोमन व अर्थ सहित। एक क्लिक में PDF सेव करें या प्रिंट करें।
मुग्धा मुहुर्विदधती वदने मुरारेः प्रेमत्रपाप्रणिहितानि गतागतानि । माला दृशोर्मधुकरीव महोत्पले या सा मे श्रियं दिशतु सागरसम्भवायाः ॥
Mugdha muhurvidadhati vadane murareh Prematrapapranihitani gatagatani Mala drishormadhukariva mahotpale ya Sa me shriyam dishatu sagarasambhavayah
मन को मोहने वाली लक्ष्मी मुरारि (विष्णु) के मुख पर बार-बार प्रेम और लज्जा से युक्त अपनी दृष्टि डालती हैं, जो आती-जाती रहती है। समुद्र से उत्पन्न उन लक्ष्मी के नेत्रों की वह दृष्टि-माला, महान् नीलकमल पर मँडराती भ्रमर-पंक्ति के समान है। वह दृष्टि मुझे श्री (समृद्धि) प्रदान करे।